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Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा का वो आदेश, जिसने पलट दी अमेरिकी डॉक्टर की जिंदगी

Neem Karoli Baba: अमेरिकी डॉक्टर डॉ. लैरी ब्रिलियंट 1970 के दशक की शुरुआत में आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए नीम करोली बाबा के कैंची धाम आश्रम पहुंचे थे. बाबा ने उन्हें ‘डॉक्टर अमेरिका’ नाम दिया और उनकी याद के मुताबिक जुलाई 1973 में उन्हें दिल्ली जाकर संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने और चेचक उन्मूलन अभियान में मदद करने की सलाह दी. बाद में ब्रिलियंट WHO के स्मॉलपॉक्स उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े.

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Last Updated: September 15, 2026 15:50:45 IST

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Neem Karoli Baba: 970 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी डॉक्टर डॉ. लैरी ब्रिलियंट आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में भारत आए थे. उस समय वह व्यक्तिगत असमंजस के दौर से गुजर रहे थे. इसी दौरान वह उत्तराखंड के कैंची धाम पहुंचे और नीम करोली बाबा के आश्रम में समय बिताया. बाबा के साथ उनकी मुलाकात ने उनकी जिंदगी को एक नई दिशा देने का काम किया. डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने बाद में अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा उन्हें प्यार से ‘डॉक्टर अमेरिका’ कहकर बुलाते थे. 2023 में Tricycle: The Buddhist Review को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बाबा के साथ हुई बातचीत और उस सलाह का जिक्र किया, जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा बदल दी.

बाबा ने कहा- तुरंत दिल्ली जाओ 

डॉ. ब्रिलियंट के मुताबिक, जुलाई 1973 में एक दिन नीम करोली बाबा ने उन्हें तुरंत दिल्ली जाने और संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने की सलाह दी. उनका कहना था कि उन्हें चेचक यानी स्मॉलपॉक्स को खत्म करने के अभियान में मदद करनी चाहिए. ब्रिलियंट ने इंटरव्यू में बताया था, “एक दिन जुलाई 1973 में नीम करोली बाबा ने मुझसे तुरंत दिल्ली जाने, संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने और चेचक को खत्म करने में मदद करने को कहा.” इसके बाद डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के चेचक उन्मूलन कार्यक्रम में काम किया. इस तरह कैंची धाम में हुई उनकी मुलाकात और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके आगे के काम के बीच एक गहरा संबंध बन गया.

‘डॉक्टर अमेरिका’ नाम के पीछे भी थी एक दिलचस्प कहानी

डॉ. ब्रिलियंट ने बाबा के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा ने उन्हें ‘डॉक्टर अमेरिका’ नाम दिया था. बातचीत के दौरान बाबा ने उनसे पूछा कि उनके पास कितने पैसे हैं. ब्रिलियंट ने बताया कि उस समय उनके पास 500 डॉलर थे. बाबा ने उनसे पूछा कि अमेरिका में उनके पास कितने पैसे हैं. उन्होंने जवाब दिया कि वहां भी 500 डॉलर हैं. इसके बाद बाबा ने मजाकिया अंदाज में इसी बात को दोहराना शुरू कर दिया. ब्रिलियंट के मुताबिक, बाबा का अंदाज बेहद हंसी-मजाक वाला था. वह गंभीर से गंभीर क्षण को भी हास्य में बदल देते थे. बाबा ने भारत और अमेरिका में मौजूद उनके पैसों को लेकर मजाक करते हुए कहा- “500 डॉलर यहां, 500 डॉलर वहां.” इसके बाद बातचीत में बाबा ने ‘डॉक्टर’ शब्द को लेकर भी मजाक किया और फिर उसे ‘U-N-O doctor’ से जोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्र की ओर इशारा किया.

मजाक-मजाक में बाबा ने संयुक्त राष्ट्र की राह दिखाई

डॉ. ब्रिलियंट की यादों के अनुसार, बातचीत के दौरान नीम करोली बाबा ने कहा कि ‘डॉक्टर अमेरिका’ आगे चलकर United Nations doctor बनने वाले हैं और उन्हें चेचक उन्मूलन के काम में जुटना है. ब्रिलियंट ने बताया कि बाबा ने चेचक को मानवता के लिए एक भयानक बीमारी बताया और कहा कि यह पीड़ा एक दिन मानवता से दूर होगी. उनके लिए यह बातचीत केवल एक आध्यात्मिक अनुभव नहीं थी. बाद के वर्षों में उन्होंने इसे अपने जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के रूप में याद किया. बाबा की सलाह के बाद उन्होंने अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता को सार्वजनिक स्वास्थ्य के एक बड़े अभियान में लगाने का रास्ता चुना.

भारत में WHO के चेचक उन्मूलन अभियान का हिस्सा बने

इसके बाद डॉ. लैरी ब्रिलियंट विश्व स्वास्थ्य संगठन के चेचक उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े और भारत में इस बीमारी के खिलाफ अभियान में काम किया. चेचक उन्मूलन का यह अभियान वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है. लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया से चेचक के पूरी तरह खत्म होने की आधिकारिक घोषणा की. यह पहली मानव बीमारी थी जिसे आधिकारिक तौर पर दुनिया से समाप्त घोषित किया गया. डॉ. ब्रिलियंट के लिए कैंची धाम और नीम करोली बाबा की याद उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण अध्याय से हमेशा जुड़ी रही. उनकी अपनी स्मृतियों में बाबा की कही बातों ने उन्हें चिकित्सा के जरिए मानवता की सेवा की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी.

