1960 और 70 के दशक की हिंदी फिल्मों में एक अलग ही जादू था, जिसका असर आज भी दर्शकों पर दिखता है. और अगर उस समय की टॉप एक्ट्रेस की बात की जाए तो सिर्फ एक नाम ही जुबां पर आता है, वो है- मुमताज.
चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते हुए, उन्होंने दारा सिंह के साथ कम बजट की एक्शन फिल्मों में काम किया, लेकिन अपनी सूझबूझ और प्रशंसकों के प्यार के दम पर सिर्फ 10 साल के करियर में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी वो जगह बनाई, जिसे बनाने में स्टार्स का पूरा जीवन निकल जाता है.
हीरो से ज्यादा फीस
उस समय सिनेमा जगत पुरुषों का वर्चस्व वाला क्षेत्र होने के बावजूद, वह आमतौर पर पुरुषों के बराबर वेतन लेती थीं और कई बार तो उन्हें अपने दौर के मुख्य अभिनेताओं से भी अधिक वेतन मिलता था. इसका कारण बहुत सीधा-सादा था; निर्देशकों को पता था कि अगर आप मुमताज़ को कास्ट कर रहे हैं, तो दर्शकों की भीड़ पक्की है. उनकी दमदार उपस्थिति, सहज अभिनय और जोखिम भरी स्क्रिप्ट को तुरंत हिट में बदलने की क्षमता फिल्म निर्माताओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी. उनके करियर में तब एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब दिलीप कुमार उनसे प्रभावित हुए और उन्होंने राम और श्याम (1967) में उनके साथ काम करने का निर्णय लिया. यही वह निर्णायक मोड़ साबित हुआ जब उन्होंने बड़े स्टूडियो को दिखा दिया कि उनमें अभिनय की अद्वितीय प्रतिभा है. आइये जानते हैं उनकी 6 सबसे हिट फिल्मों के बारे में!
ब्रह्मचारी (1968)
शम्मी कपूर फिल्म के स्टार थे, लेकिन मुमताज ने ‘आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ गाने में अपने शानदार अभिनय से फिल्म की सांस्कृतिक पहचान को लगभग अपने नाम कर लिया. ऑस्कर विजेता भानु अथैया द्वारा विशेष रूप से उनके लिए डिज़ाइन की गई नारंगी साड़ी पहने मुमताज ने यह साबित कर दिया कि वे अपनी दमदार उपस्थिति से किसी को भी पीछे छोड़ सकती हैं.
दो रास्ते (1969)
यह पारिवारिक प्रेम कहानी ही उनके रिकॉर्ड तोड़ सफलता की शुरुआत थी. उन्होंने रीना की भूमिका निभाई, और बिंदिया चमकेगी जैसे गानों में उनकी बेफिक्र प्रेम कहानी और मोहक व्यक्तित्व ने फिल्म को अभूतपूर्व रजत जयंती सफलता दिलाई, जो सिनेमाघरों में 50 सप्ताह से अधिक समय तक चली.
खिलौना (1970)
जब प्रमुख अभिनेत्रियों ने चंपा का किरदार निभाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया, जो एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति की देखभाल के लिए रखी गई एक वेश्या थी, तो मुमताज ने यह चुनौती स्वीकार की. उनके दमदार और यथार्थवादी अभिनय ने फिल्म के पूरे भावनात्मक भार को संभाला. उनकी यह त्रासदी बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला.
सच्चा झूठा (1970)
मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित फिल्मों में राजेश खन्ना के साथ फिर से काम करते हुए, मुमताज ने एक तेजतर्रार जासूस की भूमिका निभाई. इस मनोरंजक अभिनेत्री ने भारतीय सिनेमाघरों में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और साबित कर दिया कि उनकी और खन्ना की जोड़ी हिंदी सिनेमा में सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली जोड़ी बन गई.
तेरे मेरे सपने (1971)
विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस सूक्ष्म नाटकीय फिल्म में मुमताज ने देव आनंद द्वारा अभिनीत डॉक्टर की समर्पित पत्नी निशा की भूमिका निभाई थी. उनका यह अभिनय बेहद संयमित होते हुए भी अत्यंत प्रभावी था और यह दर्शाता है कि वे अपनी अभिनय प्रतिभा के दम पर ही स्टार बनीं.
आपकी कसम (1974)
एक ऐसी फिल्म में जिसकी कहानी ईर्ष्या, अविश्वास और वैवाहिक टूटन जैसे विषयों के इर्द-गिर्द घूमती है, मुमताज ने राजेश खन्ना और संजीव कुमार के साथ मिलकर कहानी को और भी जीवंत बना दिया. ‘जय जय शिव शंकर’ जैसे प्रतिष्ठित गीतों में उनकी भूमिका ने उस वर्ष रिलीज़ हुई अन्य फिल्मों के साथ-साथ इस फिल्म की सफलता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.