Right Way To Take Medicines: जिन लोगों को दवाई खाना पसंद नहीं होता. वो ज्यादातर मुंह का स्वाद बदलने के लिए चाय, कॉफी, दूध, जूस और ठंडे पानी से दवा खा लेते हैं. ऐसा करने से आपके पेट में दवा तो पहुंच जाती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट आपको पहले से भी ज्यादा बुरी कंडीशन में ला सकते हैं. इस मामले में फर्डल यूनियन ऑफ जर्मन एसोसिएशन ऑफ फार्मासिस्ट ने सख्त चेतावानी दी है और बताया है कि दवाई को किन लिक्विड के साथ बिल्कुल नहीं खाना चाहिए और किन लिक्विड के साथ दवा खाने पर जल्दी आराम मिलता है.
कैसे असर दिखाती हैं दवाएं?
किसी भी बीमारी के ट्रीटमेंट के लिए दवाओं को सिरप, सस्पेंशन, टैबलेट, कैप्सूल, पाउडर और इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है. जहां लिक्विड और इंजेक्शन खून में जल्दी एबजॉर्व हो जाते हैं और कम समय में असर दिखाते हैं तो वहीं दवाई, गोली और और कैप्सूलों को घुलने में वक्त लगता है और ये पेट के जरिए खून में पहुंचती हैं. इसलिए इनके फायदे भी थोड़ा देरी से मिलते हैं, क्योंकि इनके एक्टिव कंपोनेंट्स धीरे धीरे शरीर में फैलते हैं. दवाओं को पीसकर या चबाकर खाने के लिए भी मना किया जाता है.
दवा को पीसकर क्यों न खाएं?
‘केआईएमएस हेल्थ’ साइट के आर्टिकल में डॉ एन विजयलक्ष्मी ने बताया है कि टैबलेट या अन्य दवाओं को पीसकर या घोलकर भी नहीं खाना चाहिए. ऐसा करने पर दवाई के सारे एक्टिव कंपोनेंट्स धीरे धीरे एब्जॉर्व होने के बजाए एक साथ पेट में चले जाते हैं. इससे डायजेशन और हेल्थ के रिस्क पैदा हो सकते हैं.
कम पानी में दवा खाने से अल्सर?
कुछ लोग बिना पानी या एक घूंट पानी में दवा को निगल जाते हैं. ऐसे लोगों के लिए मुंबई फोर्टिस के डॉ. प्रदीप सिंह ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि बिना पानी के गोली लेते हैं तो वो पेट में घुल नहीं पाती और मल के रास्ते बाहर निकल जाती है. अब यदि दवा पेट में घुलेगी नहीं तो उसे खाने का कोई फायदा नहीं. ठीक इसी तरह, यदि पर्याप्त पानी के साथ दवा को न लिया जाए तो ये पेट में पड़े हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ बंधकर रिएक्शन कर सकते है, जिससे आगे चलकर अल्सर जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है.
ठंडे पानी से खाएं या गर्म पानी से
अक्सर कुछ लोगों के मन में भ्रांतियां रहती हैं कि दवा को गर्म पानी से लेना चाहिए या ठंडे पानी से. इस मामले में बीबीसी से बातचीत करते हुए डॉ. गोपेश ने समझाया कि दवाएं गोली या कैप्सूल को गुनगुने पानी से लेना सबसे बेस्ट होता है. लेकिन ध्यान रखें पानी ज्यादा गर्म न हो, वरना ये मेडिसिनल प्रॉपर्टीज के असर को कम और धीमा कर सकता है. जबकि ठंडे पानी से गोली या कैप्सूल खाने पर घुलने की प्रोसेस स्लो हो जाती है. कभी भी अपनी सहूलियत के हिसाब से दवा को नहीं लेना चाहिए. डॉक्टर की बताई टाइमिंग और तरीके से ही इनके फायदे मिलते हैं.
दूध, चाय और कॉफी के साथ दवाई
फर्डल यूनियन ऑफ जर्मन एसोसिएशन ऑफ फार्मासिस्ट की प्रवक्ता उर्सुला सेलरबर्ग ने ‘द हिंदू’ में अपने आर्टिकल में साफ साफ लिखा है कि कैसे दूध का कैल्शियम दवा के साथ मिक्स तो हो जाता है, लेकिन इसे दवा के सी तत्व खून तक नहीं पहुंच पाते. उन्होंने बताया है कि दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ थायरॉइड हार्मोन, ऑस्टियोपोरोसिस की दवाएं खाने पर असर कम हो जाता है. मिनरल वाटर के साथ भी यही सीन रहता है.
जूस के साथ भूलकर न खाएं दवा
फलों के रस में मौजूद एसिड भी दवाओं के साथ मिलकर रिएक्शन कर सकता है. खासतौर पर खट्टे फल जैसे अंगूर का रस. ये दवाओं को एब्जॉर्पशन में हेल्प करने वाले एंजाइम्स नष्ट कर देता है, जिससे दवा को खून तक ठीक से नहीं पहुंच पाती. इसलिए हाई बीपी, हार्ट डिजीज और लिपिड मेटोबॉलिज्म की दवाओं को जूस के साथ लेने की मना ही होती है.
फिर कैसे खाएं दवा?
दवाएं विशेष रूप से कैप्सूल और टैबलेट खाने का सबसे आसान तरीका है कि इसे सादा पानी या नॉर्मल तापमान वाले पानी के साथ लिया जाए, जो न ज्यादा ठंडा हो और न ही ज्यादा गर्म. यदि दवाओं को गुनगुने या रूप टैंप्रेचर वाले पानी के साथ लेते हैं तो ये सही तरीके से और तेजी से घुलती हैं और इनकी मेडिसिनल प्रॉपर्टीज बॉडी को मिल जाती हैं.