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On Independence Day Eve Droupadi Murmu Address The Nation: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “आतंकवाद को पनाह देने वाले” राष्ट्र के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में, विशेष रूप से किसानों के लिए, एक निर्णायक कदम है.
राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों को “चाहे वे कहीं भी छिपें” परिणाम भुगतने होंगे और कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को प्रदर्शित किया है. राष्ट्रपति ने कहा, “आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में, विशेष रूप से हमारे किसानों के लिए एक निर्णायक कदम था.”
‘आतंकवादियों को इसके परिणाम भुगतने होंगे’
आतंकवाद के प्रति भारत के दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए, मुर्मू ने कहा कि आतंकी गतिविधियों में शामिल या उनका समर्थन करने वाले लोग जवाबदेही से बचने की उम्मीद नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, “आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों को चाहे वे कहीं भी छिपें, उन्हें परिणाम भुगतने ही पड़ेंगे.” ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकी नेटवर्क को सटीक रूप से निशाना बनाने में भारत के सशस्त्र बलों की क्षमताओं को प्रदर्शित किया है. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता का प्रदर्शन किया.”
सिंधु जल संधि का निलंबन
राष्ट्रपति मुर्मू ने सिंधु जल संधि के निलंबन को भारत के राष्ट्रीय हित में एक निर्णायक कदम बताया और विशेष रूप से इसे किसानों के हितों से जोड़ा. यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ व्यापक उपायों के तहत इस संधि को निलंबित कर दिया था.
राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां सीमा पार आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए राजनयिक और रणनीतिक उपायों के उपयोग पर बढ़ते ध्यान के बीच आई हैं.
भारत का नक्सल-मुक्त अभियान
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में हुई प्रगति को एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया. उन्होंने बस्तर में तीव्र विकास और सांस्कृतिक भागीदारी में वृद्धि का उल्लेख करते हुए उस क्षेत्र में हो रहे बदलावों की ओर इशारा किया जो लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा है.
वैश्विक अस्थिरता के बावजूद अर्थव्यवस्था में वृद्धि
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व भर में युद्ध, अस्थिरता और अनिश्चितता के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर वैश्विक औसत वृद्धि दर से दोगुनी से अधिक रहने का अनुमान है. उन्होंने समावेशी विकास पहलों के प्रभाव की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है. राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार के मुफ्त राशन कार्यक्रम का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है.