Gangs of Wasseypur Film Facts: बॉलीवुड में बहुत सी ऐसी फिल्में बनीं, जो काफी साधारण बजट में बनीं लेकिन फिल्म की कहानी और डायलॉग्स ने उसे अमर बना दिया. ऐसी ही एक फिल्म 14 साल पहले आई, जिसने लोगों को इसके सबसे बेहतरीन किरदार फैजल खान से मिलाया और खुद कल्ट फिल्म बन गई. नवाजुद्दीन का फैजल खान वाला किरदार लोगों को इतना पसंद आया कि फिल्म के डायलॉग्स अमर हो गए. 14 साल बाद भी फिल्म के डायलॉग चर्चा में रहते हैं.
फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी के स्वैग और डायलॉग के साथ ही उनके बात करने के तरीके की भी काफी चर्चा हुई थी. उनकी शांत चुप्पी, पैनी नजर, सधी हुई बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग्स काबिल-ए-तारीफ थी. फिल्म रिलीज को चौदह साल बीत गए हैं लेकिन इसके बावजूद इसके मीम्स, इसके डायलॉग्स अब भी सबसे ज्यादा कोट किए जाते हैं.
क्या है गैंग्स ऑफ वासेपुर की कहानी?
फिल्म का शुरुआत काफी शानदार हुई थी. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी अलग जॉनर में नजर आए थे. फिल्म की कहानी की बात करें, तो इसके पहले भाग में सरदार खान की कहानी दिखाई गई है, जो अपने पिता की इज्जत वापस पाने और रमाधीर सिंह को खत्म करने की कसम खाता है. पहले सरदार खान वासेपुर में ताकत बनाता है. इसके बाद रमाधीर और सुल्तान के खिलाफ गैंग बनाता है. इसके बाद सरदार खान महिलाओं के चक्कर में फंस जाता है और उसकी हत्या कर दी गई.
खूनी सियासत का शिकार हुआ फैजल
फिल्म के दूसरे पार्ट में फैजल खान की एंट्री होती है. सरदार की मौत के बाद उसका परिवार बिखरने लगता है. पहले फैजल ड्रग्स और गुमनामी की जिंदगी जीता है. उसे काफी कमजोर समझा जाने लगता है. फिल्म का डायलॉग ‘बाप का, दादा का, भाई का, सबका बदला लेगा तेरा फैजल’ काफी चर्चा में रहा था. इसके बाद फैजल अपने दुश्मनों को चुन-चुनकर मारता है. वासेपुर का बेताज बादशाह बनता है. इसके बाद खुद भी खूनी सियासत का शिकार बन जाता है.
ये भी पढ़ें: 37 साल पुराना वो गाना, जो आज भी है शादियों की शान, रेखा ने ठुकराया और श्रीदेवी ने लगाए चार चांद