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Gayatri Parivaar: 31 अक्टूबर से दिल्ली में जन्मशताब्दी महोत्सव, डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताई रूपरेखा

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Published: October 29, 2026 17:52:14 IST
Last Updated: October 29, 2026 17:52:16 IST

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नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए वर्ष 2026 सौ वर्षों की साधना, त्याग और समर्पण की गौरवशाली यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म, अखंड दीप के प्रज्वलन और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन्मशताब्दी महोत्सव का दूसरा चरण 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय यह महोत्सव नारी जागरण, विश्व बंधुत्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को नई दिशा देने के साथ आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने का व्यापक मंच बनेगा।

जन्मशताब्दी महोत्सव के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक शताब्दी की तपस्या और उसके माध्यम से विकसित विचारधारा को जनजीवन में उतारने का अवसर है। इसका उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की समीक्षा करना तथा आने वाले वर्षों के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि जन्मशताब्दी महोत्सव का पहला चरण हरिद्वार में गंगा की दो धाराओं के बीच स्थित वैरागी द्वीप पर आयोजित किया गया था। श्रद्धा, साधना और जनसहभागिता से परिपूर्ण इस आयोजन ने देशभर के गायत्री परिजनों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। अब दिल्ली में होने वाला दूसरा चरण इसी चेतना को व्यापक सामाजिक सहभागिता और रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉ. पण्ड्या के अनुसार, दिल्ली में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देशभर से लगभग 24 हजार चयनित प्रतिभागियों को आमंत्रित करने की योजना है। इनमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों के साथ 10 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता अपेक्षित है। आयोजन के माध्यम से अनुभवी पीढ़ी के ज्ञान, जीवन मूल्यों और सामाजिक अनुभवों को युवा शक्ति की ऊर्जा, नवाचार और संकल्प के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

शासन, प्रशासन, शिक्षा, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक जगत से जुड़ी प्रमुख विभूतियों को भी आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की प्रस्तावित सहभागिता इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करती है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की विचारधारा में शासन की व्यवस्थागत शक्ति और अध्यात्म की नैतिक चेतना का समन्वय समाज कल्याण के लिए महत्वपूर्ण रहा है। जन्मशताब्दी महोत्सव इसी विचार को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों की भूमिका को सशक्त करने का प्रयास है।

महोत्सव के तीनों दिन विशिष्ट विषयों और सामाजिक उद्देश्यों पर केंद्रित होंगे।

पहला दिन: मातृशक्ति और नारी जागरण

महोत्सव का पहला दिन परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जीवन, उनके त्याग, साधना और महिला सशक्तीकरण में योगदान को समर्पित रहेगा। इस दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने की योजना है। साथ ही, माताजी की जन्मशताब्दी के अवसर पर स्मारक डाक टिकट और सिक्के के प्रस्तावित विमोचन की भी योजना है। यह दिवस नारी शक्ति की सामाजिक भूमिका, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान पर विचार-विमर्श का अवसर बनेगा।

दूसरा दिन: वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधुत्व

दूसरे दिन का प्रमुख विषय विश्व बंधुत्व, सांस्कृतिक एकता और मानवता का साझा भविष्य होगा। अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों, समाजों और समुदायों के बीच सद्भाव तथा सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रस्तावित सामूहिक दीपयज्ञ के माध्यम से विश्व शांति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प व्यक्त किए जाएंगे।

तीसरा दिन: युग निर्माण का महासंकल्प

महोत्सव का तीसरा दिन व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य को समर्पित रहेगा। इसमें पहले से संचालित रचनात्मक अभियानों की प्रगति की समीक्षा, भविष्य की प्राथमिकताओं का निर्धारण और सामाजिक परिवर्तन के लिए नई कार्ययोजनाओं पर विचार किया जाएगा। विशेष जोर इस बात पर रहेगा कि महोत्सव के दौरान लिए गए संकल्प केवल विचारों और घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और जनजीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बनें।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी महोत्सव का वास्तविक उद्देश्य एक शताब्दी से प्रज्वलित आध्यात्मिक चेतना को व्यापक सामाजिक जागरण में परिवर्तित करना है। युगऋषि की विचारधारा व्यक्ति के आंतरिक परिष्कार से लेकर परिवार की सुदृढ़ता और राष्ट्र के नैतिक उत्थान तक एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में होने वाले आयोजन के बाद नवंबर में हरिद्वार में प्रस्तावित चिंतन कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य की योजनाओं और अभियानों को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जब साधना सेवा से जुड़ेगी, युवा शक्ति अनुभवी मार्गदर्शन से प्रेरित होगी और शासन व्यवस्था नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ेगी, तभी व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का संकल्प व्यापक रूप से साकार हो सकेगा।

जन्मशताब्दी महोत्सव इसी विचार को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है—एक ऐसी चेतना का निर्माण, जिसमें आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित व्यक्ति, सशक्त परिवार और उत्तरदायी समाज मिलकर नवयुग के निर्माण में सहभागी बनें।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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Published: October 29, 2026 17:52:14 IST
Last Updated: October 29, 2026 17:52:16 IST

