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‘हर साल 4.5 लाख लड़कियां दूसरे धर्म के पुरुषों के साथ भाग जाती हैं’, उषा ठाकुर का गरबा पर बड़ा दावा, गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने की मांग

Usha Thakur: इससे पहले 2022 में भी ठाकुर ने आयोजकों से अपील की थी कि वे पहचान पत्र की जांच के बाद ही गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश दें. उन्होंने कहा था कि किसी को भी अपनी पहचान छिपाकर पंडाल में प्रवेश नहीं करना चाहिए.

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Last Updated: September 23, 2026 13:55:30 IST

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Usha Thakur: बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने भी गरबा कार्यक्रमों में एंट्री से पहले पहचान की जांच की मांग की है. नवरात्रि के दौरान गरबा को लेकर मध्य प्रदेश के नेताओं के बयान लगातार आ रहे हैं. अब महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर भी इस चर्चा में शामिल हो गई हैं. ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है. ठाकुर ने कहा कि हर साल गरबा के बाद, लगभग 4.5 लाख हिंदू लड़कियां दूसरे धर्म के पुरुषों के साथ भाग जाती हैं और अगले साल लगभग 9 लाख बच्चों को जन्म देती हैं. विधायक ने मंगलवार को मीडिया के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान ये बातें कहीं. हालांकि, उन्होंने इस दावे को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक डेटा या स्रोत नहीं बताया.

विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में घुसते हैं वे तिलक और कलावा (पवित्र कलाई का धागा) पहनते हैं. ऐसे लोग हिंदू बेटियों को गुमराह करते हैं और उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर देते हैं. उन्होंने गरबा कार्यक्रमों में लोगों को प्रवेश देने से पहले उनकी पहचान की जांच करने की भी वकालत की.

ठाकुर ने क्या कहा?

ठाकुर ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के अभियान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि गरबा ‘शक्ति’ (दिव्य नारी शक्ति) की पूजा और ‘शास्त्र’ (धर्मग्रंथों) व ‘शस्त्र’ (हथियारों) के सम्मान का त्योहार है. हालांकि, आध्यात्मिक भक्ति के बजाय, यह तेज़ी से आधुनिक कपड़े, गहने और टैटू दिखाने का ज़रिया बनता जा रहा है.

इससे पहले, 2022 में भी ठाकुर ने आयोजकों से अपील की थी कि वे पहचान पत्र की जांच के बाद ही गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश दें. उन्होंने कहा था कि किसी को भी अपनी पहचान छिपाकर पंडाल में प्रवेश नहीं करना चाहिए.

गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बवाल

भोपाल के हुज़ूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विवादित बयान दिए हैं. उन्होंने करोंद में जन्माष्टमी के मौके पर ‘मटकी फोड़’ कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं; उनके बयान का एक वीडियो अब वायरल हो रहा है. उन्होंने पूछा था कि सिर्फ़ मुस्लिम पुरुष ही गरबा में क्यों शामिल होना चाहते हैं; उन्होंने सुझाव दिया कि अकेले आने के बजाय उन्हें अपनी बहनों और बेटियों को भी साथ लाना चाहिए. “हमारे लड़के भी तैयार हैं.”

उन्होंने कहा था, “अगर मुसलमान हमेशा के लिए इसमें शामिल होना चाहते हैं, तो हम तैयार हैं. आइए, ‘जय श्री राम’ का नारा लगाइए और माथे पर तिलक लगाइए. गौ माता की रक्षा कीजिए; अगर किसी को कोई समस्या हो, तो हमें बताएं.”

इसके जवाब में भोपाल सेंट्रल से कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद ने कहा, “रामेश्वर शर्मा का यह बयान बहुत घटिया और ओछा है. मैं बस इतना ही कहूंगा: अपनी आदतें सुधारिए. बदतमीज़ी मत कीजिए. ऐसे बुरे बयान मत दीजिए.”

रामेश्वर शर्मा ने टिप्पणी की थी, “अगर किसी को हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं से इतना गहरा लगाव हो गया है, तो उन्हें राम और कृष्ण को अपने दिलों में बसाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे रहीम और रसखान ने किया था.”

