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Zia-ul-Haq Case: क्या था जियाउल हक हत्याकांड? जिससे राजा भैया को मिली राहत; CBI ने लिया बड़ा फैसला

Zia-ul-Haq Case: सीओ जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को राहत मिली है. दोबारा जांच के बाद सीबीआई ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही, जिसे स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

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Last Updated: September 20, 2026 08:07:44 IST

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Zia-ul-Haq Case: सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री और विधायक राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है. लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट के इस फैसले के साथ ही राजा भैया के खिलाफ इस मामले में आगे कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है. मामले में जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मामले की फिर से जांच शुरू की थी.

राजा भैया के खिलाफ नहीं मिले पर्याप्त सबूत

दोबारा जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में राजा भैया को आरोपी नहीं बनाया गया. सीबीआई ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट और मामले से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई की. इसके बाद अदालत ने राजा भैया के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना और क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी जांच

परवीन आजाद ने पहले दाखिल सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में मामले की दोबारा जांच शुरू की. जांच के बाद दिसंबर 2023 में सीबीआई ने फिर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी.

ये भी पढ़ें: 10वीं पास हैं तो मौका हाथ से न जाने दें, इस विभाग में 23,757 पदों पर निकली वैकेंसी, जानें कौन और कैसे करें आवेदन

कब हुई थी जियाउल हक की हत्या?

प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद हालात बिगड़ गए थे. स्थिति संभालने पहुंचे सीओ जियाउल हक की भीड़ ने हत्या कर दी थी. इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. शुरुआती जांच के बाद भी सीबीआई ने राजा भैया और उनके कुछ करीबियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. अब दोबारा जांच के बाद कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है. हालांकि, मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया इससे अलग है.

ये भी पढ़ें: MP: मां बगलामुखी मंदिर दर्शन को आए भक्तों की कार नाले में बही, 3 बच्चों समेत 8 की मौत; मचा हड़कंप

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Last Updated: September 20, 2026 08:07:44 IST

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Zia-ul-Haq Case: सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री और विधायक राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है. लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट के इस फैसले के साथ ही राजा भैया के खिलाफ इस मामले में आगे कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है. मामले में जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मामले की फिर से जांच शुरू की थी.

राजा भैया के खिलाफ नहीं मिले पर्याप्त सबूत

दोबारा जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में राजा भैया को आरोपी नहीं बनाया गया. सीबीआई ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट और मामले से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई की. इसके बाद अदालत ने राजा भैया के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना और क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी जांच

परवीन आजाद ने पहले दाखिल सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में मामले की दोबारा जांच शुरू की. जांच के बाद दिसंबर 2023 में सीबीआई ने फिर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी.

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प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद हालात बिगड़ गए थे. स्थिति संभालने पहुंचे सीओ जियाउल हक की भीड़ ने हत्या कर दी थी. इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. शुरुआती जांच के बाद भी सीबीआई ने राजा भैया और उनके कुछ करीबियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. अब दोबारा जांच के बाद कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है. हालांकि, मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया इससे अलग है.

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