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डिनर के लिए डेट नहीं, बस एक सीट चाहिए…मेट्रो सिटीज में बढ़ रहा सोलो डिनर का ट्रेंड

Solo Dining India: भारत में अकेले रेस्टोरेंट जाकर खाना खाने का चलन तेजी से बदल रहा है. अब लोग अकेले डाइनिंग को मजबूरी के बजाय अपनी पसंद और सुविधा के तौर पर देख रहे हैं. युवा प्रोफेशनल्स, महिलाएं, पर्यटक और वर्क ट्रैवलर्स इस ट्रेंड का हिस्सा हैं. इसे देखते हुए कई रेस्टोरेंट छोटे पोर्शन, सिंगल डाइनर मेन्यू और लचीली सीटिंग जैसी सुविधाओं पर काम कर रहे हैं. हालांकि अकेले ग्राहक से बिल कम आता है, लेकिन रेस्टोरेंट इसे लंबे समय के ग्राहक संबंध और बेहतर टेबल टर्नओवर के नजरिए से भी देख रहे हैं.

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Last Updated: September 15, 2026 17:33:43 IST

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Solo Dining India: एक समय था जब भारत में रेस्टोरेंट में अकेले जाकर खाना खाना थोड़ा अजीब माना जाता था. अकेले बैठे व्यक्ति को देखकर लोग अक्सर समझते थे कि शायद वह किसी का इंतजार कर रहा है. लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है. देश के शहरों में अकेले खाना खाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है और खास बात यह है कि कई लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद से अकेले डाइनिंग कर रहे हैं. रेस्टोरेंट संचालकों के मुताबिक, सोलो डाइनर्स में युवा प्रोफेशनल्स, महिलाएं, पर्यटक, आसपास रहने वाले नियमित ग्राहक और काम के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोग शामिल हैं. यानी अकेले रेस्टोरेंट जाना अब अकेलेपन का संकेत नहीं, बल्कि अपनी पसंद और सुविधा के मुताबिक समय बिताने का तरीका बन रहा है.
 

2021 के बाद बढ़ा अकेले डाइनिंग का चलन

 
कोरोना महामारी के बाद अकेले डाइनिंग में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिली. Burma Burma के को-फाउंडर अंकित गुप्ता के मुताबिक, 2021 के बाद उनके रेस्टोरेंट में सोलो डाइनिंग बढ़ी और यह ट्रेंड बाद में भी कायम रहा. उनके मुताबिक, अब अकेले आने वाले ग्राहक सिर्फ मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से भी खाना खाते हैं. दिल्ली के Top Banana में फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव शेफ और ब्रांड लीड तरन्नुम सहगल के अनुसार, वहां करीब 10-15 प्रतिशत ग्राहक अकेले डाइनिंग करते हैं, खासकर बार में. वहीं Burma Burma में ऐसे ग्राहक करीब 5-6 प्रतिशत कवर्स हैं.]
 

रेस्टोरेंट बदल रहे हैं टेबल और सीटिंग का तरीका

 
अकेले ग्राहक के लिए समस्या कई बार खाना नहीं बल्कि टेबल होती है. चार लोगों की टेबल पर अकेले बैठना उन्हें असहज कर सकता है. इसी वजह से कुछ रेस्टोरेंट अब अपनी सीटिंग व्यवस्था बदल रहे हैं. Burma Burma ने दो लोगों के लिए बनी टेबल की संख्या बढ़ाई है. वहीं NAVU में अकेले ग्राहक को बार सीट, खिड़की के पास दो लोगों की टेबल या उपलब्ध होने पर बड़ी टेबल दी जा सकती है. मकसद यह है कि अकेला ग्राहक खुद को रेस्टोरेंट में असहज महसूस न करे.
 

छोटे पोर्शन और सिंगल डाइनर मेन्यू पर जोर

 
अकेले खाने वाले ग्राहक के लिए बड़ा मेन्यू और ज्यादा मात्रा में परोसी जाने वाली डिश परेशानी बन सकती है. इसी कारण छोटे प्लेट और तपस स्टाइल मेन्यू लोकप्रिय हो रहे हैं. इससे एक व्यक्ति कम मात्रा में कई डिश ट्राई कर सकता है. Burma Burma ने सिंगल डाइनर मेन्यू भी तैयार किया है, जिसमें एक व्यक्ति के लिए स्टार्टर, मेन कोर्स और डेजर्ट जैसी चीजें शामिल की गई हैं. इससे ज्यादा खाना ऑर्डर करने और फूड वेस्ट की समस्या कम हो सकती है.
 

