Live TV
Search
Home > लाइफस्टाइल > Tourism in India: भारतीयों को समंदर नहीं, मंदिर बुला रहे, 48% यात्राएं आस्था के नाम

Tourism in India: भारतीयों को समंदर नहीं, मंदिर बुला रहे, 48% यात्राएं आस्था के नाम

Tourism in India: भारत में घरेलू पर्यटन की सबसे बड़ी वजह छुट्टियां या मनोरंजन नहीं, बल्कि तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा है. MoSPI के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर घरेलू रात्रिकालीन यात्राओं में धार्मिक यात्रा की हिस्सेदारी 48 फीसदी रही. सर्वे में यात्रा की अवधि, परिवहन, ठहरने की व्यवस्था और खर्च से लेकर राज्यों के हिसाब से यात्रियों की आवाजाही तक कई पहलुओं की तस्वीर सामने आई है.

Written By:
Last Updated: September 28, 2026 20:29:23 IST

Mobile Ads 1x1

Tourism in India: भारत में लोग घूमने के लिए ही सफर नहीं करते, बल्कि आस्था भी देश के भीतर यात्रा करने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (DTES) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में होने वाली घरेलू रात्रिकालीन यात्राओं में करीब 48 फीसदी का संबंध तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा से है. ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों को मिलाकर यह घरेलू यात्राओं का सबसे बड़ा उद्देश्य बनकर सामने आया है. यह सर्वे नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें दौर के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया. इसमें देश के भीतर लोगों की यात्रा से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है. मसलन, लोग किस वजह से यात्रा करते हैं, कितने समय तक रुकते हैं, कितना खर्च करते हैं और रहने के लिए किस तरह की जगह चुनते हैं.

छुट्टियों से कहीं आगे धार्मिक यात्राएं

सर्वे के मुताबिक घरेलू रात्रिकालीन यात्राओं में तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा की हिस्सेदारी 48 फीसदी रही. इन यात्राओं में छुट्टियां, मनोरंजन, तीर्थयात्रा, स्वास्थ्य और खरीदारी जैसे अलग-अलग उद्देश्य शामिल थे. इन सभी में धार्मिक यात्रा सबसे आगे रही. यानी सोशल मीडिया पर भले ही छुट्टियों और घूमने-फिरने की तस्वीरें ज्यादा नजर आती हों, लेकिन देश के भीतर वास्तविक रात्रिकालीन यात्राओं में धार्मिक स्थलों की यात्रा का हिस्सा काफी बड़ा है.

गांव और शहर में दूसरी पसंद अलग

धार्मिक यात्राओं के बाद यात्रा के दूसरे प्रमुख कारण में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अंतर देखने को मिला. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं 38.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. वहीं शहरी इलाकों में छुट्टियां मनाने, मनोरंजन और घूमने-फिरने से जुड़ी यात्राएं 36.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रहीं. इससे पता चलता है कि यात्रा के उद्देश्य में जगह और रहने के क्षेत्र के हिसाब से काफी अंतर है.

घरेलू पर्यटन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

राज्यों की बात करें तो घरेलू पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा. राज्य के भीतर यात्रा करने वाले लोगों और दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश आने वाले यात्रियों, दोनों को मिलाकर कुल विजिटर-ट्रिप्स में राज्य की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही. इसके बाद तमिलनाडु 13.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे और राजस्थान 8 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर रहा. आंकड़े बताते हैं कि धार्मिक और अन्य घरेलू यात्राओं के लिहाज से इन राज्यों में बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है.

स्वास्थ्य यात्रा में सबसे ज्यादा खर्च

यात्रा का उद्देश्य बदलने के साथ खर्च में भी बड़ा अंतर देखने को मिला. ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं सबसे महंगी रहीं. ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी यात्राओं पर औसत खर्च 29,454 रुपये रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 41,649 रुपये रहा. इसमें पैकेज और गैर-पैकेज, दोनों तरह के खर्च शामिल हैं. वहीं छुट्टियां, मनोरंजन और घूमने-फिरने के लिए की जाने वाली यात्राओं में परिवहन खर्च सबसे बड़ा खर्च वाला हिस्सा रहा.

ढाई लाख से ज्यादा परिवारों से जुटाए गए आंकड़े

घरेलू पर्यटन की यह तस्वीर बड़ी संख्या में परिवारों से मिले आंकड़ों पर आधारित है. सर्वे में कुल 2,46,113 परिवारों को शामिल किया गया. इनमें 1,42,603 ग्रामीण और 1,03,510 शहरी परिवार थे. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में घरेलू पर्यटन की तस्वीर सिर्फ छुट्टियों और मनोरंजन तक सीमित नहीं है. धार्मिक यात्रा इसका सबसे बड़ा हिस्सा है, जबकि स्वास्थ्य, मनोरंजन और अन्य जरूरतों से जुड़ी यात्राएं भी लोगों के देश के भीतर सफर करने की बड़ी वजह बनी हुई हैं.

