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कर्क में मंगल और गुरु की युति, नीचभंग योग का बन रहा संयोग! इन 3 राशियों की खुलेगी किस्मत

Mars Jupiter conjunction 2026: 18 सितंबर 2026 को मंगल के कर्क राशि में प्रवेश से वहां पहले से मौजूद बृहस्पति के साथ युति बन रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं में कर्क राशि में मंगल को नीच और गुरु को उच्च का माना जाता है. कुछ गणनाओं में इस युति को नीचभंग योग से जोड़ा जा रहा है.

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Last Updated: September 19, 2026 16:09:23 IST

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Mars Jupiter conjunction 2026: 18 सितंबर 2026 को मंगल ने कर्क राशि में प्रवेश किया है. कर्क राशि में पहले से ही देवगुरु बृहस्पति मौजूद हैं, जिससे मंगल और गुरु की युति बन रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि में मंगल नीच के माने जाते हैं, जबकि बृहस्पति यहां उच्च के होते हैं. ऐसे में कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में इस युति को मंगल के नीचत्व के प्रभाव में कमी और नीचभंग योग से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, हर कुंडली में पूर्ण नीचभंग राजयोग बनना जरूरी नहीं है और इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करता है.

मंगल-गुरु की युति क्यों है खास?

ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, जमीन और संपत्ति का कारक माना जाता है. वहीं बृहस्पति ज्ञान, धन, शिक्षा, सौभाग्य और विस्तार से जुड़े माने जाते हैं. मंगल के कर्क राशि में आने और वहां पहले से मौजूद गुरु के साथ युति बनने से दोनों ग्रहों की ऊर्जाएं एक साथ आती हैं. कर्क राशि में मंगल को नीच का माना जाता है, जबकि गुरु उच्च के होते हैं. इसी वजह से कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में माना जाता है कि गुरु की स्थिति मंगल के कमजोर प्रभाव को कम कर सकती है. हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में योग का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए ग्रहों की स्थिति, भाव, दृष्टि और दशा का भी विश्लेषण किया जाता है.

कर्क राशि वालों को करियर में मिल सकती है नई जिम्मेदारी

कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर प्राप्त हो सकता है. कारोबार करने वाले लोगों के लिए भी नए अवसर बनने के संकेत हैं. लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ सकता है. आर्थिक मामलों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि इस दौरान गुस्से या जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है.

सिंह राशि को नौकरी और कारोबार में नए अवसर

सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल-गुरु की युति करियर में नए अवसर लेकर आ सकती है. नौकरी बदलने का विचार कर रहे लोगों को नया प्रस्ताव मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा, जिसका फायदा भविष्य में मिल सकता है. कारोबारियों को नए प्रोजेक्ट या काम मिलने की संभावना बन सकती है. आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत भी मिल सकते हैं. हालांकि निवेश से जुड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा.

तुला राशि के लिए रुका पैसा आगे बढ़ने के संकेत

तुला राशि के जातकों के लिए यह युति आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत दे सकती है. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने या कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है. काम के सिलसिले में नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा. कारोबारियों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं. हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा और किसी बड़े निवेश से पहले पूरी जानकारी हासिल करने की सलाह दी जाती है.

कितने समय तक रहेगा मंगल-गुरु की युति का प्रभाव?

18 सितंबर 2026 को मंगल के कर्क राशि में प्रवेश के बाद मंगल और गुरु की युति का प्रभाव इस अवधि में देखने को मिलेगा. हालांकि इसका वास्तविक असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है, क्योंकि जन्मकुंडली में मंगल और गुरु की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए नौकरी, कारोबार या निवेश से जुड़े बड़े फैसले केवल राशि के आधार पर नहीं लेने चाहिए. अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

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Mars Jupiter conjunction 2026: 18 सितंबर 2026 को मंगल ने कर्क राशि में प्रवेश किया है. कर्क राशि में पहले से ही देवगुरु बृहस्पति मौजूद हैं, जिससे मंगल और गुरु की युति बन रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि में मंगल नीच के माने जाते हैं, जबकि बृहस्पति यहां उच्च के होते हैं. ऐसे में कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में इस युति को मंगल के नीचत्व के प्रभाव में कमी और नीचभंग योग से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, हर कुंडली में पूर्ण नीचभंग राजयोग बनना जरूरी नहीं है और इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करता है.

मंगल-गुरु की युति क्यों है खास?

ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, जमीन और संपत्ति का कारक माना जाता है. वहीं बृहस्पति ज्ञान, धन, शिक्षा, सौभाग्य और विस्तार से जुड़े माने जाते हैं. मंगल के कर्क राशि में आने और वहां पहले से मौजूद गुरु के साथ युति बनने से दोनों ग्रहों की ऊर्जाएं एक साथ आती हैं. कर्क राशि में मंगल को नीच का माना जाता है, जबकि गुरु उच्च के होते हैं. इसी वजह से कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में माना जाता है कि गुरु की स्थिति मंगल के कमजोर प्रभाव को कम कर सकती है. हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में योग का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए ग्रहों की स्थिति, भाव, दृष्टि और दशा का भी विश्लेषण किया जाता है.

कर्क राशि वालों को करियर में मिल सकती है नई जिम्मेदारी

कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर प्राप्त हो सकता है. कारोबार करने वाले लोगों के लिए भी नए अवसर बनने के संकेत हैं. लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ सकता है. आर्थिक मामलों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि इस दौरान गुस्से या जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है.

सिंह राशि को नौकरी और कारोबार में नए अवसर

सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल-गुरु की युति करियर में नए अवसर लेकर आ सकती है. नौकरी बदलने का विचार कर रहे लोगों को नया प्रस्ताव मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा, जिसका फायदा भविष्य में मिल सकता है. कारोबारियों को नए प्रोजेक्ट या काम मिलने की संभावना बन सकती है. आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत भी मिल सकते हैं. हालांकि निवेश से जुड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा.

तुला राशि के लिए रुका पैसा आगे बढ़ने के संकेत

तुला राशि के जातकों के लिए यह युति आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत दे सकती है. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने या कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है. काम के सिलसिले में नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा. कारोबारियों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं. हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा और किसी बड़े निवेश से पहले पूरी जानकारी हासिल करने की सलाह दी जाती है.

कितने समय तक रहेगा मंगल-गुरु की युति का प्रभाव?

18 सितंबर 2026 को मंगल के कर्क राशि में प्रवेश के बाद मंगल और गुरु की युति का प्रभाव इस अवधि में देखने को मिलेगा. हालांकि इसका वास्तविक असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है, क्योंकि जन्मकुंडली में मंगल और गुरु की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए नौकरी, कारोबार या निवेश से जुड़े बड़े फैसले केवल राशि के आधार पर नहीं लेने चाहिए. अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

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