प्यार, सुरक्षा और अटूट विश्वास का सबसे पवित्र त्योहार ‘रक्षाबंधन’ करीब आ रहा है. लेकिन इस साल राखी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चंद्र ग्रहण के साए को लेकर लोगों के मन में काफी उलझन है. आइए जानते हैं कि इस बार भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का सबसे सही समय क्या है और इससे जुड़ी खास बातें क्या हैं…
रक्षाबंधन 2026 के लिए सही तारीख क्या है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 27 अगस्त, 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त, 2026 को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. उदय तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर, रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा. विद्वानों और पंडितों ने भी पंचांग देखकर इस अवसर के लिए इसी तारीख को तय किया है.
राखी बांधने का शुभ समय
28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे अच्छा समय (मुहूर्त) सुबह 6:23 बजे से सुबह 9:48 बजे के बीच है. इसके अलावा, आप अभिजीत मुहूर्त के दौरान भी अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं, जो दोपहर 12:14 बजे से दोपहर 1:05 बजे के बीच होता है.
क्या चंद्र ग्रहण का साया रक्षाबंधन पर पड़ेगा?
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भी रक्षाबंधन के दिन ही लगने वाला है. यह ग्रहण कन्या राशि में लगेगा. कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान त्योहार कैसे मनाया जाए खासकर, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी कब और कैसे बांध सकती हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल का यह दूसरा चंद्र ग्रहण सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा. हालांकि, चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए आप बिना किसी हिचकिचाहट के किसी भी शुभ समय पर अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.
रक्षा बंधन से जुड़ी कथाएं
धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में रक्षा बंधन से जुड़ी कई कहानियां और कथाएं मिलती हैं. एक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई और उससे खून बहने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और उनकी उंगली पर बांध दिया. स्नेह के इस भाव से प्रभावित होकर भगवान कृष्ण ने उनकी रक्षा करने का वचन दिया. इसी वचन के कारण भगवान कृष्ण ने चीर-हरण (उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश) के समय द्रौपदी की लाज बचाई थी.
एक अन्य धार्मिक कथा रक्षा बंधन को देवी लक्ष्मी और राजा बलि से जोड़ती है. कहा जाता है कि भगवान विष्णु को पाताल लोक से वापस लाने के लिए देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था. लोक कथाओं पर आधारित एक ऐतिहासिक कथा भी है, जिसके अनुसार मेवाड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी और अपने राज्य के लिए मदद की गुहार लगाई थी. राखी को भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक मानते हुए, हुमायूं ने उनकी मदद करने का फैसला किया.
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियों, शुभ मुहूर्त और पंचांग से जुड़ी जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न पंचांगों के आकलन पर आधारित हैं. स्थानीय पंचांग, सूर्योदय के समय और स्थान के अनुसार तिथि या मुहूर्त के समय में आंशिक बदलाव हो सकता है. किसी भी विशेष मुहूर्त में पूजा-अनुष्ठान करने से पहले अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें.