Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार के निधन के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा हमेशा के लिए बदल गई. राज्य इस समय शोक में है, लेकिन इसके साथ ही देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक पवार परिवार के भविष्य को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
दादा के बाद NCP का नेता कौन?
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन हो गया है. बुधवार सुबह 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंड करते समय उनका चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. वे 66 साल के थे. इस हादसे में पवार के सिक्योरिटी गार्ड, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत पांच लोगों की मौत हो गई. पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के लिए एक पब्लिक मीटिंग को एड्रेस करने के लिए बारामती जा रहे थे. वे सुबह 8:10 बजे मुंबई से निकले थे. महाराष्ट्र एविएशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, पायलट ने सुबह 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंड करने की कोशिश की, लेकिन जब रनवे साफ नहीं दिखा, तो वह प्लेन को वापस ऊपर ले गया. पहली कोशिश फेल होने के बाद, बारामती के रनवे 11 पर लैंड करने की दूसरी कोशिश की गई. इस कोशिश के दौरान, प्लेन रनवे से फिसल गया और क्रैश हो गया, जिससे उसमें आग लग गई. बताया गया है कि पायलट ने लैंडिंग के दौरान कोई इमरजेंसी सिग्नल नहीं दिया. उसने “मेडे” कॉल भी नहीं किया.
अजित पवार के निधन के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा हमेशा के लिए बदल गई. राज्य इस समय शोक में है, लेकिन इसके साथ ही देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक पवार परिवार के भविष्य को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
अजित पवार, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे. वे न सिर्फ शरद पवार के सबसे वरिष्ठ भतीजे थे, बल्कि लंबे समय तक उनकी राजनीतिक रणनीति के अहम स्तंभ भी माने जाते रहे. अजित पवार अपने पीछे पत्नी सुनेत्रा पवार (राज्यसभा सांसद) और दो बेटे पार्थ पवार और जय पवार को छोड़ गए हैं. वे शरद पवार के भतीजे और सुप्रिया सुले के पहले कज़िन थे. पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी में रोहित पवार, शरद पवार के दूसरे भाई दिंकरराव के पोते हैं जो करजत-जामखेड़ से विधायक हैं और परिवार के एक अलग राजनीतिक धड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं.
वहीं युगेंद्र पवार अजित पवार के छोटे भाई श्रीनिवास पवार के बेटे और शरद पवार के प्रपौत्र हैं. उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी (एसपी) के टिकट पर बारामती से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें अजित पवार से हार का सामना करना पड़ा.

2 जुलाई 2023 को अजित पवार ने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था. इस फैसले के साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) दो गुटों में बंट गई. चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को असली एनसीपी और ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह प्रदान किया, जबकि शरद पवार समर्थकों ने एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का गठन किया. यह विभाजन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरे पारिवारिक और वैचारिक मतभेदों का भी प्रतीक बन गया.
“दादा” के अचानक निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अजित पवार गुट की अगुवाई अब कौन करेगा. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार की अपनी राजनीतिक पहचान है, लेकिन नेतृत्व को लेकर निगाहें उनके बेटों पर टिकी हैं. पार्थ पवार जिन्होंने पहले मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जय पवार जो फिलहाल राजनीति में सीमित भूमिका में हैं दोनों को संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है. पार्थ और जय, शरद पवार के प्रपौत्र और सुप्रिया सुले के फर्स्ट कज़िन हैं.
इस दुखद घटना ने परिवार के मुखिया शरद पवार (85) को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है. शरद गोविंदराव और शारदाबाई पवार के 11 बच्चों में से एक हैं. उन्होंने दशकों तक अजित को गाइड किया लेकिन जुलाई 2023 में उनका रिश्ता टूट गया. आज की दुखद घटना से पहले रिपोर्ट्स में बताया गया था कि NCP के दोनों ग्रुप स्ट्रेटेजिक लोकल अलायंस के ज़रिए सुलह की ओर बढ़ रहे थे. दोनों ग्रुप्स ने मिलकर 15 जनवरी, 2026 को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में होने वाले म्युनिसिपल इलेक्शन के लिए एक यूनिफाइड NCP मैनिफेस्टो जारी किया.
अब, उनके भतीजे की मौत के बाद “घर वापसी” की अफवाहें ट्रेंड कर रही हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि शरद अपने पोते (पार्थ और जय) को NCP (शरदचंद्र पवार) में वापस लाकर पार्टी को एक करने की कोशिश कर सकते हैं.
पवार परिवार की अगली पीढ़ी में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. उत्तराधिकार की लड़ाईअगली पीढ़ी के बीच अंदरूनी डायनामिक्स अब Google पर बहुत ज़्यादा सर्च का विषय हैं. सुप्रिया सुले शरद पवार की बेटी और स्वर्गीय अजित पवार की चचेरी बहन हैं. लोकसभा लीडर के तौर पर वह अपने पिता की राष्ट्रीय विरासत की “उत्तराधिकारी” हैं. रोहित पवार जिन्हें अक्सर “राइजिंग स्टार” कहा जाता है कर्जत-जामखेड़ से MLA हैं. सही कहें तो वह राजेंद्र पवार (जो अजित के चचेरे भाई हैं) के बेटे हैं. इससे रोहित शरद पवार के पोते और अजित पवार और सुप्रिया सुले दोनों के भतीजे बन जाते हैं. सोशल मीडिया पर यह सवाल ट्रेंड कर रहा है कि क्या परिवार सुप्रिया के पीछे एकजुट होगा या रोहित पवार जो 2023 के बंटवारे के दौरान शरद के प्रति वफादार रहे को अजित के बेटों के मुकाबले बड़ी भूमिका दी जाएगी.
शरद पवार पहले संकेत दे चुके थे कि वे 2026 के अंत तक राजनीति से संन्यास ले सकते हैं. लेकिन अजित पवार जो उनके भाई के बेटे और लंबे समय तक उनके सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगी रहे के निधन के बाद माना जा रहा है कि वे यह फैसला टाल सकते हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शरद पवार, अपनी बेटी और प्रपौत्रों के भविष्य को स्थिर करने के लिए कुछ समय और “पवार राजनीतिक विरासत” की कमान अपने हाथ में रख सकते हैं.
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