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Home > क्राइम > कौन था मान्या सुर्वे, जिसने दाउद इब्राहिम से की दुश्मनी; 1982 में देश के पहले एनकाउंटर में हुआ ढेर

कौन था मान्या सुर्वे, जिसने दाउद इब्राहिम से की दुश्मनी; 1982 में देश के पहले एनकाउंटर में हुआ ढेर

Manya Surve: मुंबई में अपराध की दुनिया में अपना नाम कमाने वाले मान्या सुर्वे का 1982 में एक दर्दनाक अंत हुआ. जब देश के पहले आधिकारिक एनकाउंटर में मान्या सुर्वे को मार गिराया गया.

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Last Updated: April 26, 2026 15:47:55 IST

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Manya Surve: आपने कुख्यात वडाला एनकाउंटर के बारे में चर्चा करेंगे. क्या आपको पता है कि इस एनकाउंटर (Crime News) में किसे मार गिराया गया था. अगर आपको नहीं पता तो चलिए आपको बताते हैं. वो कुख्यात अपराधी था मान्या सुर्वे, जिसे वडाला एनकाउंटर में मार गिराया गया था. जिसके अपराध की शुरुआत 1970 के दशक से पहले हुई थी. लेकिन अंत 1982 में हुआ था. मान्या सुर्वे के बारे में बताया जाता है कि वो जितना कुख्यात अपराधी था, उतना ही ज़िद्दी भी था.

अपने उग्र स्वभाव के लिए मशहूर मान्या सुर्वे को उन दिनों दाऊद इब्राहिम का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता था. आखिरकार मुंबई पुलिस उसके आतंक के राज को खत्म करने में सफल रही.

पहले एनकाउंटर के तौर पर दर्ज है नाम

मुंबई पुलिस के इतिहास में वडाला एनकाउंटर को आधिकारिक तौर पर देश के पहले पुलिस एनकाउंटर के रूप में मान्यता प्राप्त है. उस दौर में मुंबई की आम जनता विभिन्न विरोधी गुटों के बीच अक्सर भड़कने वाली गैंगवार (गिरोहों की लड़ाई) के कारण लगातार दहशत में जीती थी. 1980-81 में मुंबई पुलिस ने एक विशेष इकाई का गठन किया, जिसे विशेष रूप से शहर में अंडरवर्ल्ड के बढ़ते खतरे को रोकने का काम सौंपा गया था. इसी इकाई ने उस ऐतिहासिक पहले एनकाउंटर में मान्या सुर्वे को मार गिराया था.

कौन था मान्या सुर्वे?

मान्या सुर्वे का नाम आतंक की दुनिया में एक मशहूर नाम बन चुका था. जिसका जन्म मनोहर अर्जुन सुर्वे के रूप में हुआ था. उसने मुंबई के कीर्ति कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था, लेकिन अपने सौतेले भाई भार्गव दादा के प्रभाव में आकर वह अपराध की दुनिया में खिंचा चला गया. कॉलेज में उसके दोस्त उसे प्यार से मान्या कहकर पुकारते थे. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उसने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक गिरोह बना लिया. इसके बाद 1969 में इस गिरोह ने एक हत्या को अंजाम दिया.

कैसे हुआ एनकाउंटर?

मान्या सुर्वे के बढ़ते आतंक को देखते हुए इसका केस स्पेशल यूनिट के अधिकारियों इशाक बागवान और राजा तांबट को सौंप दिया गया. जनवरी 1982 में पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि मान्या अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए वडाला स्थित अंबेडकर कॉलेज आ सकता है. 11 जनवरी को यह जानकारी सही साबित हुई. मुंबई पुलिस की स्पेशल यूनिट से इशाक और उनकी टीम पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद थी. कहा जाता है कि मान्या को शायद इस जाल की भनक लग गई थी; फिर भी वडाला इलाके में हुई मुठभेड़ में मान्या सुर्वे को मार गिराया गया. 

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Manya Surve: आपने कुख्यात वडाला एनकाउंटर के बारे में चर्चा करेंगे. क्या आपको पता है कि इस एनकाउंटर (Crime News) में किसे मार गिराया गया था. अगर आपको नहीं पता तो चलिए आपको बताते हैं. वो कुख्यात अपराधी था मान्या सुर्वे, जिसे वडाला एनकाउंटर में मार गिराया गया था. जिसके अपराध की शुरुआत 1970 के दशक से पहले हुई थी. लेकिन अंत 1982 में हुआ था. मान्या सुर्वे के बारे में बताया जाता है कि वो जितना कुख्यात अपराधी था, उतना ही ज़िद्दी भी था.

अपने उग्र स्वभाव के लिए मशहूर मान्या सुर्वे को उन दिनों दाऊद इब्राहिम का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता था. आखिरकार मुंबई पुलिस उसके आतंक के राज को खत्म करने में सफल रही.

पहले एनकाउंटर के तौर पर दर्ज है नाम

मुंबई पुलिस के इतिहास में वडाला एनकाउंटर को आधिकारिक तौर पर देश के पहले पुलिस एनकाउंटर के रूप में मान्यता प्राप्त है. उस दौर में मुंबई की आम जनता विभिन्न विरोधी गुटों के बीच अक्सर भड़कने वाली गैंगवार (गिरोहों की लड़ाई) के कारण लगातार दहशत में जीती थी. 1980-81 में मुंबई पुलिस ने एक विशेष इकाई का गठन किया, जिसे विशेष रूप से शहर में अंडरवर्ल्ड के बढ़ते खतरे को रोकने का काम सौंपा गया था. इसी इकाई ने उस ऐतिहासिक पहले एनकाउंटर में मान्या सुर्वे को मार गिराया था.

कौन था मान्या सुर्वे?

मान्या सुर्वे का नाम आतंक की दुनिया में एक मशहूर नाम बन चुका था. जिसका जन्म मनोहर अर्जुन सुर्वे के रूप में हुआ था. उसने मुंबई के कीर्ति कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था, लेकिन अपने सौतेले भाई भार्गव दादा के प्रभाव में आकर वह अपराध की दुनिया में खिंचा चला गया. कॉलेज में उसके दोस्त उसे प्यार से मान्या कहकर पुकारते थे. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उसने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक गिरोह बना लिया. इसके बाद 1969 में इस गिरोह ने एक हत्या को अंजाम दिया.

कैसे हुआ एनकाउंटर?

मान्या सुर्वे के बढ़ते आतंक को देखते हुए इसका केस स्पेशल यूनिट के अधिकारियों इशाक बागवान और राजा तांबट को सौंप दिया गया. जनवरी 1982 में पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि मान्या अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए वडाला स्थित अंबेडकर कॉलेज आ सकता है. 11 जनवरी को यह जानकारी सही साबित हुई. मुंबई पुलिस की स्पेशल यूनिट से इशाक और उनकी टीम पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद थी. कहा जाता है कि मान्या को शायद इस जाल की भनक लग गई थी; फिर भी वडाला इलाके में हुई मुठभेड़ में मान्या सुर्वे को मार गिराया गया. 

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