Disha Patani sister: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के मामले पर बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी की बहन और फिटनेस को लेकर चर्चा में रहने वाली खुशबू पाटनी ने बीते दिनों अपना गुस्सा जाहिर किया था. अब उनकी एक और सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है. खुशबू ने इंस्टाग्राम पर अपनी CO₂ एयर पिस्टल की झलक शेयर की है. पोस्ट के साथ उन्होंने इसके इस्तेमाल को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है.
ग्लॉक 17 जेन 4 मॉडल पर आधारित एयर पिस्टल की दिखाई झलक
खुशबू पाटनी ने अपनी पोस्ट में ग्लॉक 17 जेन 4 (Glock 17 Gen 4) मॉडल पर आधारित .177 एयर पिस्टल का जिक्र किया. पोस्ट में उन्होंने साफ तौर पर डिस्क्लेमर देते हुए लिखा कि इसका इस्तेमाल सिर्फ आत्मरक्षा के लिए होना चाहिए और यह कोई खिलौना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि पिस्टल असली हो या न हो, इसके इस्तेमाल को समझदारी और जिम्मेदारी के साथ समझना जरूरी है. खुशबू ने इसे जानकारी देने के मकसद से शेयर करने की बात कही. उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी जोर दिया कि एयर पिस्टल को इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को इसके बारे में सही जानकारी और ट्रेनिंग होनी चाहिए.
CO₂ एयर पिस्टल कैसे करती है काम?
CO₂ एयर पिस्टल आम बंदूकों से अलग तरीके से काम करती है. इसमें पेलेट या BBs को आगे बढ़ाने के लिए कार्ट्रिज में भरी कंप्रेस्ड कार्बन डाइऑक्साइड गैस का इस्तेमाल किया जाता है. पारंपरिक बंदूकों में जहां बारूद और प्राइमर वाले कार्ट्रिज का इस्तेमाल होता है, वहीं एयर पिस्टल में कंप्रेस्ड गैस प्रोजेक्टाइल को आगे बढ़ाने का काम करती है. खुशबू की पोस्ट में बताए गए .177 कैलिबर यानी 4.5 मिलीमीटर का आकार एयरगन और एयर पिस्टल में आम है. इस तरह के एयर हथियारों का इस्तेमाल टारगेट शूटिंग, ट्रेनिंग और मनोरंजन के लिए किया जाता है. हालांकि, किसी खास मॉडल की क्षमता और तकनीकी विशेषताएं अलग हो सकती हैं.
क्या होता है .177 कैलिबर का पेलेट?
एयर पिस्टल में इस्तेमाल होने वाला पेलेट एक छोटा प्रोजेक्टाइल होता है, जिसे कंप्रेस्ड हवा, CO₂ या किसी दूसरी गैस की मदद से आगे बढ़ाया जाता है. पारंपरिक बंदूकों की गोलियों से यह अलग होता है, क्योंकि इसे बारूद के जरिए नहीं चलाया जाता. .177 एयर पिस्टल में इस्तेमाल होने वाले पेलेट का डायमीटर आमतौर पर करीब 4.5 मिलीमीटर होता है. यह लेड या दूसरे उपयुक्त मटीरियल से बना हो सकता है. एयर पिस्टल के प्रकार और मॉडल के अनुसार इसके इस्तेमाल और तकनीकी विशेषताओं में अंतर हो सकता है.
‘यह कोई खिलौना नहीं है’, खुशबू ने क्यों दी चेतावनी?
खुशबू पाटनी ने अपनी पोस्ट में खास तौर पर चेतावनी दी कि एयर पिस्टल को खिलौना नहीं समझना चाहिए. उन्होंने जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और इसे चलाने से पहले उचित ट्रेनिंग लेने पर जोर दिया. उनके मुताबिक, ऐसी ट्रेनिंग शूटिंग रेंज में ली जा सकती है. एयर पिस्टल पारंपरिक आग्नेयास्त्र से अलग हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसके इस्तेमाल में सुरक्षा जोखिम नहीं होते. इसलिए इसे संभालते समय निर्माता की ओर से दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है.
भारत में एयर पिस्टल के नियम क्या हैं?
भारत में एयर पिस्टल से जुड़े लाइसेंस नियम उसके कैलिबर और मजल एनर्जी यानी प्रोजेक्टाइल की ऊर्जा जैसी तकनीकी विशेषताओं पर निर्भर कर सकते हैं. कुछ कम-पावर वाले एयर हथियारों के लिए लागू नियमों के तहत हथियार लाइसेंस की जरूरत नहीं हो सकती, जबकि दूसरे हथियारों के लिए लाइसेंस जरूरी हो सकता है. यही वजह है कि किसी एयर पिस्टल को खरीदने, साथ लेकर चलने या इस्तेमाल करने से पहले उसके मॉडल की तकनीकी जानकारी और उस पर लागू मौजूदा कानूनी नियमों की जांच करना जरूरी है. खुशबू ने भी अपनी पोस्ट में जिम्मेदारी और सही ट्रेनिंग पर जोर दिया है.