Haryana school safety Audit: एक सरकारी स्कूल के गेट की मेहराब गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत ने पूरे हरियाणा में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. सोनीपत के गनौर स्थित गढ़ी बलिंदा गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद अब हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग का कहना है कि ये मामला सिर्फ इसी स्कूल की जांच तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा परखने के लिए व्यापक ऑडिट कराया जाएगा.
सरकारी स्कूलों की होगी जांच
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने 1 अक्टूबर के आदेश में राज्य के सभी सरकारी स्कूल भवनों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है. इस जांच का मकसद ऐसे भवनों और उनके हिस्सों को चिन्हित करना है, जो बच्चों या स्कूल स्टाफ के लिए खतरा बन सकते हैं. जांच सिर्फ कमरों और मुख्य भवन तक सीमित नहीं रहेगी. स्कूलों के मुख्य गेट, मेहराब, छत, बाउंड्री वॉल और दूसरे निर्माण भी सुरक्षा जांच के दायरे में होंगे.
कार्रवाई जरूरी
आयोग ने साफ किया है कि खतरनाक ढांचे की पहचान करके केवल रिपोर्ट तैयार कर देना पर्याप्त नहीं होगा. जहां जरूरत होगी, वहां तुरंत मरम्मत, रखरखाव, बैरिकेडिंग, ढांचे को गिराने या दोबारा निर्माण जैसे कदम उठाने होंगे. आयोग ने माध्यमिक शिक्षा के महानिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा के निदेशक और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक को राज्यभर की स्थिति की समीक्षा करने को कहा है.
हादसे से पहले भी हुआ था निरीक्षण
गढ़ी बलिंदा के स्कूल में हादसा अगस्त में हुआ था. जांच के दौरान सामने आया कि घटना से पहले स्कूल की स्थिति का निरीक्षण किया गया था. रिकॉर्ड के मुताबिक 19 मई 2026 को स्कूल परिसर का निरीक्षण हुआ था. वहीं 22 मई को जूनियर इंजीनियर ने तकनीकी जांच की थी. इसके बाद 1 जून को स्कूल की मरम्मत के लिए लगभग 5.68 लाख रुपये का अनुमान तैयार किया गया था. हादसे के बाद स्कूल की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए लगभग 26.05 लाख रुपये का नया अनुमान भी तैयार किया गया.
अब जवाबदेही भी तय होगी
आयोग ने गनौर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और सोनीपत के जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य की प्रगति रिपोर्ट मांगी है. आयोग यह भी देखना चाहता है कि पहले सामने आई कमियों को दूर करने के लिए वास्तव में जमीन पर क्या कदम उठाए गए. आयोग के मुताबिक, किसी बच्चे की मौत को सिर्फ एक हादसा मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है. जरूरत इस बात की जांच करने की है कि स्कूलों में सुरक्षा से जुड़े निरीक्षण, रखरखाव, शिकायत और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है. अब पूरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों से जानकारी जुटाकर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इस मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होनी तय है.