Private School Fees: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें एक सोशल मीडिया यूजर ने दावा किया है कि नोएडा में स्थित शिव नाडर स्कूल का एडमिशन फीस 2.1 लाख रुपये हैं. इसके अलावा, कॉशन मनी 75 हजार रुपये है. परीक्षा फीस को लेकर अभी कुछ तय नहीं किया गया है, जो कि सालाना लिया जाएगा. यूजर द्वारा शेयर किए गए प्रोसपैक्टस में अलग-अलग क्लास का अलग-अलग फीस दिखाया गया है.
फीस यहीं नहीं खत्म होता है. स्कूल द्वारा फाउंडेशन ईयर के नाम पर हर तीन महीने में 1.11 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं. इसके अलावा, किताब-कॉपी का खर्च, ट्रांसपोटेशन चार्ज, ड्रेस का खर्च आदि-आदि. अब सवाल उठता है कि इतने महंगे फीस में कोई अपने बच्चे को इस स्कूल में पढ़ा पाएगा?
एक देश-एक स्कूल फीस का नियम क्यों नहीं?
जिस तरह से हमारे देश में ‘एक देश-एक कानून’, ‘एक देश-एक चुनाव’ जैसे नियम कानून करने की कवायद तेज हो गई है. तो ठीक इसी तरह ‘एक देश-एक स्कूल फीस’ क्यों नहीं हो सकता है? ये सवाल हर किसी अभिभावक के मन में जरूर उठता होगा. अब सवाल ये भी उठता है कि जो माता-पिता सालाना 3 लाख रुपये महीना कमाते हैं तो क्या वो अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में पढ़ा सकते हैं?
The cartelisation of India’s education system is the single biggest burden on the middle class today. From school admissions and “donations” to textbooks, uniforms and stationery, an organised mafia is systematically looting parents of every last rupee. Politicians are… https://t.co/Cm8HFaHm2Y
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) April 28, 2026
बच्चे को कैसे पढ़ाएंगे माता-पिता?
अगर आप मुझसे इस सवाल का जवाब पूछेंगे तो हम कहेंगे कि बिल्कुल नहीं. दिल्ली-एनसीआर और बड़े-बड़े शहरों में मौजूद बड़े-बड़े स्कूल गरीब वर्ग से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के बच्चों के पहुंच से दूर है. ये तो दावे के साथ कहा जा सकता है. ये स्कूल जो महज एक उदाहरण हैं. इस तरह के कई स्कूल ऐसे हैं जो मोटी फीस वसूल रहे हैं. सरकारी स्कूलों की स्थिति देखिए और इन प्राइवेट स्कूलों की फीस को देखिए और अंदाजा लगाइए कि क्या कोई गरीब और मध्यम वर्ग के माता-पिता अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में पढ़ा पाएंगे.