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नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए वर्ष 2026 सौ वर्षों की साधना, त्याग और समर्पण की गौरवशाली यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म, अखंड दीप के प्रज्वलन और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन्मशताब्दी महोत्सव का दूसरा चरण 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय यह महोत्सव नारी जागरण, विश्व बंधुत्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को नई दिशा देने के साथ आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने का व्यापक मंच बनेगा।

जन्मशताब्दी महोत्सव के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक शताब्दी की तपस्या और उसके माध्यम से विकसित विचारधारा को जनजीवन में उतारने का अवसर है। इसका उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की समीक्षा करना तथा आने वाले वर्षों के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि जन्मशताब्दी महोत्सव का पहला चरण हरिद्वार में गंगा की दो धाराओं के बीच स्थित वैरागी द्वीप पर आयोजित किया गया था। श्रद्धा, साधना और जनसहभागिता से परिपूर्ण इस आयोजन ने देशभर के गायत्री परिजनों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। अब दिल्ली में होने वाला दूसरा चरण इसी चेतना को व्यापक सामाजिक सहभागिता और रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉ. पण्ड्या के अनुसार, दिल्ली में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देशभर से लगभग 24 हजार चयनित प्रतिभागियों को आमंत्रित करने की योजना है। इनमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों के साथ 10 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता अपेक्षित है। आयोजन के माध्यम से अनुभवी पीढ़ी के ज्ञान, जीवन मूल्यों और सामाजिक अनुभवों को युवा शक्ति की ऊर्जा, नवाचार और संकल्प के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

शासन, प्रशासन, शिक्षा, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक जगत से जुड़ी प्रमुख विभूतियों को भी आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की प्रस्तावित सहभागिता इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करती है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की विचारधारा में शासन की व्यवस्थागत शक्ति और अध्यात्म की नैतिक चेतना का समन्वय समाज कल्याण के लिए महत्वपूर्ण रहा है। जन्मशताब्दी महोत्सव इसी विचार को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों की भूमिका को सशक्त करने का प्रयास है।

महोत्सव के तीनों दिन विशिष्ट विषयों और सामाजिक उद्देश्यों पर केंद्रित होंगे।

पहला दिन: मातृशक्ति और नारी जागरण

महोत्सव का पहला दिन परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जीवन, उनके त्याग, साधना और महिला सशक्तीकरण में योगदान को समर्पित रहेगा। इस दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने की योजना है। साथ ही, माताजी की जन्मशताब्दी के अवसर पर स्मारक डाक टिकट और सिक्के के प्रस्तावित विमोचन की भी योजना है। यह दिवस नारी शक्ति की सामाजिक भूमिका, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान पर विचार-विमर्श का अवसर बनेगा।

दूसरा दिन: वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधुत्व

दूसरे दिन का प्रमुख विषय विश्व बंधुत्व, सांस्कृतिक एकता और मानवता का साझा भविष्य होगा। अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों, समाजों और समुदायों के बीच सद्भाव तथा सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रस्तावित सामूहिक दीपयज्ञ के माध्यम से विश्व शांति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प व्यक्त किए जाएंगे।

तीसरा दिन: युग निर्माण का महासंकल्प

महोत्सव का तीसरा दिन व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य को समर्पित रहेगा। इसमें पहले से संचालित रचनात्मक अभियानों की प्रगति की समीक्षा, भविष्य की प्राथमिकताओं का निर्धारण और सामाजिक परिवर्तन के लिए नई कार्ययोजनाओं पर विचार किया जाएगा। विशेष जोर इस बात पर रहेगा कि महोत्सव के दौरान लिए गए संकल्प केवल विचारों और घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और जनजीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बनें।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी महोत्सव का वास्तविक उद्देश्य एक शताब्दी से प्रज्वलित आध्यात्मिक चेतना को व्यापक सामाजिक जागरण में परिवर्तित करना है। युगऋषि की विचारधारा व्यक्ति के आंतरिक परिष्कार से लेकर परिवार की सुदृढ़ता और राष्ट्र के नैतिक उत्थान तक एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में होने वाले आयोजन के बाद नवंबर में हरिद्वार में प्रस्तावित चिंतन कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य की योजनाओं और अभियानों को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जब साधना सेवा से जुड़ेगी, युवा शक्ति अनुभवी मार्गदर्शन से प्रेरित होगी और शासन व्यवस्था नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ेगी, तभी व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का संकल्प व्यापक रूप से साकार हो सकेगा।

जन्मशताब्दी महोत्सव इसी विचार को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है—एक ऐसी चेतना का निर्माण, जिसमें आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित व्यक्ति, सशक्त परिवार और उत्तरदायी समाज मिलकर नवयुग के निर्माण में सहभागी बनें।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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