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FCRA Amendment Bill 2026 क्या है? विदेशी चंदा लेने वाले संगठनों के लिए बड़ा बदलाव; आसान भाषा में समझिए पूरी जानकारी

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Last Updated: August 6, 2026 14:56:04 IST

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FCRA Bill Kya Hai 2026: भारत में विदेशी फंडिंग (Foreign Contribution) को नियंत्रित करने वाला Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) एक बार फिर चर्चा में है. केंद्र सरकार ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 पेश किया है, जिसमें विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर नए प्रावधान जोड़े गए हैं. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कानूनी अस्पष्टता दूर करना है, जबकि विपक्ष और कई सामाजिक संगठन इसे सरकार को अधिक अधिकार देने वाला कदम बता रहे हैं.

क्या है FCRA कानून?

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act ऐसा कानून है, जो तय करता है कि भारत में कोई NGO, ट्रस्ट, संस्था या संगठन विदेश से मिलने वाले पैसे या अन्य विदेशी योगदान को किस तरह प्राप्त करेगा और उसका उपयोग कैसे करेगा.इस कानून के तहत विदेशी फंड लेने वाले संगठनों को गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन लेना होता है. साथ ही उन्हें हर साल विदेशी फंड के उपयोग का पूरा हिसाब सरकार को देना पड़ता है.

FCRA Bill 2026 क्यों लाया गया?

सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून में यह स्पष्ट नहीं था कि यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाए तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों का क्या होगा. इसी कमी को दूर करने के लिए संशोधन बिल लाया गया है.नए बिल में विदेशी फंड से खरीदी गई या बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.

ईसाई संगठनों की चिंता क्यों बढ़ी?

पूर्वोत्तर भारत समेत कई चर्च और ईसाई संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के लिए विदेशी फंड प्राप्त करती हैं.इन संगठनों का कहना है कि यदि किसी कारण उनका FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त हो गया तो वर्षों से बनाई गई संस्थागत संपत्तियों पर भी सरकारी नियंत्रण हो सकता है. इसी वजह से उन्होंने इस बिल पर चिंता जताई है.

FCRA कानून का संक्षिप्त इतिहास

  • 1976 में पहली बार FCRA कानून लागू किया गया.
  • 2010 में नया FCRA Act लागू हुआ और रजिस्ट्रेशन की नई व्यवस्था शुरू हुई.
  • 2020 में कानून को और सख्त किया गया. विदेशी फंड के लिए एक ही SBI शाखा का उपयोग अनिवार्य
  • किया गया और प्रशासनिक खर्च की सीमा घटा दी गई.
  • 2026 का संशोधन अब विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को भी कानूनी ढांचे में शामिल करता है.

FCRA Bill 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?

यह बिल केवल विदेशी चंदे तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के भविष्य को भी तय करता है. इसलिए इसका असर हजारों NGO, ट्रस्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ सकता है. सरकार इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और कई संगठन इसे संस्थाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहे हैं. आने वाले समय में संसद में इस बिल पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है.

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Last Updated: August 6, 2026 14:56:04 IST

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FCRA Bill Kya Hai 2026: भारत में विदेशी फंडिंग (Foreign Contribution) को नियंत्रित करने वाला Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) एक बार फिर चर्चा में है. केंद्र सरकार ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 पेश किया है, जिसमें विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर नए प्रावधान जोड़े गए हैं. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कानूनी अस्पष्टता दूर करना है, जबकि विपक्ष और कई सामाजिक संगठन इसे सरकार को अधिक अधिकार देने वाला कदम बता रहे हैं.

क्या है FCRA कानून?

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act ऐसा कानून है, जो तय करता है कि भारत में कोई NGO, ट्रस्ट, संस्था या संगठन विदेश से मिलने वाले पैसे या अन्य विदेशी योगदान को किस तरह प्राप्त करेगा और उसका उपयोग कैसे करेगा.इस कानून के तहत विदेशी फंड लेने वाले संगठनों को गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन लेना होता है. साथ ही उन्हें हर साल विदेशी फंड के उपयोग का पूरा हिसाब सरकार को देना पड़ता है.

FCRA Bill 2026 क्यों लाया गया?

सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून में यह स्पष्ट नहीं था कि यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाए तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों का क्या होगा. इसी कमी को दूर करने के लिए संशोधन बिल लाया गया है.नए बिल में विदेशी फंड से खरीदी गई या बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.

ईसाई संगठनों की चिंता क्यों बढ़ी?

पूर्वोत्तर भारत समेत कई चर्च और ईसाई संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के लिए विदेशी फंड प्राप्त करती हैं.इन संगठनों का कहना है कि यदि किसी कारण उनका FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त हो गया तो वर्षों से बनाई गई संस्थागत संपत्तियों पर भी सरकारी नियंत्रण हो सकता है. इसी वजह से उन्होंने इस बिल पर चिंता जताई है.

FCRA कानून का संक्षिप्त इतिहास

  • 1976 में पहली बार FCRA कानून लागू किया गया.
  • 2010 में नया FCRA Act लागू हुआ और रजिस्ट्रेशन की नई व्यवस्था शुरू हुई.
  • 2020 में कानून को और सख्त किया गया. विदेशी फंड के लिए एक ही SBI शाखा का उपयोग अनिवार्य
  • किया गया और प्रशासनिक खर्च की सीमा घटा दी गई.
  • 2026 का संशोधन अब विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को भी कानूनी ढांचे में शामिल करता है.

FCRA Bill 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?

यह बिल केवल विदेशी चंदे तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के भविष्य को भी तय करता है. इसलिए इसका असर हजारों NGO, ट्रस्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ सकता है. सरकार इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और कई संगठन इसे संस्थाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहे हैं. आने वाले समय में संसद में इस बिल पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है.

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