PM Modi On Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत के जवाबी अभियान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पर्दे के पीछे की अहम जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सेना को कार्रवाई की पूरी आज़ादी दी थी, लेकिन साथ ही एक बात बेहद साफ कर दी थी. ऑपरेशन जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सही समय पर हो और इसमें नाकामी की कोई गुंजाइश न रहे.
PM मोदी ने सेना को दी ‘पूरी आज़ादी’
जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) के मुताबिक, 29 अप्रैल 2025 को चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की प्रधानमंत्री के साथ अहम बैठक हुई थी. इससे पहले 23 अप्रैल को कूटनीतिक, आर्थिक और व्यापार से जुड़े फैसले लिए जा चुके थे. सेना ने सरकार के सामने कार्रवाई के कई विकल्प रखे थे. चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सेना पर ऑपरेशन तुरंत शुरू करने का कोई राजनीतिक दबाव नहीं डाला. उनका संदेश था कि सेना अपने हिसाब से समय तय करे, लेकिन यह सुनिश्चित करे कि ऑपरेशन में मानवीय या तकनीकी वजह से विफलता की कोई गुंजाइश न रहे. साथ ही, कार्रवाई के ठोस सबूत भी मौजूद होने चाहिए.
‘बड़ा सबक सिखाना है’
जनरल चौहान ने कहा कि 23 से 29 अप्रैल के बीच सरकार और सेना के बीच कई दौर की बातचीत हुई. सैन्य नेतृत्व ने अलग-अलग विकल्पों पर NSA के साथ चर्चा की. आखिरकार यह तय हुआ कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए और सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह फैसला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में हुए आतंकी हमले के बाद आया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. इसके बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoJK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया.
साफ राजनीतिक निर्देश से सेना को मिला भरोसा
चौहान के अनुसार, सैन्य नेतृत्व के लिए स्पष्ट राजनीतिक दिशा सबसे महत्वपूर्ण थी. उनका कहना था कि सेना को यह पता होना चाहिए कि सरकार का उद्देश्य क्या है और उसे हासिल करने के लिए किस स्तर तक कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने कहा कि राजनीति और सैन्य शक्ति को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता. सरकार को अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए सैन्य विकल्प उपलब्ध होने चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उनके मुताबिक, सेना को स्पष्ट लक्ष्य, तैयारी का समय और कार्रवाई की पूरी आज़ादी तीनों मिले थे.