Health Tips: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल का असर हमारी सेहत पर साफ देखा जा सकता है. इसी का नतीजा है कि आज तमाम गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं. अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया तो कब ये गंभीर रूप ले लें, कहा नहीं जा सकता है. इन बीमारियों की शुरुआत तो छोटी होती है, लेकिन अनदेखी उसे गंभीर बना देती है. डायबिटीज, हाई और लो ब्लड प्रेशर, यूरिक एसिड, हाई कोलेस्ट्रॉल ऐसी ही बीमारियों में एक हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, इन सभी बीमारियों की शुरुआत छोटी होती है, मगर अनदेखी गंभीर बना देती है. अगर इन बीमारियों को समय पर कंट्रोल न किया जाए बड़ी मुसीबत हो सकती है. अब सवाल है कि आखिर, डायबिटीज की बीमारी कितनी खतरनाक और कैसे करें कंट्रोल? हाई-लो बीपी में क्या करें? कोलेस्ट्रॉल कितना गंभीर और कैसे करें बचाव? आइए जानते हैं इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां-
किसी भी सीजन में होने वाली 5 गंभीर बीमारियां
1. डायबिटीज: दुनियाभर में डायबिटीज एक गंभीर बीमारी बनकर उभरी है. वैसे तो दुनियाभर में इस बीमारी से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन भारत की स्थिति ज्यादा गंभीर है. एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि, भारत में डायबिटीज के 10 करोड़ से भी ज्यादा मरीज हैं. यही वजह है कि भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाता है. डायबिटीज की स्थिति में जीवनभर साथ रहने वाली डायबिटीज को जड़ से खत्म तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन हेल्दी खानपान के जरिए कंट्रोल जरूर किया जा सकता है.
डायबिटीज में पहले कौन सा टेस्ट होता
जब भी किसी व्यक्ति को डायबिटीज के लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर आमतौर पर HbA1c टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. बता दें कि, डायबिटीज का पता लगाने के लिए HbA1c टेस्ट को सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन इसे ही डायबिटीज नहीं होने का मानक मान लेना घातक हो सकता है. दरअसल, जब लोग पैथोलॉजी लैब से रिपोर्ट लेकर निकलते हैं, जिसमें लिखा होता है कि उनका HbA1c सामान्य है. ऐसे में लोग खुद को डायबिटीज से सुरक्षित मान लेते हैं. अगर आप भी यही सोचते हैं, तो यकीन मानिए कि आप गलत हैं. बता दें कि, HbA1c टेस्ट रिपोर्ट 5.7 से कम हो, तो ही इसे नॉर्मल माना जा सकता है. लेकिन, 6.5 या इससे अधिक आने पर मरीज को डायबिटिक माना जाएगा. इससे बात साफ है कि, टाइप-2 डायबिटीज की पहचान के लिए केवल HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है.
डायबिटीज के लक्षण और बचाव
डायबिटीज (मधुमेह) के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना
अत्यधिक प्यास और भूख लगना
बिना वजह वजन कम होना
बिना काम के थकान महसूस
डायबिटीज से बचने के लिए हेल्दी डाइट लें. यानी ऐसा भोजन जो फाइबर से भरपूर हो. नियमित व्यायाम करें, वजन कंट्रोल में रखें और समय पर दवाएं/इंसुलिन लेना आवश्यक है. इस बीच यदि किसी को परेशानी दिखे तो एक्सपर्ट की सलाह जरूरी है.
2. ब्लड प्रेशर: आजकल की खराब जीवनशैली का ही एक नतीजा हाई-लो ब्लड प्रेशर है. आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि रक्त चाप का कम होना, यानी लो बीपी की तुलना में हाई बीपी ज्यादा खतरनाक होता है. असल में, हाई बीपी में ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक की आशंका ज्यादा होती है, लेकिन लो बीपी भी उतना ही खतरनाक होता है जितना कि हाई बीपी. लो बीपी की ज्यादा परेशानी दिमाग और हृदय तक के रक्त प्रवाह को बाधित करती है और शरीर में कई बीमारियों को जन्म भी देती है.
