हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को मध्य प्रदेश में एक बड़ा सरकारी ठेका मिला है. कंपनी को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की ओर से ₹198.31 करोड़ का प्रोजेक्ट दिया गया है. इसके तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 12वीं रिजर्व बटालियन के लिए आवासीय और गैर-आवासीय सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. यह परियोजना मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के जामुनिया तालाब गांव में बनाई जाएगी. कंपनी को इस काम को पूरा करने के लिए दो साल का समय दिया गया है.
कंपनी ने 4 नवंबर को स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी. उसे यह ठेका मिलने की पुष्टि लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस मिलने के बाद हुई. इस नए प्रोजेक्ट से कंपनी के पास आने वाले समय में काम की उपलब्धता बढ़ेगी. हालांकि, निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनी अपने बढ़ते प्रोजेक्ट्स को बेहतर मुनाफे में बदल पाएगी?
क्या है नया प्रोजेक्ट और कैसे होगा काम?
यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC मॉडल के तहत पूरी की जाएगी. आसान भाषा में समझें तो इस मॉडल में कंपनी को निर्माण से जुड़ी पूरी जिम्मेदारी उठानी होती है. इसमें जरूरी सामग्री की व्यवस्था करना, निर्माण कार्य करना और तय समय में परियोजना को पूरा करना शामिल है. इस तरह के ठेकों में कंपनी के लिए समय पर काम पूरा करना और लागत को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी होता है. अगर निर्माण में देरी होती है या खर्च बढ़ता है, तो कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
कंपनी के पास कितना काम?
हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर का ऑर्डर बुक 31 अक्टूबर 2026 तक ₹1,776.19 करोड़ था. ऑर्डर बुक का मतलब उन परियोजनाओं की कुल कीमत है, जिन्हें कंपनी हासिल कर चुकी है, लेकिन जिनका काम अभी पूरा होना बाकी है.मार्च 2026 के अंत में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹1,133 करोड़ था. ऐसे में कुछ ही महीनों में इसमें अच्छी बढ़ोतरी हुई है. बढ़ता ऑर्डर बुक कंपनी को भविष्य में काम मिलने की बेहतर स्थिति दिखाता है.
हालांकि, केवल बड़े ऑर्डर बुक से मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती. कंपनी को यह भी देखना होगा कि वह इन परियोजनाओं को कितनी कुशलता से पूरा करती है. कंपनी ने अपने नए ऑर्डर बुक का कारोबार के हिसाब से अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया है.
टोल वसूली से आता है सबसे ज्यादा पैसा
हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर का कारोबार मुख्य रूप से टोल वसूली, निर्माण और रियल एस्टेट से जुड़ा है. कंपनी के लिए टोल वसूली अब भी कमाई का सबसे बड़ा जरिया है.वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल आय में टोल वसूली कारोबार की हिस्सेदारी 73.7% रही, जबकि EPC कारोबार का योगदान 19.8% था. यानी कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी टोल संचालन से आता है.
नया सरकारी ठेका कंपनी के निर्माण कारोबार को मजबूत कर सकता है, लेकिन इससे कंपनी के कुल कारोबार की तस्वीर तुरंत बदलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
बढ़ी कमाई, लेकिन मुनाफे पर नजर जरूरी
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल आय 25.6% बढ़कर ₹633.4 करोड़ रही. इसी दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा 42% बढ़कर ₹31.8 करोड़ पहुंच गया.हालांकि, जून 2026 तिमाही के नतीजों में एक अलग तस्वीर देखने को मिली. इस दौरान कंपनी का राजस्व बढ़कर करीब ₹304.3 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹112.5 करोड़ था. लेकिन शुद्ध मुनाफा ₹7.2 करोड़ से घटकर करीब ₹1.1 करोड़ रह गया.इससे पता चलता है कि सिर्फ कारोबार बढ़ना काफी नहीं है. कंपनी को खर्चों पर नियंत्रण रखते हुए मुनाफा भी बढ़ाना होगा.
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
₹198.31 करोड़ का नया ठेका कंपनी के लिए सकारात्मक खबर है. इससे उसके पास काम की उपलब्धता बढ़ेगी और सरकारी निर्माण परियोजनाओं में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी.लेकिन निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनी के काम पूरा करने की गति, निर्माण लागत और मुनाफे पर नजर रखनी चाहिए. बढ़ते ऑर्डर बुक का असली फायदा तभी मिलेगा, जब कंपनी समय पर परियोजनाएं पूरी करके उनसे अच्छी कमाई कर सकेगी.
(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)
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