गुरुग्राम (गुड़गांव) में मानसून के दौरान सड़कों पर भारी जलभराव होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में Cars24 (पुरानी कारों के प्लेटफॉर्म) का एक अनोखा मार्केटिंग स्टंट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.
सड़क पर भरे पानी का मज़ाक उड़ाने के लिए कंपनी ने पानी में एक नीली बोट (नाव) उतार दी, जिस पर Cars24 का लोगो लगा था. इस स्टंट के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कंपनी पर ₹50,000 का चालान काट दिया.
मज़ाक-मज़ाक में शुरू हुआ, पर काम आ गया!
कंपनी ने यह बोट गुड़गांव के ड्रेनेज सिस्टम और मानसून की अव्यवस्था पर तंज कसने के लिए उतारी थी. लेकिन हुआ यह कि जलभराव इतना ज़्यादा था कि सड़क पार करने के लिए परेशान पैदल यात्रियों और दफ्तर जाने वालों ने इस बोट का इस्तेमाल सचमुच आने-जाने के लिए करना शुरू कर दिया.
‘मज़ाक तब मज़ाक नहीं रहता, जब वो आपका सफ़र बन जाए’
Cars24 की Head of Brand, Creative, Communication प्राची शर्मा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘पिछले हफ्ते गुड़गांव में कानून तोड़ने का खर्चा ₹50,000 आया. हमने बारिश पर मज़ाक बनाने के लिए पानी में नाव उतारी थी… लेकिन हालात इतने बिगड़ गए कि लोग घर पहुँचने के लिए उसमें बैठने लगे, क्योंकि तैरकर या रोइंग करके जाना ही सड़क पार करने का सबसे तेज़ तरीका था. मज़ाक तब मज़ाक नहीं लगता, जब वो आपका रोज़ का सफ़र बन जाए.’
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ने चालान भर दिया है और अगर लोगों की मदद के लिए इस हफ्ते फिर बोट उतारनी पड़ी, तो वे दोबारा चालान भरने को भी तैयार हैं, उम्मीद बस इतनी है कि प्रशासन का ध्यान इस जलभराव की समस्या पर जाए.
नाव को फिर से तैनात किया जाएगा
इस बीच, कंपनी की अधिकारी प्राची शर्मा ने बताया कि उन्होंने नाव के लिए भुगतान कर दिया है.'”हम फिर से जुर्माना भरेंगे; अगर लोगों की मदद के लिए इस हफ़्ते भी नाव को तैनात करने की ज़रूरत पड़ी, तो हम ऐसा करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि वे अभी भी पानी की समस्या को लेकर किसी कार्रवाई, जैसे जुर्माना का इंतज़ार कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि सही लोग इस मामले पर ध्यान देंगे.

सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
इस घटना पर इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.
कुछ लोगों ने पूछा कि कार या बाइक के बजाय एक साधारण ‘नाव’ पर ट्रैफिक पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान कैसे काट सकती है? कहीं यह सिर्फ पब्लिसिटी का हिस्सा तो नहीं?
कई लोगों ने कहा कि भले ही यह एक मार्केटिंग स्टंट था, लेकिन इसने गुड़गांव के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी. जब एक मज़ाक लोगों की मजबूरी का साधन बन जाए, तो सवाल शहर के सिस्टम पर उठता है.