Survival Thriller Eden Story: आज हम आपको एक ऐसी सीरीज के बारे में बताने वाले हैं जिसे देखने के बाद आप इस सीरीज को बार-बार देखेंगे. ये एक ऐसी सर्वाइवल थ्रिलर है जो आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी. जी हाँ! हम बात कर रहे हैं Survival Thriller Eden की. 2024 में OTT प्लेटफार्म पर रिलीज हुई ये फिल्म काफी रोमांचक को बेहतरीन है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक सच्ची कहानी पर आधारित, ‘ईडन’ का निर्देशन रॉन हॉवर्ड (Arrested Development) ने किया है और इसे नूह पिंक (Tetris) ने लिखा है. इस थ्रिलर फ़िल्म में जूड लॉ (Black Rabbit), वैनेसा किर्बी (The Crown), डैनियल ब्रुहल (Inglourious Basterds), सिडनी स्वीनी (Everything Sucks!) और एना डी आर्मास (The Gray Man) मुख्य भूमिकाओं में है.
टापू पर पहुंचते ही खो बैठते हैं होश
इंस्टाग्राम cinehubvault ने जब इस फिल्म का रिव्यु शेयर किया तो उसने बताया कि इस टापू पर आते ही लोगों को अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं रहता है. इस वीडियो में बताया गया है ये फिल्म आपके सोचने का नजरिया बदल देग. बताया गया है कि ये एक तीन बिल्कुल अलग-अलग यूरोपीय परिवार गैलापागोस के एक सुनसान द्वीप पर बस जाते हैं; 1930 के दशक में युद्ध और फासीवाद के बढ़ते प्रभाव से घायल दुनिया में वो एक नई दुनिया बसाना चाहते थे. लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास होता है कि दुनिया को पीछे छोड़ देना इतना आसान नहीं है, और उनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा वो द्वीप नहीं, बल्कि वो खुद एक-दूसरे हैं. फिल्म में दिखाया गया है कि जितनी खतरनाक इस टापू का नेचर है उससे ज्यादा खतरनाक इंसानों की फीतरत है.
इंटिमेट सीन से भरपूर है फिल्म
ये फिल्म बताती है कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में चला जाए लेकिन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर देंगे. इस फिल्म में आप देखें के Survival कैसे मैडनेस में बदल जाएगा. बता दें कि ये मूवी हद से ज्यादा अडल्ट है और इसमें कूट-कूटकर इंटिमेट सीन भी भरे हैं. बता दें ये फिल्म Prime Video और Netflix पर हिंदी में देखने के लिए मिल जाएगी.
क्या ‘ईडन’ एक सच्ची कहानी पर आधारित है?
हाँ, ‘ईडन’ यूरोपीय लोगों के तीन समूहों की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने यूरोप में फ़ासीवाद को छोड़कर एक द्वीप पर जीवन बिताना चुना, ताकि वो अपनी कल्पना के अनुसार एक शांत समाज का निर्माण कर सकें. डॉ. फ़्रेडरिक रिटर और उनकी प्रेमिका, डोरे स्ट्रॉच, 1929 में वहाँ पहुँचे; विटमर परिवार 1932 में आया. जब उन्होंने अख़बारों में रिटर और स्ट्रॉच के इस प्रयोग के बारे में पढ़ा; और, उसी साल बाद में, बैरोनेस एलोइस वेहरबॉर्न डी वैगनर-बॉस्केट अपने प्रेमियों, रूडोल्फ़ लोरेंज़ और रॉबर्ट फ़िलिप्सन के साथ वहाँ पहुँचीं.