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Home > बिज़नेस > हरियाणा में दौड़ी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत ट्रैक पर सफल रहा ट्रायल, अन्य ट्रेनों से कैसे है अलग

हरियाणा में दौड़ी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत ट्रैक पर सफल रहा ट्रायल, अन्य ट्रेनों से कैसे है अलग

फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन का केवल ट्रायल ही पूरा किया गया है. फिलहाल ट्रेन के सुरक्षा मानकों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जाएगा. भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी में है.

Written By:
Edited By: Gaurav Verma
Last Updated: 2026-05-01 17:06:53

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Haryana First Hydrogen Train Trial: हाइड्रोजन ट्रेन इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है. जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सफल रहा है. ट्रायल के साथ ही हाइड्रोजन ट्रेन अपने अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जींद में आज रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्लांट और ट्रेन सेट का निरीक्षण किया गया है. माना जा रहा है कि ट्रेन को ट्रायल के लिए फिलहाल सोनीपत तक चलाया जाएगा. एक बार ट्रेन का पूरी तरह से और बारीकी से निरीक्षण हो जाए तो इसके बाद ट्रेन का नियमित संचालन किया जाएगा.

फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन का केवल ट्रायल ही पूरा किया गया है. फिलहाल ट्रेन के सुरक्षा मानकों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जाएगा. भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी में है. 

पर्यावरण के लिहाज से काफी बेहतर 

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के लिहाज से भी काफी किफायती माना जा रहा है. दरअसल, इस ट्रेन के चलने से न तो किसी तरह का धुंआ होगा और न ही प्रदूषण होगा. माना जा रहा है कि यह ट्रेन 10 कोच के साथ पटरी पर दौड़ेगी. फिलहाल ट्रेन का ट्रायल जींद सोनीपत रूट पर किया गया है. हो सकता है यह ट्रेन आगे चलकर रेलवे के ऑपरेशन कॉस्ट को भी कम कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक इस ट्रेन में आधुनिक शौचालय और टेंपरेचर सेंसर जैसे विकल्प मिलते हैं. यात्रियों के लिए हैंडग्रिप्स भी लगाए गए हैं. 

यह भी पढ़ें: ट्रेन में किस उम्र के बच्चों का नहीं लगता है टिकट? कितनी उम्र तक फ्री में कर सकते हैं यात्रा, जानें क्या हैं नियम

हाइड्रोजन ट्रेन के फायदे-नुकसान 

हाइड्रोजन ट्रेन के अपने कुछ फायदे-नुकसान हैं. बात करें इससे होने वाले फायदे की तो यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल है, जो बिलकुल प्रदूषण नहीं करती है. इसके अलावा इसकी ऑपरेशनल कॉस्ट भी अन्य ट्रेनों के मुकाबले कम है. यह एक फास्ट रिफ्यूलिंग ऑप्शन हो सकता है. हाइड्रोजन ट्रेन इलेक्ट्रिक ट्रेन की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करती है. हालांकि, नुकसान की बात करें तो इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट में ज्यादा लागत लगने के साथ ही इसमें कुछ मामलों में लीकेज होने का भी जोखिम रहता है. 

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Last Updated: 2026-05-01 17:06:53

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Haryana First Hydrogen Train Trial: हाइड्रोजन ट्रेन इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है. जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सफल रहा है. ट्रायल के साथ ही हाइड्रोजन ट्रेन अपने अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जींद में आज रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्लांट और ट्रेन सेट का निरीक्षण किया गया है. माना जा रहा है कि ट्रेन को ट्रायल के लिए फिलहाल सोनीपत तक चलाया जाएगा. एक बार ट्रेन का पूरी तरह से और बारीकी से निरीक्षण हो जाए तो इसके बाद ट्रेन का नियमित संचालन किया जाएगा.

फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन का केवल ट्रायल ही पूरा किया गया है. फिलहाल ट्रेन के सुरक्षा मानकों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जाएगा. भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी में है. 

पर्यावरण के लिहाज से काफी बेहतर 

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के लिहाज से भी काफी किफायती माना जा रहा है. दरअसल, इस ट्रेन के चलने से न तो किसी तरह का धुंआ होगा और न ही प्रदूषण होगा. माना जा रहा है कि यह ट्रेन 10 कोच के साथ पटरी पर दौड़ेगी. फिलहाल ट्रेन का ट्रायल जींद सोनीपत रूट पर किया गया है. हो सकता है यह ट्रेन आगे चलकर रेलवे के ऑपरेशन कॉस्ट को भी कम कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक इस ट्रेन में आधुनिक शौचालय और टेंपरेचर सेंसर जैसे विकल्प मिलते हैं. यात्रियों के लिए हैंडग्रिप्स भी लगाए गए हैं. 

यह भी पढ़ें: ट्रेन में किस उम्र के बच्चों का नहीं लगता है टिकट? कितनी उम्र तक फ्री में कर सकते हैं यात्रा, जानें क्या हैं नियम

हाइड्रोजन ट्रेन के फायदे-नुकसान 

हाइड्रोजन ट्रेन के अपने कुछ फायदे-नुकसान हैं. बात करें इससे होने वाले फायदे की तो यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल है, जो बिलकुल प्रदूषण नहीं करती है. इसके अलावा इसकी ऑपरेशनल कॉस्ट भी अन्य ट्रेनों के मुकाबले कम है. यह एक फास्ट रिफ्यूलिंग ऑप्शन हो सकता है. हाइड्रोजन ट्रेन इलेक्ट्रिक ट्रेन की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करती है. हालांकि, नुकसान की बात करें तो इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट में ज्यादा लागत लगने के साथ ही इसमें कुछ मामलों में लीकेज होने का भी जोखिम रहता है. 

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