तुकाराम मुंधे को इस साल मई में महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख का पदभार संभालने के बाद से खाद्य सुरक्षा संबंधी गहन छापेमारी करने के लिए जनता से अपार सराहना मिल रही है. कई लोगों ने उन्हें ‘सिंघम’ और ‘नायक’ का नाम दिया है.
हालांकि, मुंधे ने स्पष्ट किया है कि वे कोई सेलिब्रिटी नहीं हैं और बस अपना काम कर रहे हैं. बता दें कि तुकाराम मुंधे ने जिस समय से महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख का पदभार संभाला है, उन्होंने कई सराहनीय कार्य किये हैं, जिसकी व्यापक चर्चा हो रही है.
‘मैं कोई सेलेब्रिटी नहीं हूं’
मुंबई प्रेस क्लब द्वारा बुधवार को आयोजित ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में बोलते हुए मुंधे ने कहा, “मैं कोई सेलिब्रिटी नहीं हूं. मैं महाराष्ट्र एफडीए का संयुक्त सचिव और आयुक्त हूं. मुझे इस बात की पूरी जानकारी है.” पीटीआई ने यह जानकारी शेयर की है. तुकाराम ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक अधिकारी और विभाग इस कार्य में योगदान दे रहा है. उन्होंने आगे कहा, “व्यक्ति को सर्वोपरि नहीं होना चाहिए.”
इसके बजाय मुंधे का मानना है कि डिजिटल तकनीक की सहायता से एक मजबूत प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए ताकि यह व्यक्तियों के कार्यकाल के बाद भी काम करती रहे. उन्होंने बताया, “हम हमेशा एक व्यवस्थित प्रणाली स्थापित करने का प्रयास करते हैं. पहले से ही प्रणालियाँ मौजूद हैं, और हमें उनमें सुधार करने की आवश्यकता है. यदि नई प्रणालियों को लागू करने की आवश्यकता होती है, तो हम उसके लिए प्रयास करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करे.”
जनता की सेवा ही है एकमात्र रुचि
अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, मुंधे ने कहा कि उनकी केवल एक ही स्पष्ट रुचि है. उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की जनता की सेवा करना और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना मेरा निजी हित है. अगर मेरा कोई निजी हित है, तो वह यही है. बल्कि, एफडीए आयुक्त के रूप में मेरा एकमात्र हित यही है.” अपने 21 साल के नौकरशाही करियर में, आईएएस अधिकारी का 24 बार तबादला हो चुका है. निकट भविष्य में संभावित तबादलों के बारे में पूछे जाने पर, मुंधे ने कहा कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है. “मुझे सरकार पर भरोसा है, इसलिए मैं अभी भी काम कर रहा हूं. लेकिन आप मेरे तबादले के बारे में गलत व्यक्ति से पूछ रहे हैं. तबादलों का फैसला करने वाला मैं अधिकारी नहीं हूं. सक्षम अधिकारी ही फैसला करेगा,” उन्होंने स्पष्ट किया.