Adhik maas Kya hota: सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक समय माना जाता है. इसे ‘पुरुषोत्तम मास’, ‘मलमास’ और ‘अधिमास’ जैसे नामों से भी जाना जाता है. यह महीना लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और हिंदू पंचांग में अतिरिक्त यानी 13वें महीने के रूप में जुड़ता है. वर्ष 2026 में इसकी शुरुआत 17 मई से मानी जा रही है.
अधिक मास को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन इससे जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा भगवान विष्णु, भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप से संबंधित बताई जाती है. आइए जानते हैं इस रहस्य को विस्तार से.
हिरण्यकश्यप को मिला था अद्भुत वरदान
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया. वरदान मांगते समय उसने ऐसा संरक्षण मांगा कि उसका अंत लगभग असंभव हो जाए.
उसने इच्छा जताई कि-
- उसकी मृत्यु न किसी मनुष्य से हो
- न किसी पशु से हो
- न देवता उसे मार सकें, न दैत्य
- न दिन में मृत्यु हो, न रात में
- न घर के अंदर मरे, न बाहर
- न धरती पर मरे, न आकाश में
- न किसी अस्त्र से, न शस्त्र से
- और न ही वर्ष के 12 महीनों में उसका अंत हो
ब्रह्मा जी ने वरदान दे दिया. इसके बाद हिरण्यकश्यप अत्याचारी बन गया और स्वयं को ईश्वर घोषित करने लगा.
भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार
हिरण्यकश्यप का पुत्र ‘प्रह्लाद’, भगवान विष्णु का परम भक्त था. यह बात दैत्यराज को स्वीकार नहीं थी. उसने कई बार प्रह्लाद की भक्ति तोड़ने का प्रयास किया.
कथाओं में वर्णन मिलता है कि उसने:
- प्रह्लाद को ऊंचाई से गिरवाने की कोशिश की
- हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया
- विष दिलाने का प्रयास किया
- होलिका के साथ अग्नि में बैठाया
लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे.
भगवान विष्णु ने कैसे तोड़ा वरदान?
जब अत्याचार सीमा पार कर गया, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया. यह रूप आधा मनुष्य और आधा सिंह था.इस अवतार में भगवान ने हिरण्यकश्यप का अंत इस प्रकार किया
- वे न पूर्ण मनुष्य थे, न पशु
- समय था गोधूलि बेला, जो न दिन था न रात
- स्थान था दहलीज, जो न अंदर था न बाहर
- हिरण्यकश्यप को अपनी जांघों पर रखा, जो न धरती थी न आकाश
- नाखूनों से वध किया, जो न अस्त्र थे न शस्त्र
इस तरह भगवान विष्णु ने वरदान की हर शर्त का सम्मान रखते हुए अधर्म का नाश किया.
क्यों बना साल का 13वां महीना? (Malmass Kya hota Hai)
मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने यह भी वरदान लिया था कि उसका वध वर्ष के सामान्य 12 महीनों में न हो. तब भगवान विष्णु ने समय चक्र में एक अतिरिक्त माह की रचना की, जो 12 महीनों से अलग था.इसी अतिरिक्त महीने में भगवान नरसिंह ने दैत्यराज का अंत किया. इसलिए यह महीना अधिक मास कहलाया.चूंकि यह महीना भगवान विष्णु यानी पुरुषोत्तम से जुड़ा माना गया, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.
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