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Last Updated: September 15, 2026 15:50:45 IST

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Neem Karoli Baba: 970 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी डॉक्टर डॉ. लैरी ब्रिलियंट आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में भारत आए थे. उस समय वह व्यक्तिगत असमंजस के दौर से गुजर रहे थे. इसी दौरान वह उत्तराखंड के कैंची धाम पहुंचे और नीम करोली बाबा के आश्रम में समय बिताया. बाबा के साथ उनकी मुलाकात ने उनकी जिंदगी को एक नई दिशा देने का काम किया. डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने बाद में अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा उन्हें प्यार से ‘डॉक्टर अमेरिका’ कहकर बुलाते थे. 2023 में Tricycle: The Buddhist Review को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बाबा के साथ हुई बातचीत और उस सलाह का जिक्र किया, जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा बदल दी.

बाबा ने कहा- तुरंत दिल्ली जाओ 

डॉ. ब्रिलियंट के मुताबिक, जुलाई 1973 में एक दिन नीम करोली बाबा ने उन्हें तुरंत दिल्ली जाने और संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने की सलाह दी. उनका कहना था कि उन्हें चेचक यानी स्मॉलपॉक्स को खत्म करने के अभियान में मदद करनी चाहिए. ब्रिलियंट ने इंटरव्यू में बताया था, “एक दिन जुलाई 1973 में नीम करोली बाबा ने मुझसे तुरंत दिल्ली जाने, संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने और चेचक को खत्म करने में मदद करने को कहा.” इसके बाद डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के चेचक उन्मूलन कार्यक्रम में काम किया. इस तरह कैंची धाम में हुई उनकी मुलाकात और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके आगे के काम के बीच एक गहरा संबंध बन गया.

‘डॉक्टर अमेरिका’ नाम के पीछे भी थी एक दिलचस्प कहानी

डॉ. ब्रिलियंट ने बाबा के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा ने उन्हें ‘डॉक्टर अमेरिका’ नाम दिया था. बातचीत के दौरान बाबा ने उनसे पूछा कि उनके पास कितने पैसे हैं. ब्रिलियंट ने बताया कि उस समय उनके पास 500 डॉलर थे. बाबा ने उनसे पूछा कि अमेरिका में उनके पास कितने पैसे हैं. उन्होंने जवाब दिया कि वहां भी 500 डॉलर हैं. इसके बाद बाबा ने मजाकिया अंदाज में इसी बात को दोहराना शुरू कर दिया. ब्रिलियंट के मुताबिक, बाबा का अंदाज बेहद हंसी-मजाक वाला था. वह गंभीर से गंभीर क्षण को भी हास्य में बदल देते थे. बाबा ने भारत और अमेरिका में मौजूद उनके पैसों को लेकर मजाक करते हुए कहा- “500 डॉलर यहां, 500 डॉलर वहां.” इसके बाद बातचीत में बाबा ने ‘डॉक्टर’ शब्द को लेकर भी मजाक किया और फिर उसे ‘U-N-O doctor’ से जोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्र की ओर इशारा किया.

मजाक-मजाक में बाबा ने संयुक्त राष्ट्र की राह दिखाई

डॉ. ब्रिलियंट की यादों के अनुसार, बातचीत के दौरान नीम करोली बाबा ने कहा कि ‘डॉक्टर अमेरिका’ आगे चलकर United Nations doctor बनने वाले हैं और उन्हें चेचक उन्मूलन के काम में जुटना है. ब्रिलियंट ने बताया कि बाबा ने चेचक को मानवता के लिए एक भयानक बीमारी बताया और कहा कि यह पीड़ा एक दिन मानवता से दूर होगी. उनके लिए यह बातचीत केवल एक आध्यात्मिक अनुभव नहीं थी. बाद के वर्षों में उन्होंने इसे अपने जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के रूप में याद किया. बाबा की सलाह के बाद उन्होंने अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता को सार्वजनिक स्वास्थ्य के एक बड़े अभियान में लगाने का रास्ता चुना.

भारत में WHO के चेचक उन्मूलन अभियान का हिस्सा बने

इसके बाद डॉ. लैरी ब्रिलियंट विश्व स्वास्थ्य संगठन के चेचक उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े और भारत में इस बीमारी के खिलाफ अभियान में काम किया. चेचक उन्मूलन का यह अभियान वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है. लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया से चेचक के पूरी तरह खत्म होने की आधिकारिक घोषणा की. यह पहली मानव बीमारी थी जिसे आधिकारिक तौर पर दुनिया से समाप्त घोषित किया गया. डॉ. ब्रिलियंट के लिए कैंची धाम और नीम करोली बाबा की याद उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण अध्याय से हमेशा जुड़ी रही. उनकी अपनी स्मृतियों में बाबा की कही बातों ने उन्हें चिकित्सा के जरिए मानवता की सेवा की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी.

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