Academicians Open Letter To Priyanka Gandhi: कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा के पार्लियामेंट में “गोमूत्र एक्सपर्ट” वाले कमेंट ने पॉलिटिकल और एकेडमिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है. देश भर के 200 से ज़्यादा वाइस चांसलर, पूर्व वाइस चांसलर, प्रोफेसर और एकेडमिक्स खुलकर IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामकोटी के सपोर्ट में आ गए हैं.
एक ओपन लेटर में, एकेडमिक्स ने पॉलिटिकल कमेंट्री के ज़रिए एक साइंटिस्ट की एकेडमिक उपलब्धियों को कम आंकने पर कड़ा एतराज़ जताया. उनका तर्क है कि असहमति डेमोक्रेसी का हिस्सा हो सकती है, लेकिन किसी स्कॉलर की पहचान को एक ही लेबल तक सीमित करना साइंटिफिक सोच और हेल्दी पब्लिक डिस्कोर्स के लिए नुकसानदायक है.
क्या है पूरा मामला?
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा के दौरान, कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाषण में बिना किसी का नाम लिए एक कमेंट किया. माना जा रहा था कि वह IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामकोटी का ज़िक्र कर रही थीं. एकेडमिक कम्युनिटी के एक बड़े हिस्से ने इन कथित कमेंट्स पर नाराज़गी जताई.
200 से ज़्यादा एकेडेमिक्स ने ओपन लेटर लिखा
लगभग 215 वाइस चांसलर, पूर्व वाइस चांसलर, प्रोफेसर और एकेडेमिक्स ने मिलकर तीन पेज का ओपन लेटर जारी किया. इसमें कहा गया कि प्रोफेसर वी. कामकोटि को कथित तौर पर गोमूत्र एक्सपर्ट कहना सिर्फ़ एक व्यक्ति पर कमेंट नहीं है, बल्कि पूरी एकेडेमिक्स कम्युनिटी के लिए चिंता की बात है.
लेटर में कहा गया कि किसी स्कॉलर के तर्कों और रिसर्च पर चर्चा करने के बजाय उसे लेबल लगाकर खारिज करना साइंटिफिक अप्रोच और इंटेलेक्चुअल बातचीत की भावना को कमज़ोर करता है. एकेडेमिक्स ने लिखा कि साइंटिस्ट और रिसर्चर को मज़ाक या पर्सनल हमलों के डर के बिना पब्लिक डिस्कोर्स में हिस्सा लेने का अधिकार होना चाहिए.
प्रोफेसर वी. कामकोटि की उपलब्धियों का ज़िक्र किया गया
ओपन लेटर में प्रोफेसर वी. कामकोटि की एकेडमिक और साइंटिफिक उपलब्धियों के बारे में भी डिटेल में बताया गया है. लेटर के मुताबिक, उनके पास IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में MS और PhD की डिग्री है. उन्होंने 150 से ज़्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं और 50 से ज़्यादा रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में शामिल रहे हैं.
लेटर में यह भी लिखा है कि उन्हें DRDO एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड और इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन टेक्नो विजनरी अवॉर्ड जैसे बड़े सम्मान मिले हैं. उन्होंने भारत के पहले इंडस्ट्री-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर के डेवलपमेंट में उनके अहम रोल का भी ज़िक्र किया है.
साइंटिफिक सोच को कम मत समझो
एकेडेमिक्स ने अपने लेटर में कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि कई ऐसे आइडिया जिन्हें कभी नामुमकिन या अनसाइंटिफिक माना जाता था, बाद में साइंटिफिक तौर पर साबित हुए हैं. नई रिसर्च ने भी समय के साथ कई बनी-बनाई बातों को गलत साबित किया है. कोई साइंटिस्ट या रिसर्चर की बातों से सहमत नहीं हो सकता है, और उनके तर्कों और सबूतों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन पर्सनल कमेंट्स के आधार पर उनकी एकेडमिक क्वालिफिकेशन और रिसर्च वर्क को कम नहीं आंकना चाहिए.