MORE NEWS

Home > लाइफस्टाइल > Tourism in India: भारतीयों को समंदर नहीं, मंदिर बुला रहे, 48% यात्राएं आस्था के नाम

Written By:
Last Updated: September 28, 2026 20:29:23 IST

Mobile Ads 1x1

Tourism in India: भारत में लोग घूमने के लिए ही सफर नहीं करते, बल्कि आस्था भी देश के भीतर यात्रा करने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (DTES) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में होने वाली घरेलू रात्रिकालीन यात्राओं में करीब 48 फीसदी का संबंध तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा से है. ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों को मिलाकर यह घरेलू यात्राओं का सबसे बड़ा उद्देश्य बनकर सामने आया है. यह सर्वे नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें दौर के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया. इसमें देश के भीतर लोगों की यात्रा से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है. मसलन, लोग किस वजह से यात्रा करते हैं, कितने समय तक रुकते हैं, कितना खर्च करते हैं और रहने के लिए किस तरह की जगह चुनते हैं.

छुट्टियों से कहीं आगे धार्मिक यात्राएं

सर्वे के मुताबिक घरेलू रात्रिकालीन यात्राओं में तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा की हिस्सेदारी 48 फीसदी रही. इन यात्राओं में छुट्टियां, मनोरंजन, तीर्थयात्रा, स्वास्थ्य और खरीदारी जैसे अलग-अलग उद्देश्य शामिल थे. इन सभी में धार्मिक यात्रा सबसे आगे रही. यानी सोशल मीडिया पर भले ही छुट्टियों और घूमने-फिरने की तस्वीरें ज्यादा नजर आती हों, लेकिन देश के भीतर वास्तविक रात्रिकालीन यात्राओं में धार्मिक स्थलों की यात्रा का हिस्सा काफी बड़ा है.

गांव और शहर में दूसरी पसंद अलग

धार्मिक यात्राओं के बाद यात्रा के दूसरे प्रमुख कारण में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अंतर देखने को मिला. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं 38.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. वहीं शहरी इलाकों में छुट्टियां मनाने, मनोरंजन और घूमने-फिरने से जुड़ी यात्राएं 36.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रहीं. इससे पता चलता है कि यात्रा के उद्देश्य में जगह और रहने के क्षेत्र के हिसाब से काफी अंतर है.

घरेलू पर्यटन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

राज्यों की बात करें तो घरेलू पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा. राज्य के भीतर यात्रा करने वाले लोगों और दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश आने वाले यात्रियों, दोनों को मिलाकर कुल विजिटर-ट्रिप्स में राज्य की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही. इसके बाद तमिलनाडु 13.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे और राजस्थान 8 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर रहा. आंकड़े बताते हैं कि धार्मिक और अन्य घरेलू यात्राओं के लिहाज से इन राज्यों में बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है.

स्वास्थ्य यात्रा में सबसे ज्यादा खर्च

यात्रा का उद्देश्य बदलने के साथ खर्च में भी बड़ा अंतर देखने को मिला. ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं सबसे महंगी रहीं. ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी यात्राओं पर औसत खर्च 29,454 रुपये रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 41,649 रुपये रहा. इसमें पैकेज और गैर-पैकेज, दोनों तरह के खर्च शामिल हैं. वहीं छुट्टियां, मनोरंजन और घूमने-फिरने के लिए की जाने वाली यात्राओं में परिवहन खर्च सबसे बड़ा खर्च वाला हिस्सा रहा.

ढाई लाख से ज्यादा परिवारों से जुटाए गए आंकड़े

घरेलू पर्यटन की यह तस्वीर बड़ी संख्या में परिवारों से मिले आंकड़ों पर आधारित है. सर्वे में कुल 2,46,113 परिवारों को शामिल किया गया. इनमें 1,42,603 ग्रामीण और 1,03,510 शहरी परिवार थे. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में घरेलू पर्यटन की तस्वीर सिर्फ छुट्टियों और मनोरंजन तक सीमित नहीं है. धार्मिक यात्रा इसका सबसे बड़ा हिस्सा है, जबकि स्वास्थ्य, मनोरंजन और अन्य जरूरतों से जुड़ी यात्राएं भी लोगों के देश के भीतर सफर करने की बड़ी वजह बनी हुई हैं.

MORE NEWS