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Home > हेल्थ > Sleepwalking: नींद में चलना किस बीमारी संकेत? कब औऱ क्यों होती है यह परेशानी, बचने के लिए क्या करें

Sleepwalking: नींद में चलना किस बीमारी संकेत? कब औऱ क्यों होती है यह परेशानी, बचने के लिए क्या करें

Sleepwalk Causes: कुछ लोगों को नींद में चलने की बीमारी होती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में स्लीपवॉक कहा जाता है. यह तब होती है जब कोई व्यक्ति सोते हुए पूरी तरह से चलता है या अजीबोगरीब गतिविधियां करता है. अब सवाल है कि आखिर, स्लीपवॉकिंग क्या है? यह समस्या है या एक आदत? यह कितनी गंभीर समस्या है? इसके कारण क्या है? इस बारे में बता रहे हैं साइकोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार.

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Last Updated: April 24, 2026 23:17:29 IST

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Sleepwalk Causes: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल कई गंभीर बीमारियों की वजह बन रही है. लाइफस्टाइल में बदलाव होने से कोई नींद न आने की वजह से परेशान है तो कोई जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या से जूझ रहा है. वहीं, कुछ लोग नींद में चलने की बीमारी से परेशान हैं, जिसे मेडिकल भाषा में स्लीपवॉक कहा जाता है. यह तब होती है जब कोई व्यक्ति सोते हुए पूरी तरह से चलता है या अजीबोगरीब गतिविधियां करता है. यह परेशानी आमतौर पर गहरी नींद के दौरान होता है. यह रात के शुरुआती हिस्से में चरम पर होता है, इसलिए नींद में चलने की समस्या आमतौर पर सोने के बाद पहले कुछ घंटों में होती है. अब सवाल है कि आखिर, स्लीपवॉकिंग क्या है? यह समस्या है या एक आदत? यह कितनी गंभीर समस्या है? इसके कारण क्या है? इस बारे में बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के साइकोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार.

स्लीपवॉकिंग क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, स्लीपवॉकिंग एक ऐसी बीमारी होती है, जो ब्रेन डिसऑर्डर की वजह से होती है. इसके साइकैट्रिक और न्यूरोलॉजिकल दोनों रूप होते हैं. इसमें व्यक्ति नींद में उठकर चलने फिरने लगता है. नींद में चलना किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है लेकिन बच्चों में यह अधिक आम है. वहीं, अधिकांश मामलों में यह युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते खत्म हो जाता है, लेकिन कभी-कभी यह वयस्कता तक भी बना रह सकता है. वहीं, कुछ लोगों में यह आदत बड़े होने के बाद शुरू होती है, जिसके कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं, हालांकि इसका इलाज मौजूद है.

क्यों होती है स्लीपवॉकिंग की समस्या?

नींद में चलने की आदत के कई मुख्य कारण हो सकते हैं, जिसमें से एक पर्याप्त नींद न ले पाना है. हालांकि, इसमें कोई घबराने वाली बात नहीं है. जो नींद में उठकर चलने लगते हैं वह एक नॉर्मल व्यक्ति की ही तरह अपना जीवन जीते हैं. लेकिन, अगर यह लगातार हो रहा हो या फिर नींद में चलने की वजह से खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो उस स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूरत.

स्लीपवॉकिंग का इलाज क्या है?

नींद में चलने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन आम तौर पर पर्याप्त नींद लेने और सोने से पहले एक नियमित और आरामदायक दिनचर्या अपनाने से इसमें मदद मिल सकती है.

