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Home > मनोरंजन > ‘भारतीय सिनेमा कभी हॉलीवुड की बराबरी नहीं कर सकता’, जब प्रियंका को सुननी पड़ी थी ये कड़वी बात; एक्ट्रेस ने किया खुलासा

‘भारतीय सिनेमा कभी हॉलीवुड की बराबरी नहीं कर सकता’, जब प्रियंका को सुननी पड़ी थी ये कड़वी बात; एक्ट्रेस ने किया खुलासा

Priyanka Chopra: बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने पश्चिमी देशों में भारतीय फिल्म उद्योग के बारे में वर्षों से चली आ रही धारणाओं के बारे में बात की. जानिए उन्होंने क्या कहा?

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Last Updated: June 25, 2026 14:46:19 IST

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अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने इस बात पर खुलकर बात की है कि कैसे भारतीय सिनेमा ने पिछले कुछ दशकों में अपने वैश्विक विस्तार के माध्यम से आलोचकों को गलत साबित किया है. पश्चिम में भारत की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक प्रियंका ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि भाषा की बाधा के कारण भारतीय सिनेमा वैश्विक स्तर पर सफल नहीं हो सकता. 

एक्ट्रेस ने क्या कहा?

फ्रांस में आयोजित कान्स लायंस सम्मेलन में बात करते हुए प्रियंका चोपड़ा ने कहा, ‘मेरे माता-पिता डॉक्टर थे, इसलिए हममें से किसी को भी फिल्म उद्योग में आगे बढ़ने का कोई अनुभव नहीं था. जब मैंने शुरुआत की थी, तब यह एक बहुत ही अलग इंडस्ट्री हुआ करता था. अगर आप फिल्म निर्माण में आना चाहते थे, तो आपको यह तय करना होता था कि आप किस विभाग में काम करना चाहते हैं.’

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री पर क्या बोला?

अभिनेत्री ने कहा, ‘मुझे बताया गया था कि भारतीय सिनेमा कभी हॉलीवुड जितना वैश्विक नहीं हो सकता, क्योंकि हम अंग्रेजी भाषी नहीं हैं, और हमारी फिल्में चाहे हिंदी, तेलुगु, मराठी या किसी भी अन्य भाषा में हों, हर कोई उन्हें समझ नहीं पाता है.’

कैस शुरू हुआ भारतीय सिनेमा उद्योग का सफर?

भारतीय फिल्मों को 1950 के दशक से ही पूर्व सोवियत संघ में सफलता मिलती रही थी, लेकिन विदेशों में नियमित सफलता 2000 के बाद ही शुरू हुई, पहले भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से और बाद में उससे परे. ‘मुथु’, ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्में चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों में व्यापक रूप से देखी गईं, जिनमें ज्यादातर गैर-भारतीय थे.

‘वाराणसी’ फिल्म से चर्चा में हैं

साल 2027 में, प्रियंका चोपड़ा लगभग एक दशक बाद एसएस राजामौली की साइंस फिक्शन फिल्म ‘वाराणसी’ से भारतीय सिनेमा में वापसी करेंगी. इस फिल्म में महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन भी मुख्य भूमिका में हैं और यह हाल के समय की सबसे बहुप्रतीक्षित भारतीय फिल्मों में से एक है.

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अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने इस बात पर खुलकर बात की है कि कैसे भारतीय सिनेमा ने पिछले कुछ दशकों में अपने वैश्विक विस्तार के माध्यम से आलोचकों को गलत साबित किया है. पश्चिम में भारत की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक प्रियंका ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि भाषा की बाधा के कारण भारतीय सिनेमा वैश्विक स्तर पर सफल नहीं हो सकता. 

एक्ट्रेस ने क्या कहा?

फ्रांस में आयोजित कान्स लायंस सम्मेलन में बात करते हुए प्रियंका चोपड़ा ने कहा, ‘मेरे माता-पिता डॉक्टर थे, इसलिए हममें से किसी को भी फिल्म उद्योग में आगे बढ़ने का कोई अनुभव नहीं था. जब मैंने शुरुआत की थी, तब यह एक बहुत ही अलग इंडस्ट्री हुआ करता था. अगर आप फिल्म निर्माण में आना चाहते थे, तो आपको यह तय करना होता था कि आप किस विभाग में काम करना चाहते हैं.’

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री पर क्या बोला?

अभिनेत्री ने कहा, ‘मुझे बताया गया था कि भारतीय सिनेमा कभी हॉलीवुड जितना वैश्विक नहीं हो सकता, क्योंकि हम अंग्रेजी भाषी नहीं हैं, और हमारी फिल्में चाहे हिंदी, तेलुगु, मराठी या किसी भी अन्य भाषा में हों, हर कोई उन्हें समझ नहीं पाता है.’

कैस शुरू हुआ भारतीय सिनेमा उद्योग का सफर?

भारतीय फिल्मों को 1950 के दशक से ही पूर्व सोवियत संघ में सफलता मिलती रही थी, लेकिन विदेशों में नियमित सफलता 2000 के बाद ही शुरू हुई, पहले भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से और बाद में उससे परे. ‘मुथु’, ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्में चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों में व्यापक रूप से देखी गईं, जिनमें ज्यादातर गैर-भारतीय थे.

‘वाराणसी’ फिल्म से चर्चा में हैं

साल 2027 में, प्रियंका चोपड़ा लगभग एक दशक बाद एसएस राजामौली की साइंस फिक्शन फिल्म ‘वाराणसी’ से भारतीय सिनेमा में वापसी करेंगी. इस फिल्म में महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन भी मुख्य भूमिका में हैं और यह हाल के समय की सबसे बहुप्रतीक्षित भारतीय फिल्मों में से एक है.

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