भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सीनियर पुरुष चयन समिति के अध्यक्ष (BCCI Chief Selector) के पद को लेकर चर्चाएं गर्म हैं. वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी वनडे और टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान होने के कुछ ही दिनों बाद यह बात सामने आ रही है कि वर्तमान चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने वाला है या वह इस पद को छोड़ सकते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद इसे आगे न बढ़ाने की इच्छा जताई है. माना जा रहा है कि हाल ही में हुई टीम चयन बैठक उनकी आखिरी मीटिंग थी. बीसीसीआई अब अगरकर के बाद नए चीफ सेलेक्टर की तलाश कर रहा है, और इस दौड़ में पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है. पार्थिव फिलहाल आईपीएल की टीम गुजरात टाइटन्स के साथ असिस्टेंट कोच के रूप में जुड़े हुए हैं.
हाल ही में मुंबई में हुई बीसीसीआई की समीक्षा बैठक ने भी इन चर्चाओं को हवा दी है. इस बैठक में मुख्य कोच गौतम गंभीर, टेस्ट व वनडे कप्तान शुभमन गिल, टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण मौजूद थे. इस अहम बैठक से अजीत अगरकर का गायब रहना सभी के लिए हैरानी का सबब बना, क्योंकि भारतीय क्रिकेट के इतने बड़े फैसलों के बीच चयन समिति के अध्यक्ष का न होना कई सवाल खड़े करता है.
चीफ सेलेक्टर की रेस में क्यों आगे हैं पार्थिव पटेल?
पार्थिव पटेल भारत के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था. पार्थिव ने महज 17 साल की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था, जिससे वे भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले सबसे युवा विकेटकीपरों में से एक बने.
साल 2002 से 2012 के बीच पार्थिव ने भारत के लिए 25 टेस्ट, 38 वनडे और 2 टी-20 मैच खेले हैं. पार्थिव ने लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट खेला और गुजरात की टीम को कप्तान के तौर पर ऐतिहासिक खिताब दिलाए. आईपीएल में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, सनराइजर्स हैदराबाद और कोच्चि टस्कर्स केरला जैसी कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है.
धोनी के कारण नहीं मिला ज्यादा मौका
पार्थिव की आक्रामक बल्लेबाजी और बेहतरीन विकेटकीपिंग के बावजूद, एमएस धोनी के भारतीय टीम में आने और शानदार प्रदर्शन करने के बाद पार्थिव को टीम से बाहर होना पड़ा था. इसके अलावा दिनेश कार्तिक से मिली कड़ी चुनौती ने भी उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे लगभग बंद कर दिए थे. संन्यास लेने के बाद पार्थिव पटेल कमेंट्री, कोचिंग और प्रतिभाओं को खोजने (स्कौटिंग) के काम से जुड़े रहे हैं.