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Home > देश > 5100 में खरीदी पिता की अंतिम संस्कार की वीडियो, जब बाप का मरा हुआ मुंह देखने नहीं पहुंची बेटियां; रिश्तेदारों से की ये डिमांड

5100 में खरीदी पिता की अंतिम संस्कार की वीडियो, जब बाप का मरा हुआ मुंह देखने नहीं पहुंची बेटियां; रिश्तेदारों से की ये डिमांड

Antim Sanskar On Video Call: मुंबई के व्यापारी रहे शिवचरण गुप्ता की सोनीपत वृद्धाश्रम में मौत हो गई. बेटियां अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचीं और वीडियो कॉल पर अंतिम विदाई देखी. छोटी बेटी ने 5100 रुपये भेजे.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-08-06 12:02:58

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Antim Sanskar On Video Call: कभी मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारियों की लिस्ट में शुमार शिवचरण रामरत्न गुप्ता का जिंदगी का आखिरी पड़ाव काफी दर्द भरा रहा. 74 साल की उम्र में हरियाणा के सोनीपत में उन्होंने एक वृद्धाश्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनको अंतिम विदाई देने के लिए बेटियां नहीं पहुंची. जिस पिता ने उन्हें बचपन से पाला, पिढ़ाई-लिखाई कराई, हर नखरे उठाए और धूमधाम से शादी की. उसी पिता के अंतिम संस्कार से बेटियों ने नौकरी का हवाला देते हुए दूरी बना ली. 

वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार

शिवचरण पिछले तीन साल से सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. मंगलवार को उनकी मौत की सूचना आश्रम के लोगों ने दी थी. उनकी तीन बेटियां है, लोगों को उम्मीद थी कि निधन की खबर सुनकर बेटियां भागी चली आएंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बड़ी बेटी ने कहा कि वह नेपाल में हैं, नहीं आ सकती. वहीं दूसरी ने भी मना कर दिया और छोटी ने तो हद पार कर दी उसने 5100 रुपये भेजकर अंतिम संस्कार करने की बात कर दी. 

बेटियों ने रिश्तों को किया शर्मशार 

आश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार की बात कही. जब पिता को मुखाग्नि दी जा रही थी, तब एक ने कहा कि अभी और कितना समय लगेगी. इसके बाद उसने कहा कि अंतिम संस्कार की वीडियो भेज देना. वीडियो कॉल पर पिता का शव देख उनकी एक बेटी ने केवल पापा कहा. 

हालात ने बदली जिंदगी की राह

शिवचरण रामरत्न गुप्ता का नाम कभी मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारियों में शामिल था. उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर परिवार को एक अच्छी जिंदगी देने की बात कही. तीनों बेटियों नीता, निशआ और प्रिया को पाला और पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा किया. लेकिन समय के साथ उन्हें व्यापार में काफी नुकसान हुआ. जिसके बाद पति की आर्थिक स्थिति खराब होती चली गई. वह अपने पत्नी के साथ सोनीपत आ गए और दोनों ने वृद्धाश्रम में रहना शुरू किया. करीब एक साल बाद पत्नी की मौत हो गई. 

ये भी पढ़ें: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हुईं भावुक, देश लौटने का लिया निर्णय; बोलीं, ‘अब जो भी परिणाम हो, मैं अपनी मातृभूमि से…’

जाते-जाते पेश की मानवता की मिशाल 

शिवचरण ने जिंदगीभर कई मुश्किलों का सामना किया. लेकिन जाते-जाते उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की. उन्होंने अपनी आंखे दान करने का संकप्ल लिया था. निधन के बाद डॉक्टरों की टीम ने आश्रम पहुंचकर उनकी आंखें दान कराईं. उनकी दोनों आंखें किसी जरूरतमंद को दी जाएगी. 

ये भी पढ़ें:  Smriti Pandey Death Mistry: कौन थी स्मृति पांडे? घर की तीसरी मंजिल पर मिली लाश; आशिक को देख पुलिस भी हैरान

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Last Updated: 2026-08-06 12:02:58

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Antim Sanskar On Video Call: कभी मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारियों की लिस्ट में शुमार शिवचरण रामरत्न गुप्ता का जिंदगी का आखिरी पड़ाव काफी दर्द भरा रहा. 74 साल की उम्र में हरियाणा के सोनीपत में उन्होंने एक वृद्धाश्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनको अंतिम विदाई देने के लिए बेटियां नहीं पहुंची. जिस पिता ने उन्हें बचपन से पाला, पिढ़ाई-लिखाई कराई, हर नखरे उठाए और धूमधाम से शादी की. उसी पिता के अंतिम संस्कार से बेटियों ने नौकरी का हवाला देते हुए दूरी बना ली. 

वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार

शिवचरण पिछले तीन साल से सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. मंगलवार को उनकी मौत की सूचना आश्रम के लोगों ने दी थी. उनकी तीन बेटियां है, लोगों को उम्मीद थी कि निधन की खबर सुनकर बेटियां भागी चली आएंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बड़ी बेटी ने कहा कि वह नेपाल में हैं, नहीं आ सकती. वहीं दूसरी ने भी मना कर दिया और छोटी ने तो हद पार कर दी उसने 5100 रुपये भेजकर अंतिम संस्कार करने की बात कर दी. 

बेटियों ने रिश्तों को किया शर्मशार 

आश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार की बात कही. जब पिता को मुखाग्नि दी जा रही थी, तब एक ने कहा कि अभी और कितना समय लगेगी. इसके बाद उसने कहा कि अंतिम संस्कार की वीडियो भेज देना. वीडियो कॉल पर पिता का शव देख उनकी एक बेटी ने केवल पापा कहा. 

हालात ने बदली जिंदगी की राह

शिवचरण रामरत्न गुप्ता का नाम कभी मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारियों में शामिल था. उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर परिवार को एक अच्छी जिंदगी देने की बात कही. तीनों बेटियों नीता, निशआ और प्रिया को पाला और पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा किया. लेकिन समय के साथ उन्हें व्यापार में काफी नुकसान हुआ. जिसके बाद पति की आर्थिक स्थिति खराब होती चली गई. वह अपने पत्नी के साथ सोनीपत आ गए और दोनों ने वृद्धाश्रम में रहना शुरू किया. करीब एक साल बाद पत्नी की मौत हो गई. 

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जाते-जाते पेश की मानवता की मिशाल 

शिवचरण ने जिंदगीभर कई मुश्किलों का सामना किया. लेकिन जाते-जाते उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की. उन्होंने अपनी आंखे दान करने का संकप्ल लिया था. निधन के बाद डॉक्टरों की टीम ने आश्रम पहुंचकर उनकी आंखें दान कराईं. उनकी दोनों आंखें किसी जरूरतमंद को दी जाएगी. 

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