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Kab Hai Janmashtami: कब है कृष्ण जन्माष्टमी? कृष्ण भक्त नोट कर लें तारीख; जानें अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और पूजा विधि

Kab Hai Janmashtami | Janmashtami 2026 Date: जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. भक्त व्रत रखकर भगवान कृष्ण की पूजा करेंगे और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाएंगे. यह पर्व धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश का संदेश देता है.

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Last Updated: 2026-08-30 11:11:36

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Kab Hai Janmashtami | Janmashtami 2026 Date: भगवान कृष्ण के जन्म के तौर पर मनाया जाने वाला जन्माष्टमी का त्योहार इस साल 4 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा. जन्माष्टमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और पिछली रात को भगवान कृष्ण का जन्म मनाते हैं. भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था.

कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? (Janmashtami Date)

  • अष्टमी तिथि शुरू: 3 सितंबर, दोपहर 12:26 बजे
  • अष्टमी तिथि खत्म: 4 सितंबर, दोपहर 12:14 बजे से पहले

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी तब खास तौर पर शुभ मानी जाती है जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में हो. इस साल रोहिणी नक्षत्र 3 सितंबर को रात 11:30 बजे शुरू होगा और 4 सितंबर को दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा. पंचांग के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, 2026 को मनाई जाएगी.

श्री कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त (Janmashtami Shubh Muhurat)

श्री कृष्ण के जन्मदिन से जुड़ी पूजा का शुभ मुहूर्त 4 सितंबर को रात 11:57 बजे से 5 सितंबर को दोपहर 12:43 बजे तक है. इस बीच, व्रत 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे खोला जा सकता है.

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व (Religious significance of Janmashtami)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को सुख और समृद्धि मिलती है. श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है. जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करने का खास महत्व है. पंचामृत से अभिषेक करना और तुलसी के पत्तों के साथ मक्खन और मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि पूरी आस्था और भक्ति के साथ श्री कृष्ण को याद करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है.

ये भी पढ़ें: UP Petrol Diesel Price 30 August: गाड़ी में तेल भरवाने का है प्लान? पहले जान लें आज का रेट, आपके शहर में कितने रुपये लीटर मिल रहा पेट्रोल-डीजल

जन्माष्टमी पूजा कैसे करें? (Janmashtami Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठें, नहाएं और साफ कपड़े पहनें. 
  • पूजा की जगह साफ करें. चौराहे पर पीले या लाल कपड़े पहनें. 
  • चौराहे पर भगवान कृष्ण की तस्वीर लगाएं. 
  • भगवान कृष्ण की मूर्ति का पंचामृत से अभिषेक करें. 
  • इसके बाद मूर्ति को साफ पानी से धो लें. 
  • बाल कृष्ण की मूर्ति को रेशमी कपड़े पहनाएं. 
  • मूर्ति को चंदन, हल्दी-केसर, मोर पंख, मुकुट, बांसुरी और गहनों से सजाएं. 
  • भगवान कृष्ण के पसंदीदा खाने के साथ फल चढ़ाएं. प्रसाद में तुलसी के पत्ते शामिल करें. 
  • धूप और दीप जलाएं और भगवान की आरती करें. 
  • रात ठीक 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाएं. पूजा पाठ करें और प्रसाद बांटें.

ये भी पढ़ें: Aaj Kaisa Rahega Mausam: 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलेंगी हवाएं,पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड की चेतावनी; IMD की बारिश को लेकर डरा देने वाला अलर्ट

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Last Updated: 2026-08-30 11:11:36

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Kab Hai Janmashtami | Janmashtami 2026 Date: भगवान कृष्ण के जन्म के तौर पर मनाया जाने वाला जन्माष्टमी का त्योहार इस साल 4 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा. जन्माष्टमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और पिछली रात को भगवान कृष्ण का जन्म मनाते हैं. भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था.

कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? (Janmashtami Date)

  • अष्टमी तिथि शुरू: 3 सितंबर, दोपहर 12:26 बजे
  • अष्टमी तिथि खत्म: 4 सितंबर, दोपहर 12:14 बजे से पहले

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी तब खास तौर पर शुभ मानी जाती है जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में हो. इस साल रोहिणी नक्षत्र 3 सितंबर को रात 11:30 बजे शुरू होगा और 4 सितंबर को दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा. पंचांग के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, 2026 को मनाई जाएगी.

श्री कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त (Janmashtami Shubh Muhurat)

श्री कृष्ण के जन्मदिन से जुड़ी पूजा का शुभ मुहूर्त 4 सितंबर को रात 11:57 बजे से 5 सितंबर को दोपहर 12:43 बजे तक है. इस बीच, व्रत 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे खोला जा सकता है.

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व (Religious significance of Janmashtami)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को सुख और समृद्धि मिलती है. श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है. जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करने का खास महत्व है. पंचामृत से अभिषेक करना और तुलसी के पत्तों के साथ मक्खन और मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि पूरी आस्था और भक्ति के साथ श्री कृष्ण को याद करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है.

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जन्माष्टमी पूजा कैसे करें? (Janmashtami Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठें, नहाएं और साफ कपड़े पहनें. 
  • पूजा की जगह साफ करें. चौराहे पर पीले या लाल कपड़े पहनें. 
  • चौराहे पर भगवान कृष्ण की तस्वीर लगाएं. 
  • भगवान कृष्ण की मूर्ति का पंचामृत से अभिषेक करें. 
  • इसके बाद मूर्ति को साफ पानी से धो लें. 
  • बाल कृष्ण की मूर्ति को रेशमी कपड़े पहनाएं. 
  • मूर्ति को चंदन, हल्दी-केसर, मोर पंख, मुकुट, बांसुरी और गहनों से सजाएं. 
  • भगवान कृष्ण के पसंदीदा खाने के साथ फल चढ़ाएं. प्रसाद में तुलसी के पत्ते शामिल करें. 
  • धूप और दीप जलाएं और भगवान की आरती करें. 
  • रात ठीक 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाएं. पूजा पाठ करें और प्रसाद बांटें.

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