अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के ठीक बाद अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित लारक द्वीप पर बड़ा हमला कर दिया. अमेरिका का दावा है कि ईरानी सेना एक बड़ी कार्रवाई की फिराक में थी, जिसे वक्त रहते नाकाम कर दिया गया. वहीं, इस एयरस्ट्राइक के बाद बौखलाए ईरान ने भी अमेरिका को अंजाम भुगतने और विनाशकारी पलटवार की खुली चुनौती दे दी है.
जानिए आखिर लारक द्वीप पर उस वक्त क्या हुआ और कैसे इस एक हमले ने खाड़ी क्षेत्र में फिर से महायुद्ध के हालात पैदा कर दिए हैं.
ईरान का पलटवार और अमेरिका की नाकेबंदी
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस, किंग हुसैन और अल-अज्रक के तकनीकी ढांचे और फाइटर जेट ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं. हालांकि, समाचार एजेंसी ‘अल अरबिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ईरानी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया.
यह पलटवार लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के बाद देखने को मिला है. लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले दो लहरों में हुए, जिसमें कई लोग हताहत हुए हैं.
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ उसकी समुद्री नाकेबंदी जारी है. सेंटकॉम के अनुसार, रविवार तक अमेरिकी सेना ने नाकेबंदी लागू करने के लिए 83 व्यावसायिक जहाजों के रास्ते बदले, 3 को बेअसर किया और 2 जहाजों पर बोर्डिंग करके जांच की.
IRGC की चेतावनी और आर्थिक तनाव
इस घटना के बाद IRGC ने एक बयान जारी कर सख्त चेतावनी दी है और हमले का बदला लेने की बात कही है. IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने अमेरिकी कार्रवाई को बड़ी भूल करार दिया.
हुसैन मोहेब्बी ने कहा, ‘आर्थिक युद्ध के बीच अमेरिकी प्रशासन का यह कदम एक घातक रणनीतिक गलती है. दुश्मन को इस गलतफहमी का खामियाजा सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर भुगतना पड़ेगा.’
गौर करने वाली बात यह है कि यह सैन्य टकराव अमेरिकी खजाना मंत्री स्कॉट बेसेट द्वारा 24 अगस्त को ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट की घोषणा के बाद हुआ है. इस अभियान का मकसद ईरान के वैश्विक वित्तीय नेटवर्क और कमाई के स्रोतों को पूरी तरह से काटना है.