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इधर अमेरिका करता रह गया जंग, उधर भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मिलकर कर दिया खेला; मुंह ताकती रह गई दुनिया

India New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज एक एतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ है. जिसे दोनों देशों ने अपने संयुक्त बयान में इसे मील का पत्थर बताया है.

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Last Updated: April 27, 2026 16:11:50 IST

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India New Zealand FTA: भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर हस्ताक्षर करके व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत की है. वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में दोनों देशों ने रिकॉर्ड तोड़ नौ महीनों के भीतर इस समझौते को पूरा करके दुनिया को एक मज़बूत संदेश दिया है.

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने आधिकारिक दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान करके इस एक पीढ़ी में एक बार होने वाले समझौते को अंतिम रूप दिया.

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

एक संयुक्त बयान के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने क्रिकेट की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आज हिंद महासागर थोड़ा छोटा महसूस हो रहा है और हमारे दो महान लोकतंत्रों के बीच का बंधन और भी मज़बूत लग रहा है. हम ऐसे समय में मिल रहे हैं. जब दुनिया नए साझेदार चुन रही है और इस बदलती दुनिया में भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक-दूसरे को चुना है.

समझौते को मील का पत्थर बताया

यह समझौता केवल एक वाणिज्यिक दस्तावेज नहीं है. बल्कि, यह भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और न्यूज़ीलैंड प्रशांत क्षेत्र के एक विकसित राष्ट्र के बीच एक गहरे, जन-केंद्रित और स्थायी साझेदारी का प्रवेश द्वार है. दोनों देशों ने इस समझौते को एक मील का पत्थर बताया है. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जिसका लक्ष्य कुल $5 बिलियन का मूल्य प्राप्त करना है. इसके अतिरिक्त, अगले 15 वर्षों में $20 बिलियन का निवेश आकर्षित करने का भी लक्ष्य है.



समझौते की शर्तों के तहत न्यूजीलैंड भारतीय कंपनियों को अपने बाजारों में पूरी तरह से शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करेगा. वर्तमान में भारत से निर्यात किए जाने वाले कई उत्पादों पर 10% तक का शुल्क लगता है, जिसे अब घटाकर शून्य कर दिया जाएगा. बदले में भारत न्यूज़ीलैंड से आयात किए जाने वाले लगभग 95% उत्पादों पर महत्वपूर्ण शुल्क कटौती या छूट लागू करेगा. इसमें ऊन, लकड़ी, समुद्री भोजन और कुछ विशेष फल (जैसे एवोकैडो और चेरी) जैसी चीज़ें शामिल हैं.

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India New Zealand FTA: भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर हस्ताक्षर करके व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत की है. वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में दोनों देशों ने रिकॉर्ड तोड़ नौ महीनों के भीतर इस समझौते को पूरा करके दुनिया को एक मज़बूत संदेश दिया है.

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने आधिकारिक दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान करके इस एक पीढ़ी में एक बार होने वाले समझौते को अंतिम रूप दिया.

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

एक संयुक्त बयान के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने क्रिकेट की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आज हिंद महासागर थोड़ा छोटा महसूस हो रहा है और हमारे दो महान लोकतंत्रों के बीच का बंधन और भी मज़बूत लग रहा है. हम ऐसे समय में मिल रहे हैं. जब दुनिया नए साझेदार चुन रही है और इस बदलती दुनिया में भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक-दूसरे को चुना है.

समझौते को मील का पत्थर बताया

यह समझौता केवल एक वाणिज्यिक दस्तावेज नहीं है. बल्कि, यह भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और न्यूज़ीलैंड प्रशांत क्षेत्र के एक विकसित राष्ट्र के बीच एक गहरे, जन-केंद्रित और स्थायी साझेदारी का प्रवेश द्वार है. दोनों देशों ने इस समझौते को एक मील का पत्थर बताया है. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जिसका लक्ष्य कुल $5 बिलियन का मूल्य प्राप्त करना है. इसके अतिरिक्त, अगले 15 वर्षों में $20 बिलियन का निवेश आकर्षित करने का भी लक्ष्य है.



समझौते की शर्तों के तहत न्यूजीलैंड भारतीय कंपनियों को अपने बाजारों में पूरी तरह से शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करेगा. वर्तमान में भारत से निर्यात किए जाने वाले कई उत्पादों पर 10% तक का शुल्क लगता है, जिसे अब घटाकर शून्य कर दिया जाएगा. बदले में भारत न्यूज़ीलैंड से आयात किए जाने वाले लगभग 95% उत्पादों पर महत्वपूर्ण शुल्क कटौती या छूट लागू करेगा. इसमें ऊन, लकड़ी, समुद्री भोजन और कुछ विशेष फल (जैसे एवोकैडो और चेरी) जैसी चीज़ें शामिल हैं.

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