Panchak 2026: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही श्रद्धालु पूजा-पाठ, व्रत और कांवड़ यात्रा में जुट जाते हैं. इसी बीच 31 जुलाई से पंचक भी शुरू होने जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है. खासतौर पर कांवड़ यात्रा से जुड़े कुछ नियम इस दौरान अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि यानी 31 जुलाई 2026, शुक्रवार से पंचक की शुरुआत होगी. यह 4 अगस्त 2026 तक रहेगा. इसके बाद सावन का दूसरा पंचक 27 अगस्त से 1 सितंबर तक रहेगा.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार से शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है. मान्यता है कि इस दौरान धन हानि, चोरी या अनावश्यक नुकसान की आशंका बढ़ सकती है. इसलिए लोग इस समय कुछ विशेष सावधानियां बरतते हैं.
पंचक में कांवड़ यात्रा को लेकर क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान बांस से बनी नई कांवड़ तैयार करना या उसे खरीदना शुभ नहीं माना जाता. हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों के अनुसार इस वजह से कई श्रद्धालु पंचक के दौरान नई बांस की कांवड़ नहीं उठाते.हालांकि, आजकल बड़ी संख्या में श्रद्धालु धातु, फाइबर या अन्य सामग्री से बनी कांवड़ का उपयोग करते हैं. ऐसी स्थिति में उनकी यात्रा सामान्य रूप से जारी रहती है. इसे धार्मिक परंपरा माना जाता है, कोई अनिवार्य नियम नहीं.
इन कामों से भी बचने की सलाह
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ कार्यों को टालना शुभ माना जाता है. इनमें शामिल हैं-
- बांस या लकड़ी खरीदना.
- घर की छत पर लिंटर डलवाना.
- मकान में पेंट या बड़े निर्माण कार्य शुरू करना.
- चारपाई बुनना, खोलना या तैयार कराना.
- दक्षिण दिशा की यात्रा, यदि उसे टाला जा सके.
- इन मान्यताओं का पालन श्रद्धा और पारंपरिक विश्वास के आधार पर किया जाता है.
क्या सभी लोगों के लिए नियम अनिवार्य हैं?
धर्माचार्यों का कहना है कि पंचक से जुड़े नियम मुख्य रूप से पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. यदि किसी जरूरी काम, नौकरी, यात्रा या अन्य कारण से इन कार्यों को करना पड़े, तो उसे रोका नहीं जाता. ऐसे मामलों में श्रद्धा के अनुसार पूजा या शुभ संकल्प लेकर कार्य किया जा सकता है.