Sant Premanand Maharaj: भारत में आज सबसे ज्यादा चर्चित साधु-संतों में प्रेमानंद महाराज का नाम शामिल है. उनकी लोकप्रियता देश-विदेश तक फैली है. उन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. उनके प्रवचन काफी प्रेरणादायक होते हैं. उनको सुनने के लिए बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज पहुंचते हैं. उनको मानने वाले लोग दैनिक जीवन से जुड़ी परेशानी के बारे में बात बताते हैं. फिर महाराज उनका जवाब देते हैं. इसी क्रम में प्रेमानंद महाराज से एक अनुयायी ने पूछा कि, हस्तथैथुन की आदत नहीं छूट रही क्या करूं. फिर, संत प्रेमानंद जी ने अपने प्रवचन में जीवन में आनंद लाने का तरीका बताया. जानिए आखिर वृंदावन से रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी ने भक्तों को क्या सीख दी-
क्या कहते हैं संत प्रेमानंद महाराज
वीडियो के जरिए हस्तमैथुन पर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि (masturbation) की आदत छोड़ने के लिए दृढ़ निश्चय, नाम जप (राधा-राधा), शारीरिक व्यायाम (100 पुश-अप्स/दौड़), और कुसंगति/अश्लील सामग्री से दूरी जरूरी है. सुबह 4 बजे उठें, योगा करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को भगवान में लगाएं, इससे नस-नाड़ियों की शक्ति पुनः संचित होगी. उनका कहना है कि, अगर दिमाग खाली हो तो गंदगी ही भरेगी, इसलिए भगवान का चिंतन जरूरी है. क्योंकि, जब किसी इंसान के दिमाग में भगवती का चिंतन होगा तो हम चिंता कर ही नहीं पाएंगे.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार मुख्य उपाय
- आज ही नियम लें कि कुछ भी हो जाए, अपने हाथों को अनैतिक कार्यों में नहीं लगाएंगे.
- जब भी गलत विचार आएं, मन में ‘राधा-राधा’ का जप करें.
- यह गंदी स्मृतियों को मिटाने का सबसे शक्तिशाली उपाय है.
- सीमेन की रक्षा के लिए शरीर को थकाना जरूरी है, जिससे गलत इच्छाएं शांत हों.
- मोबाइल पर गंदे दृश्य न देखें और न ही गंदे दोस्तों के साथ रहें.
- सुबह जल्दी उठें, सात्विक भोजन करें और सत्संग सुनें.
संकट में भगवान बन जाते संकटमोचन
रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी आगे एक उदाहरण देते हुए बताता है कि एक बार आदमी नशे में मोटरसाइकिल चलाते हुए आ रहा था और हम मस्ती से जा रहे है ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए जा रहे थे तो हमारे मुख से निकला राधा वह मोटरसाइकिल सीधा हमारे पैरों में आकर रुकी गई. इसका मतलब है कि, कभी भी संकट विपत्ति पर जब केवल भगवान का भरोसा होता है और केवल भगवान की पुकार होती है तो एक ही सेकंड में उसका परिणाम देखने को मिलता है. इसलिए किसी भी परेशानी को दूर कर लेने में ही भलाई है.