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Benjamin Netanyahu Prostate Cancer: इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने शुक्रवार को बताया कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था. उन्होंने घोषणा की कि प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण के सफल इलाज के बाद उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ घोषित कर दिया गया है. यह पहली बार है जब नेतन्याहू ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है.
20 अप्रैल, 2026 की तारीख वाली वार्षिक स्वास्थ्य रिपोर्ट में बताया गया है कि 76 वर्षीय नेतन्याहू की पहली सर्जरी 29 दिसंबर, 2024 को ‘बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया’ (प्रोस्टेट का बढ़ना) के इलाज के लिए हुई थी.
शुरुआती चरण का था प्रोस्टेट कैंसर
हदासा मेडिकल सेंटर में हुई इस प्रक्रिया को सफल और बिना किसी जटिलता वाला बताया गया. इसके बाद एक नियमित फॉलो-अप MRI में प्रोस्टेट में एक बहुत छोटा, संदिग्ध घाव (lesion) मिला, जिसका आकार एक मिलीमीटर से भी कम था. आगे की जांचों से प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में होने की पुष्टि हुई.
युद्ध की वजह से देरी से दी जानकारी
नेतन्याहू के अनुसार, रिपोर्ट जारी करने में दो महीने की देरी की गई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि युद्ध के दौरान ईरान को उनकी मेडिकल स्थिति का इस्तेमाल अपने दुष्प्रचार (propaganda) के लिए करने का मौका न मिले. नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि मैंने रिपोर्ट के प्रकाशन में देरी करने का फैसला किया, ताकि यह युद्ध के चरम पर सामने न आए और ईरान इसका इस्तेमाल दुष्प्रचार के लिए न कर सके. उन्होंने आगे बताया कि आज मैं कह सकता हूं कि प्रोस्टेट कैंसर के बहुत शुरुआती चरण का इलाज कराने के बाद, जिसे पूरी तरह से निकाल दिया गया है, मैं अच्छे स्वास्थ्य और बेहतरीन शारीरिक स्थिति में हूं.
प्रोस्टेट कैंसर के बारे में
जिन लोगों को जानकारी नहीं है, उनके लिए बता दें कि प्रोस्टेट कैंसर दुनिया भर में पुरुषों में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है. हालांकि प्रोस्टेट कैंसर के कुछ प्रकारों की दरें कम हुई हो सकती हैं, लेकिन गंभीर (advanced) मामलों में काफी वृद्धि हुई है.
दस साल पहले की तुलना में अब प्रोस्टेट स्वास्थ्य के बारे में कहीं अधिक जागरूकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस जागरूकता का असर बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाने में ज़्यादा नहीं दिखा है. एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी के कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित साप्ले ने कहा कि अधिकतर पुरुष तब इलाज के लिए आते हैं जब कैंसर प्रोस्टेट से बाहर फैल चुका होता है; यह उनके इलाज के नतीजों, उनकी जान और पूरी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर समस्या है.