Economic Survey 2026 on obesity: यूनियन बजट 2026 से हेल्थ सेक्टर को कई उम्मीदें हैं. क्योंकि, आज कई ऐसी बीमारियां हैं जो युवाओं को तेजी से जकड़ती जा रही हैं. मोटापा ऐसी ही बीमारियों में से एक है. इसी को लेकर एक अहम इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया. सर्वे में एक बार फिर मोटापे को लेकर बड़ी चिंता जताई गई. यह बीमारी न सिर्फ सेहत पर, बल्कि देश की इकोनॉमी भी कमजोर हो रही है. जानिए मोटापा देश की अर्थव्यवस्था पर कैसे असर डालता है?
क्या बजट में मोटापे का हल निकलेगा. India News
Economic Survey 2026 on obesity: यूनियन बजट 2026 से हेल्थ सेक्टर को कई उम्मीदें हैं. इंडस्ट्री ज्यादा टैक्स डिडक्शंस, इनकम टैक्स की दोनों रीजीम में हेल्थ और लाइफ पॉलिसीज पर टैक्स बेनेफिट्स और जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मसले का हल चाहती है. आज कई ऐसी बीमारियां हैं जो युवाओं को तेजी से जकड़ती जा रही हैं. मोटापा ऐसी ही बीमारियों में से एक है. भारत में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है. इसी को लेकर एक अहम इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया. सर्वे में एक बार फिर मोटापे को लेकर बड़ी चिंता जताई गई. यह बीमारी न सिर्फ सेहत पर वार कर रही है, बल्कि देश की इकोनॉमी भी कमजोर हो रही है.
इकोनॉमिक सर्वे में बच्चों से लेकर बड़ों तक में बढ़ते मोटापे, जंक फूड की बढ़ती खपत, जंक फूड के विज्ञापनों पर सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक रोक जैसे तमाम मुद्दों पर जिक्र किया गया. एम्स ने भी चेताया है कि मोटापा हार्ट डिसीज, डायबिटीज, हाई बीपी, हार्मोनल गड़बड़ी का कारण बन सकता है. एक रिपोर्ट बताती हैं कि, 76% भारतीयों के करीबी सर्कल में कोई न कोई व्यक्ति मोटापे से पीड़ित है. इसी को लेकर 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से लोगों को काफी उम्मीद है. अब सवाल ये कि मोटापा देश की अर्थव्यवस्था पर कैसे असर डालता है? बढ़ते मोटापे से देश की इकोनॉमी को क्या खतरा है?
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट बताती है कि, लोकलसर्किल्स के ताजा सर्वे में सामने आया है कि 4 में से 3 यानी लगभग 76% भारतीयों के करीबी सर्कल में कोई न कोई व्यक्ति मोटापे से पीड़ित है. वहीं, 64% लोगों ने बताया कि उनके जानने वाले मोटे लोग आमतौर पर बैठकर काम करने वाले होते हैं, एक्सरसाइज नहीं करते और तैलीय या प्रोसेस्ड खाना खाते हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 के मुताबिक, 24% महिलाएं और 23% पुरुष मोटे हैं. 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापा 2015-16 में 2.1% था, जो 2019-21 में बढ़कर 3.4% हो गया. वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, देश में 1.44 करोड़ बच्चे मोटे हैं.
ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में मोटापे की वजह से बढ़ता खर्च देश की GDP का 1% था, जो साल 2030 तक बढ़कर 1.57% और साल 2060 तक 2.5% पर पहुंच सकता है. भारत के लिए मोटापा बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. रिपोर्ट की माने तो भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना है तो उसे मोटापे की चुनौती से पार पाना होगा.
मोटापा अपने साथ अनेक चुनौतियां लाती है. मोटे लोगों की कार्यक्षमता कम हो जाती है. मोटापे के साथ इलाज और दवाओं का खर्च बढ़ता चला जाता है. देश के कार्यशक्ति प्रभावित होती है. युवाओं और बच्चों के मोटापे से मौजूदा और आने वाले वर्कफोर्स पर प्रभाव पड़ता है. मोटापे की वजह से हेल्थ ट्रीटमेंट पर भारी खर्च, कार्यबल में प्रोडक्शन की कमी, इलाज में वृद्धि के चलते अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है.
लोकलसर्किल्स के सर्वे में 319 जिलों से 50 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं. 47% टियर-1, 26% टियर-2 व 27% टियर-3, 4, 5 व ग्रामीण इलाकों से थे. 76% ने कहा कि उनके करीबी सर्कल में एक या अधिक लोग मोटे हैं. 42% ने बताया कि उनके नेटवर्क में 4 या ज्यादा लोग मोटे हैं.
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