भोपाल में मौलाना अली कादर ने कहा, “मैं इस विचार का समर्थन करता हूं कि गरबा में केवल हिंदुओं को ही भाग लेना चाहिए. अगर दुनिया में कहीं भीमुसलमान गरबा करते हुए दिखें, तो उन्हें ज़बरदस्ती रोकें.”

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Usha Thakur: बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने भी गरबा कार्यक्रमों में एंट्री से पहले पहचान की जांच की मांग की है. नवरात्रि के दौरान गरबा को लेकर मध्य प्रदेश के नेताओं के बयान लगातार आ रहे हैं. अब महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर भी इस चर्चा में शामिल हो गई हैं. ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है. ठाकुर ने कहा कि हर साल गरबा के बाद, लगभग 4.5 लाख हिंदू लड़कियां दूसरे धर्म के पुरुषों के साथ भाग जाती हैं और अगले साल लगभग 9 लाख बच्चों को जन्म देती हैं. विधायक ने मंगलवार को मीडिया के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान ये बातें कहीं. हालांकि, उन्होंने इस दावे को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक डेटा या स्रोत नहीं बताया.

विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में घुसते हैं वे तिलक और कलावा (पवित्र कलाई का धागा) पहनते हैं. ऐसे लोग हिंदू बेटियों को गुमराह करते हैं और उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर देते हैं. उन्होंने गरबा कार्यक्रमों में लोगों को प्रवेश देने से पहले उनकी पहचान की जांच करने की भी वकालत की.

ठाकुर ने क्या कहा?

ठाकुर ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के अभियान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि गरबा ‘शक्ति’ (दिव्य नारी शक्ति) की पूजा और ‘शास्त्र’ (धर्मग्रंथों) व ‘शस्त्र’ (हथियारों) के सम्मान का त्योहार है. हालांकि, आध्यात्मिक भक्ति के बजाय, यह तेज़ी से आधुनिक कपड़े, गहने और टैटू दिखाने का ज़रिया बनता जा रहा है.

इससे पहले, 2022 में भी ठाकुर ने आयोजकों से अपील की थी कि वे पहचान पत्र की जांच के बाद ही गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश दें. उन्होंने कहा था कि किसी को भी अपनी पहचान छिपाकर पंडाल में प्रवेश नहीं करना चाहिए.

गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बवाल

भोपाल के हुज़ूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विवादित बयान दिए हैं. उन्होंने करोंद में जन्माष्टमी के मौके पर ‘मटकी फोड़’ कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं; उनके बयान का एक वीडियो अब वायरल हो रहा है. उन्होंने पूछा था कि सिर्फ़ मुस्लिम पुरुष ही गरबा में क्यों शामिल होना चाहते हैं; उन्होंने सुझाव दिया कि अकेले आने के बजाय उन्हें अपनी बहनों और बेटियों को भी साथ लाना चाहिए. “हमारे लड़के भी तैयार हैं.”

उन्होंने कहा था, “अगर मुसलमान हमेशा के लिए इसमें शामिल होना चाहते हैं, तो हम तैयार हैं. आइए, ‘जय श्री राम’ का नारा लगाइए और माथे पर तिलक लगाइए. गौ माता की रक्षा कीजिए; अगर किसी को कोई समस्या हो, तो हमें बताएं.”

इसके जवाब में भोपाल सेंट्रल से कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद ने कहा, “रामेश्वर शर्मा का यह बयान बहुत घटिया और ओछा है. मैं बस इतना ही कहूंगा: अपनी आदतें सुधारिए. बदतमीज़ी मत कीजिए. ऐसे बुरे बयान मत दीजिए.”

रामेश्वर शर्मा ने टिप्पणी की थी, “अगर किसी को हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं से इतना गहरा लगाव हो गया है, तो उन्हें राम और कृष्ण को अपने दिलों में बसाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे रहीम और रसखान ने किया था.”

भोपाल में मौलाना अली कादर ने कहा, “मैं इस विचार का समर्थन करता हूं कि गरबा में केवल हिंदुओं को ही भाग लेना चाहिए. अगर दुनिया में कहीं भीमुसलमान गरबा करते हुए दिखें, तो उन्हें ज़बरदस्ती रोकें.”

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