लो बीपी के लक्षण और बचाव
- चक्कर आना और ज्यादा थकान लो बीपी का संकेत हो सकता है. इस परेशानी में लोग 1 गिलास पानी में चुटकी भर सेंधा नमक डालकर लेते हैं. बता दें कि, नमक से रक्त में सोडियम बढ़ता है, जो सीधा मस्तिष्क तक पहुंचकर रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है.
- लो बीपी में सौंफ और मिश्री का सेवन फायदेमंद माना जाता है. बता दें कि, सौंफ और मिश्री का रोजाना सेवन शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है और पाचन को भी सही रखता है. ये पेट में बनने वाले एसिड को भी कंट्रोल करता है.
- सुबह खाली पेट 10-12 किशमिश पानी का सेवन करना भी लो बीपी की समस्या से राहत देता है. इसके लिए रात के समय 10-12 किशमिश को पानी में भिगो दीजिए और सुबह खाली पेट सेवन करें. इसके अलावा, दालचीनी, अदरक, तुलसी के पत्ते और शहद का सेवन भी लो बीपी में राहत देता है.
3. यूरिक एसिड: शरीर में बढ़ता यूरिक एसिड भी खराब दिनचर्या का ही नतीजा है. बता दें कि, यूरिक एसिड (Uric acid) शरीर का अवशिष्ट पदार्थ है, जो प्यूरिन नाम के प्रोटीन के टूटने से बनता है. यह किडनी में फिल्टर होते हुए पेशाब के रास्ते शरीर से निकल जाता है. लेकिन, कई बार हमारे गलत खानपान से प्यूरिन की ज्यादा मात्रा खून में जमा होने लगती है. जब खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाए, तो क्रिस्टल छोटे-छोटे टुकड़े में टूटकर हड्डियों के जोड़ों के बीच में जमा होने लगता है. ऐसा होने से जोड़ों में सूजन बनती है और दर्द होने लगता है. ऐसे में किडनी को नुकसान होने का जोखिम बढ़ता है.
यूरिक एसिड से बचने के लिए क्या खाएं
शरीर में यूरिक एसिड घटाने के लिए आंवला, कस्तूरी खरबूजे, ब्लैक करंट, आड़ू, अन्नानास, अनार, स्ट्रॉबेरी आदि में कम फ्रूक्टोज पाया जाता है जिसके कारण यूरिक एसिड नहीं बढ़ता है. वहीं, संतरा, लहसुन, अंडे, आलू, टोफू, पालक, शतावरी जैसे फूड्स यूरिक एसिड के मरीजों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं.
यूरिक एसिड में क्या नहीं खाना चाहिए
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, सुनहरा किशमिश में फ्रूक्टोज अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसलिए किशमिश का सेवन गठिया वाले मरीजों को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. यूरिक एसिड के मरीजों को इमली खाने से बचना चाहिए.अगर कोई यूरिक एसिड का सामना कर रहा है तो सेब खाने से बचे. इसके अलावा, खजूर और चीकू भी खाने से बचना चाहिए.
4. कोलेस्ट्रॉल: हेल्थ एक्पर्ट की माने तो बढ़ता कोलेस्ट्रॉल भी अनहेल्दी लाइफस्टाइल का ही नतीजा है. बता दें कि, कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) खून में पाया जाने वाला एक मोम जैसा, वसायुक्त (fatty) पदार्थ है, जो लिवर द्वारा बनाया जाता है. यह शरीर की कोशिकाओं (cells), हार्मोन और विटामिन डी के निर्माण के लिए आवश्यक है. लेकिन, जब रक्त में इसकी मात्रा (विशेषकर LDL) अधिक हो जाती है, तो यह धमनियों में जमा होकर हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है.
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का तरीका
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए स्वस्थ आहार (फाइबर युक्त, कम वसा), नियमित व्यायाम, धूम्रपान छोड़ना और स्वस्थ वजन बनाए रखना सबसे प्रभावी उपाय हैं. ओट्स, सेब, मेवे, बीन्स और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं, जबकि सैचुरेटेड फैट (घी, मक्खन) और प्रोसेस्ड फूड से बचें. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम करें.