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कोटा में रेल हादसा! गुड़ला रेलवे स्टेशन पर हुआ धमाका, एक के ऊपर एक चढ़ीं बोगी

Train Accident: बुधवार सुबह गुड़ला रेलवे स्टेशन पर हड़कंप मच गया. तेज रफ्तार मुंबई-अमृतसर स्पेशल ट्रेन लाइन नंबर-4 पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई. दो बोगियां एक दूसरे के ऊपर चढ़ गईं.

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Last Updated: October 7, 2026 17:01:22 IST

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Train Accident: बुधवार सुबह गुड़ला रेलवे स्टेशन पर अचानक ऐसा नजारा बना कि वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए. तेज रफ्तार मुंबई-अमृतसर स्पेशल ट्रेन लाइन नंबर-4 पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई. टक्कर के बाद ट्रेन के S-1 और S-2 कोच बुरी तरह पटरी से उतर गए और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. चारों तरफ अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल दिखाई देने लगा. शुरुआती सूचना में दो यात्रियों की मौत और चार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर ने रेलवे अधिकारियों को भी सकते में डाल दिया.

गौरतलब है कि ये कोई असली रेल हादसा नहीं था बल्कि पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से आयोजित फुल स्केल आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल थी. असली दुर्घटना जैसा माहौल बनाकर रेलवे ने यह जांचने की कोशिश की कि अगर कभी ऐसा खौफनाक हादसा हो जाए तो राहत और बचाव टीमें कितनी तेजी से मोर्चा संभाल सकती हैं.

सायरन बजते ही दौड़ पड़ीं राहत टीमें

सुबह करीब 8:55 बजे जैसे ही इमरजेंसी सायरन बजा, रेलवे कंट्रोल रूम से लेकर घटनास्थल तक हलचल तेज हो गई. सूचना मिलते ही अलग-अलग एजेंसियों को अलर्ट किया गया. करीब 20 मिनट के अंदर, सुबह 9:15 बजे दुर्घटना राहत चिकित्सा यान मौके पर पहुंच गया. इसके बाद NDRF, SDRF, RPF, सिविल डिफेंस और स्थानीय पुलिस की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंच गईं. हर टीम को अपनी जिम्मेदारी के हिसाब से काम सौंपा गया.

गैस कटर से काटे गए ट्रेन के कोच

मॉक ड्रिल के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा कोचों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालना था. बचाव दल ने गैस कटर की मदद से बोगियों के हिस्से काटे और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास किया. मेडिकल टीम ने मौके पर ही घायलों को प्राथमिक उपचार देने और गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल भेजने की प्रक्रिया भी पूरी की.

कई स्टेशनों पर बनाए गए हेल्प डेस्क

किसी बड़े हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों के परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और भरतपुर स्टेशनों पर इमरजेंसी हेल्प डेस्क बनाए गए. सुबह 10:26 बजे मॉक ड्रिल समाप्त होने की घोषणा की गई. इसके बाद DRM कोटा अनिल कालरा समेत NDRF, SDRF और रेलवे के अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन की समीक्षा की. अधिकारियों का कहना था कि ऐसी मॉक ड्रिल से असली हादसे के समय बचाव कार्य को तेज करने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है.

ये भी पढ़ें: ट्रिपल मर्डर से मचा हड़कंप; बुजुर्ग पति-पत्नी और नौकरानी की हत्या, पेचकस से गोदकर उतारा मौत के घाट

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Train Accident: बुधवार सुबह गुड़ला रेलवे स्टेशन पर अचानक ऐसा नजारा बना कि वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए. तेज रफ्तार मुंबई-अमृतसर स्पेशल ट्रेन लाइन नंबर-4 पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई. टक्कर के बाद ट्रेन के S-1 और S-2 कोच बुरी तरह पटरी से उतर गए और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. चारों तरफ अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल दिखाई देने लगा. शुरुआती सूचना में दो यात्रियों की मौत और चार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर ने रेलवे अधिकारियों को भी सकते में डाल दिया.

गौरतलब है कि ये कोई असली रेल हादसा नहीं था बल्कि पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से आयोजित फुल स्केल आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल थी. असली दुर्घटना जैसा माहौल बनाकर रेलवे ने यह जांचने की कोशिश की कि अगर कभी ऐसा खौफनाक हादसा हो जाए तो राहत और बचाव टीमें कितनी तेजी से मोर्चा संभाल सकती हैं.

सायरन बजते ही दौड़ पड़ीं राहत टीमें

सुबह करीब 8:55 बजे जैसे ही इमरजेंसी सायरन बजा, रेलवे कंट्रोल रूम से लेकर घटनास्थल तक हलचल तेज हो गई. सूचना मिलते ही अलग-अलग एजेंसियों को अलर्ट किया गया. करीब 20 मिनट के अंदर, सुबह 9:15 बजे दुर्घटना राहत चिकित्सा यान मौके पर पहुंच गया. इसके बाद NDRF, SDRF, RPF, सिविल डिफेंस और स्थानीय पुलिस की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंच गईं. हर टीम को अपनी जिम्मेदारी के हिसाब से काम सौंपा गया.

गैस कटर से काटे गए ट्रेन के कोच

मॉक ड्रिल के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा कोचों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालना था. बचाव दल ने गैस कटर की मदद से बोगियों के हिस्से काटे और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास किया. मेडिकल टीम ने मौके पर ही घायलों को प्राथमिक उपचार देने और गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल भेजने की प्रक्रिया भी पूरी की.

कई स्टेशनों पर बनाए गए हेल्प डेस्क

किसी बड़े हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों के परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और भरतपुर स्टेशनों पर इमरजेंसी हेल्प डेस्क बनाए गए. सुबह 10:26 बजे मॉक ड्रिल समाप्त होने की घोषणा की गई. इसके बाद DRM कोटा अनिल कालरा समेत NDRF, SDRF और रेलवे के अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन की समीक्षा की. अधिकारियों का कहना था कि ऐसी मॉक ड्रिल से असली हादसे के समय बचाव कार्य को तेज करने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है.

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