Gorakhpur viral video: गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में दरोगा और वकील के बीच सड़क पर मारपीट का वीडियो रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. वीडियो में वर्दी पहने बाइक सवार व्यक्ति को एक युवक रोककर जूते से पीटता नजर आ रहा था. पहली नजर में मामला पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच विवाद का दिखाई दे रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में वायरल वीडियो की पूरी कहानी ही फर्जी निकली. पुलिस के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहा वर्दीधारी व्यक्ति पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है और दूसरा युवक भी अधिवक्ता नहीं है. जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज बढ़ाने के लिए कथित तौर पर पूरी घटना को फिल्माया गया था. पुलिस ने दोनों संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
वायरल वीडियो में काली सदरी और सफेद शर्ट पहने एक युवक सड़क पर बाइक सवार वर्दीधारी व्यक्ति को रोकता दिखाई देता है. युवक नौका विहार में हुई किसी स्टंट की घटना का जिक्र करते हुए वर्दीधारी व्यक्ति को गालियां देता नजर आता है. इसके बाद वर्दी पहने व्यक्ति बाइक से उतरता है और दोनों के बीच बहस शुरू हो जाती है. युवक उससे पूछता है कि उसके पिता को थाने ले जाकर क्यों बैठाया गया था. इस पर वर्दीधारी व्यक्ति जवाब देता है कि युवक घर पर नहीं मिला था, इसलिए उसके पिता को थाने ले जाना पड़ा.
सड़क पर शुरू हो गई मारपीट
बातचीत के दौरान विवाद बढ़ जाता है और दोनों के बीच सड़क पर हाथापाई शुरू हो जाती है. वीडियो में युवक वर्दी पहने व्यक्ति को जूते से पीटता दिखाई देता है. आसपास मौजूद कुछ लोग दोनों को रोकने और बीच बचाव करने की कोशिश करते नजर आते हैं. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे दरोगा और वकील के बीच मारपीट के रूप में शेयर किया जाने लगा. मामला पुलिस विभाग से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने भी तत्काल वीडियो की सत्यता की जांच शुरू कर दी.
पुलिस ने तलाश कर दोनों युवकों को पकड़ा
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसमें दिखाई दे रहे दोनों युवकों की पहचान कराने की कोशिश शुरू की. पुलिस टीम ने दोनों की पहचान की और उनका पता लगाने के बाद उन्हें खोज निकाला. रविवार शाम दोनों युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति पुलिसकर्मी नहीं है और दूसरे युवक का भी अधिवक्ता से कोई संबंध नहीं है. यानी जिस घटना को सोशल मीडिया पर दरोगा और वकील के बीच विवाद बताकर वायरल किया गया, उसमें दोनों ही किरदार फर्जी निकले.
लाइक और व्यूज के लिए बनाया गया वीडियो
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि पुलिस की जांच में वीडियो पूरी तरह फर्जी पाया गया है. उनके मुताबिक, वर्दी पहने व्यक्ति पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है और अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहा युवक भी फर्जी है. पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज बढ़ाने के लिए इस घटना को फिल्माया गया था. दोनों युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और शाहपुर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है.
भ्रामक वीडियो वायरल करने वालों पर होगी कार्रवाई
एसपी सिटी ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्यों के आधार पर अफवाह फैलाने और झूठे वीडियो बनाकर वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि वीडियो को किस उद्देश्य से बनाया गया और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया. इस मामले ने एक बार फिर यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो को बिना सत्यापन के सच मानना कितना भ्रामक हो सकता है. पुलिस की जांच के बाद जिस वीडियो को दरोगा और वकील के बीच मारपीट का मामला समझा जा रहा था, वह सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए बनाया गया फर्जी वीडियो निकला.