डेनमार्क में जन्मी और राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रहीं दीपिका पादुकोण ने खेलों को छोड़ विज्ञापन और फिल्मों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई 'ओम शांति ओम' से करियर शुरू करने वाली दीपिका आज एक वैश्विक आइकन है , जिनका मोम का पुतला मैडम तुसाद में स्थापित है और जो खगोल विज्ञान की भी शौकीन है.
बॉलीवुड की दुनिया में कई सितारे अपनी किस्मत आजमाते है ,लेकिन कुछ ऐसे होते है जो अपनी मेहनत से इतिहास रच देते है .आज हम जिस अभिनेत्री की बात कर रहे है, उनका व्यक्तित्व किसी एक परिभाषा में नहीं सिमटता कोपेनहेगन, डेनमार्क में जन्मी और भारत के बेंगलुरु में पली-बढ़ी दीपिका पादुकोण ने एक खिलाड़ी से लेकर वैश्विक आइकन बनने तक का जो सफर तय किया है, वह करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है. खेल जिनके खून में था, उन्होंने अपनी कला से न केवल बॉक्स ऑफिस पर राज किया, बल्कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों पर भारत का नाम रोशन किया.
दीपिका का ताल्लुक एक बेहद प्रतिष्ठित खेल परिवार से है. वह दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बेटी है और खुद भी राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रही है. हालांकि, जब उन्होंने महसूस किया कि उनका असली जुनून खेलों के बजाय कैमरा है, तो उन्होंने कोर्ट छोड़कर ग्लैमर की दुनिया का रुख किया. शुरुआती दिनों में वह विज्ञापनों का एक बेहद लोकप्रिय चेहरा बनी. उन्हें लिरिल और क्लोज-अप जैसे ब्रांड्स की ‘एड-फिल्म फेवरेट गर्ल’ के रूप में जाना जाने लगा. इसके बाद हिमेश रेशमिया के म्यूजिक वीडियो ‘नाम है तेरा’ ने उन्हें वो पहचान दिलाई, जिसने सीधे बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए.
साल 2007 में ‘ओम शांति ओम’ के जरिए शाहरुख खान के साथ डेब्यू करना किसी सपने से कम नहीं था. उन्होंने ‘पीकू’, ‘कॉकटेल’, ‘पद्मावत’ और ‘छपाक’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की गहराई दिखाई. आज उनका नाम बॉलीवुड की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शुमार है, जिनके नाम लंदन के मशहूर मैडम तुसाद म्यूजियम में मोम का पुतला दर्ज है.उनके इस पुतले को ‘स्टैच्यू ऑफ पर्पस’ कहा जाता है, जो उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और सामाजिक कार्यों को दर्शाता है.
अभिनय और ग्लैमर से परे, दीपिका का एक और दिलचस्प पहलू है उनकी खगोल विज्ञान में रुचि. वह अक्सर सितारों और अंतरिक्ष की दुनिया के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहती हैं, जो उन्हें अन्य सितारों से अलग बनाता है. आज दीपिका न केवल एक ‘हिट मशीन’ हैं, बल्कि वह कान्स फिल्म फेस्टिवल में जूरी मेंबर बनने से लेकर ऑस्कर के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक, हर जगह अपनी छाप छोड़ चुकी है एक विदेशी धरती पर पैदा होने से लेकर बॉलीवुड की ‘क्वीन’ बनने तक का उनका यह सफर वाकई बेमिसाल है.
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