भारत की सबसे मशहूर गायिका लता मंगेशकर के करियर की शुरुआत बिल्कुल फिल्मी अंदाज़ में हुई थी. करियर के शुरुआत में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. सबसे दिलचस्प बात ये है कि फिल्मों में गाने की उनकी पहली रिकॉर्डिंग को फिल्म से ही हटा दिया गया था.
लता महज 13 साल की थीं जब उन्होंने 1942 में वसंत जोगलेकर की मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए ‘नाचु या गड़े, खेलु सारी मणि हौस भारी’ गाना रिकॉर्ड किया था. यह गाना फिल्म में शामिल नहीं हो पाया, जिससे उनका एक शानदार डेब्यू हो सकता था, लेकिन यह उनके करियर के शुरुआती वर्षों में भुला दिया गया एक छोटा-सा हिस्सा बनकर रह गया.
13 साल की उम्र में टूट पड़ा मुश्किलों का पहाड़
लता के पिता, प्रसिद्ध संगीतकार और रंगमंच कलाकार दीनानाथ मंगेशकर का 1942 में निधन हो गया था. वह पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं और अचानक उन्हें अपनी उम्र से कहीं अधिक जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ा. परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने फिल्मों में अभिनेत्री और गायिका दोनों के रूप में काम करना शुरू किया. राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के कैटलॉग में उनके शुरुआती वर्षों को एक कठिन संघर्ष के दौर के रूप में वर्णित किया गया है, जब तक कि संगीत निर्देशक गुलाम हैदर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें हिंदी फिल्म संगीत में अपना करियर बनाने में मदद की.
उनकी शुरुआती रिकॉर्डिंग ने अंततः उन्हें बड़े अवसर दिलाए. 1948 में आई फिल्म ‘मजबूर’ ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सफलता दिलाई, जबकि ‘अंदाज़’ और ‘बरसात’ ने उन्हें एक प्रमुख पार्श्व गायिका के रूप में स्थापित करने में मदद की.
एक अनसुने गाने से लेकर पीढ़ियों की आवाज बनने तक का सफर
उस पहली रिकॉर्डिंग की विडंबना को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है. वह गाना जो कभी श्रोताओं तक नहीं पहुंचा, उस गायिका का था जिसने आगे चलकर भारतीय सिनेमा के कुछ सबसे बड़े नामों के लिए गाने गाए और पीढ़ियों की अभिनेत्रियों को अपनी आवाज़ दी. लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर, 1929 को इंदौर में हुआ था. कई दशकों के अपने करियर में, वह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली पार्श्व गायिकाओं में से एक बन गईं और उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और भारत रत्न सहित कई सम्मान प्राप्त हुए.