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जेपी इंफ्राटेक केस में बड़ा अपडेट, ED केस में मनोज गौड़ को मिली अंतरिम जमानत, जानें वजह

Jaypee Infratech Former CMD Bail: पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व CMD मनोज गौड़ को 14 दिन की अंतरिम जमानत दे दी.

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Published: January 24, 2026 21:24:00 IST
Last Updated: 2026-01-24 21:25:22

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Manoj Gaur Interim Bail: पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व CMD मनोज गौड़ को 14 दिन की अंतरिम जमानत दे दी. गौड़ 18 नवंबर, 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं, को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13 नवंबर, 2025 को 2018 के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें कथित तौर पर 13,000 करोड़ रुपये के हेरफेर का आरोप है.

क्यों मिली जमानत?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) धीरेंद्र राणा ने मनोज गौड़ को 5-5 लाख रुपये के दो जमानती मुचलकों पर अंतरिम जमानत दी. मनोज गौड़ के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और वकील फर्रुख खान ने दलील दी कि मनोज गौड़ की मां की सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ रही है क्योंकि वह बूढ़ी हैं और उन्हें डायलिसिस की जरूरत है.  उन्होंने कहा कि वह बहुत कमजोर हैं और कई बीमारियों से पीड़ित हैं. वह अपनी मां के साथ रहना चाहते हैं.

गौड़ का 30 साल का मेडिकल इतिहास

दूसरी ओर, विशेष लोक अभियोजक (SPP) अतुल त्रिपाठी ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी हैं. नियमित जमानत याचिका भी दायर की गई है. इस पर बहस के बाद यह भी कोर्ट में लंबित है. याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि गौड़ 61 साल के हैं और उनका 30 साल का मेडिकल इतिहास है. इसमें कहा गया है कि गौड़ की हिरासत, आठ साल पुराने ED मामले, दस्तावेजी आरोपों, व्यक्तिगत लाभ की अनुपस्थिति, कंपनियों पर नियंत्रण के वैधानिक विनिवेश, और गंभीर मेडिकल बीमारियों को देखते हुए, बहुत ज़्यादा अनुपातहीन है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है.
आगे यह भी कहा गया है कि किसी भी जांच की जरूरत न होने के बावजूद मनोज गौड़ को लगातार हिरासत में रखना, सज़ा से पहले सज़ा देने जैसा होगा और यह इस स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद, खासकर उन मामलों में जिनमें लंबी जांच और ट्रायल शामिल हो. याचिका में कहा गया है कि मनोज गौड़ के समाज में गहरे संबंध हैं और इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण पारिवारिक, सामाजिक और पेशेवर संबंध हैं.

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Last Updated: 2026-01-24 21:25:22

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Manoj Gaur Interim Bail: पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व CMD मनोज गौड़ को 14 दिन की अंतरिम जमानत दे दी. गौड़ 18 नवंबर, 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं, को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13 नवंबर, 2025 को 2018 के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें कथित तौर पर 13,000 करोड़ रुपये के हेरफेर का आरोप है.

क्यों मिली जमानत?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) धीरेंद्र राणा ने मनोज गौड़ को 5-5 लाख रुपये के दो जमानती मुचलकों पर अंतरिम जमानत दी. मनोज गौड़ के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और वकील फर्रुख खान ने दलील दी कि मनोज गौड़ की मां की सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ रही है क्योंकि वह बूढ़ी हैं और उन्हें डायलिसिस की जरूरत है.  उन्होंने कहा कि वह बहुत कमजोर हैं और कई बीमारियों से पीड़ित हैं. वह अपनी मां के साथ रहना चाहते हैं.

गौड़ का 30 साल का मेडिकल इतिहास

दूसरी ओर, विशेष लोक अभियोजक (SPP) अतुल त्रिपाठी ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी हैं. नियमित जमानत याचिका भी दायर की गई है. इस पर बहस के बाद यह भी कोर्ट में लंबित है. याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि गौड़ 61 साल के हैं और उनका 30 साल का मेडिकल इतिहास है. इसमें कहा गया है कि गौड़ की हिरासत, आठ साल पुराने ED मामले, दस्तावेजी आरोपों, व्यक्तिगत लाभ की अनुपस्थिति, कंपनियों पर नियंत्रण के वैधानिक विनिवेश, और गंभीर मेडिकल बीमारियों को देखते हुए, बहुत ज़्यादा अनुपातहीन है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है.
आगे यह भी कहा गया है कि किसी भी जांच की जरूरत न होने के बावजूद मनोज गौड़ को लगातार हिरासत में रखना, सज़ा से पहले सज़ा देने जैसा होगा और यह इस स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद, खासकर उन मामलों में जिनमें लंबी जांच और ट्रायल शामिल हो. याचिका में कहा गया है कि मनोज गौड़ के समाज में गहरे संबंध हैं और इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण पारिवारिक, सामाजिक और पेशेवर संबंध हैं.

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