  • सोने का समय निश्चित करें और उसे हर रोज अपनाएं.
  • अपने सोने की जगह पर शांति और अंधेरा रखें, जिससे आपकी नींद बाधित न हो.
  • सोने से पहले कुछ खास तरह के ड्रिंक्स जैसे कैफीन न पिएं और सोने से पहले शौचालय जाएं.
  • बिस्तर पर जाने से पहले शरीर को आराम देने वाले तरीके ढूंढें, जैसे गर्म पानी से स्नान करना, किताबें पढ़ना या गहरी सांस लेना
  • अगर बच्चे में यह समस्या है, तो उसे सामान्य रूप से नींद में चलने से 15 से 30 मिनट पहले धीरे से थोड़े समय के लिए जगाने की कोशिश करें. 
  • इससे उसके स्लीप साइकल में बदलाव करके उसे नींद में चलने से रोका जा सकता है.

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Sleepwalk Causes: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल कई गंभीर बीमारियों की वजह बन रही है. लाइफस्टाइल में बदलाव होने से कोई नींद न आने की वजह से परेशान है तो कोई जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या से जूझ रहा है. वहीं, कुछ लोग नींद में चलने की बीमारी से परेशान हैं, जिसे मेडिकल भाषा में स्लीपवॉक कहा जाता है. यह तब होती है जब कोई व्यक्ति सोते हुए पूरी तरह से चलता है या अजीबोगरीब गतिविधियां करता है. यह परेशानी आमतौर पर गहरी नींद के दौरान होता है. यह रात के शुरुआती हिस्से में चरम पर होता है, इसलिए नींद में चलने की समस्या आमतौर पर सोने के बाद पहले कुछ घंटों में होती है. अब सवाल है कि आखिर, स्लीपवॉकिंग क्या है? यह समस्या है या एक आदत? यह कितनी गंभीर समस्या है? इसके कारण क्या है? इस बारे में बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के साइकोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार.

स्लीपवॉकिंग क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, स्लीपवॉकिंग एक ऐसी बीमारी होती है, जो ब्रेन डिसऑर्डर की वजह से होती है. इसके साइकैट्रिक और न्यूरोलॉजिकल दोनों रूप होते हैं. इसमें व्यक्ति नींद में उठकर चलने फिरने लगता है. नींद में चलना किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है लेकिन बच्चों में यह अधिक आम है. वहीं, अधिकांश मामलों में यह युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते खत्म हो जाता है, लेकिन कभी-कभी यह वयस्कता तक भी बना रह सकता है. वहीं, कुछ लोगों में यह आदत बड़े होने के बाद शुरू होती है, जिसके कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं, हालांकि इसका इलाज मौजूद है.

क्यों होती है स्लीपवॉकिंग की समस्या?

नींद में चलने की आदत के कई मुख्य कारण हो सकते हैं, जिसमें से एक पर्याप्त नींद न ले पाना है. हालांकि, इसमें कोई घबराने वाली बात नहीं है. जो नींद में उठकर चलने लगते हैं वह एक नॉर्मल व्यक्ति की ही तरह अपना जीवन जीते हैं. लेकिन, अगर यह लगातार हो रहा हो या फिर नींद में चलने की वजह से खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो उस स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूरत.

स्लीपवॉकिंग का इलाज क्या है?

नींद में चलने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन आम तौर पर पर्याप्त नींद लेने और सोने से पहले एक नियमित और आरामदायक दिनचर्या अपनाने से इसमें मदद मिल सकती है.

  • सोने का समय निश्चित करें और उसे हर रोज अपनाएं.
  • अपने सोने की जगह पर शांति और अंधेरा रखें, जिससे आपकी नींद बाधित न हो.
  • सोने से पहले कुछ खास तरह के ड्रिंक्स जैसे कैफीन न पिएं और सोने से पहले शौचालय जाएं.
  • बिस्तर पर जाने से पहले शरीर को आराम देने वाले तरीके ढूंढें, जैसे गर्म पानी से स्नान करना, किताबें पढ़ना या गहरी सांस लेना
  • अगर बच्चे में यह समस्या है, तो उसे सामान्य रूप से नींद में चलने से 15 से 30 मिनट पहले धीरे से थोड़े समय के लिए जगाने की कोशिश करें. 
  • इससे उसके स्लीप साइकल में बदलाव करके उसे नींद में चलने से रोका जा सकता है.

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