अकेले आए ग्राहक को न ज्यादा घेरें, न नजरअंदाज करें

 
सोलो डाइनिंग में सर्विस भी महत्वपूर्ण है. अकेला ग्राहक न तो चाहता है कि स्टाफ उसे नजरअंदाज करे और न ही यह कि बार-बार उसकी टेबल पर आकर उसे असहज किया जाए. अगर ग्राहक बातचीत करना चाहता है तो स्टाफ उससे जुड़ सकता है, लेकिन अगर वह शांति से खाना चाहता है तो उसे निजता मिलनी चाहिए. रेस्टोरेंट के लिए एक व्यक्ति की टेबल से कम कमाई हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यही ग्राहक बार-बार लौटने वाला नियमित ग्राहक बन सकता है. यही वजह है कि ‘टेबल फॉर वन’ अब रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए कोई अजीब या अधूरी व्यवस्था नहीं, बल्कि बदलती डाइनिंग संस्कृति का हिस्सा बन रही है.

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Solo Dining India: एक समय था जब भारत में रेस्टोरेंट में अकेले जाकर खाना खाना थोड़ा अजीब माना जाता था. अकेले बैठे व्यक्ति को देखकर लोग अक्सर समझते थे कि शायद वह किसी का इंतजार कर रहा है. लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है. देश के शहरों में अकेले खाना खाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है और खास बात यह है कि कई लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद से अकेले डाइनिंग कर रहे हैं. रेस्टोरेंट संचालकों के मुताबिक, सोलो डाइनर्स में युवा प्रोफेशनल्स, महिलाएं, पर्यटक, आसपास रहने वाले नियमित ग्राहक और काम के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोग शामिल हैं. यानी अकेले रेस्टोरेंट जाना अब अकेलेपन का संकेत नहीं, बल्कि अपनी पसंद और सुविधा के मुताबिक समय बिताने का तरीका बन रहा है.
 

2021 के बाद बढ़ा अकेले डाइनिंग का चलन

 
कोरोना महामारी के बाद अकेले डाइनिंग में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिली. Burma Burma के को-फाउंडर अंकित गुप्ता के मुताबिक, 2021 के बाद उनके रेस्टोरेंट में सोलो डाइनिंग बढ़ी और यह ट्रेंड बाद में भी कायम रहा. उनके मुताबिक, अब अकेले आने वाले ग्राहक सिर्फ मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से भी खाना खाते हैं. दिल्ली के Top Banana में फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव शेफ और ब्रांड लीड तरन्नुम सहगल के अनुसार, वहां करीब 10-15 प्रतिशत ग्राहक अकेले डाइनिंग करते हैं, खासकर बार में. वहीं Burma Burma में ऐसे ग्राहक करीब 5-6 प्रतिशत कवर्स हैं.]
 

रेस्टोरेंट बदल रहे हैं टेबल और सीटिंग का तरीका

 
अकेले ग्राहक के लिए समस्या कई बार खाना नहीं बल्कि टेबल होती है. चार लोगों की टेबल पर अकेले बैठना उन्हें असहज कर सकता है. इसी वजह से कुछ रेस्टोरेंट अब अपनी सीटिंग व्यवस्था बदल रहे हैं. Burma Burma ने दो लोगों के लिए बनी टेबल की संख्या बढ़ाई है. वहीं NAVU में अकेले ग्राहक को बार सीट, खिड़की के पास दो लोगों की टेबल या उपलब्ध होने पर बड़ी टेबल दी जा सकती है. मकसद यह है कि अकेला ग्राहक खुद को रेस्टोरेंट में असहज महसूस न करे.
 

छोटे पोर्शन और सिंगल डाइनर मेन्यू पर जोर

 
अकेले खाने वाले ग्राहक के लिए बड़ा मेन्यू और ज्यादा मात्रा में परोसी जाने वाली डिश परेशानी बन सकती है. इसी कारण छोटे प्लेट और तपस स्टाइल मेन्यू लोकप्रिय हो रहे हैं. इससे एक व्यक्ति कम मात्रा में कई डिश ट्राई कर सकता है. Burma Burma ने सिंगल डाइनर मेन्यू भी तैयार किया है, जिसमें एक व्यक्ति के लिए स्टार्टर, मेन कोर्स और डेजर्ट जैसी चीजें शामिल की गई हैं. इससे ज्यादा खाना ऑर्डर करने और फूड वेस्ट की समस्या कम हो सकती है.
 

अकेले आए ग्राहक को न ज्यादा घेरें, न नजरअंदाज करें

 
सोलो डाइनिंग में सर्विस भी महत्वपूर्ण है. अकेला ग्राहक न तो चाहता है कि स्टाफ उसे नजरअंदाज करे और न ही यह कि बार-बार उसकी टेबल पर आकर उसे असहज किया जाए. अगर ग्राहक बातचीत करना चाहता है तो स्टाफ उससे जुड़ सकता है, लेकिन अगर वह शांति से खाना चाहता है तो उसे निजता मिलनी चाहिए. रेस्टोरेंट के लिए एक व्यक्ति की टेबल से कम कमाई हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यही ग्राहक बार-बार लौटने वाला नियमित ग्राहक बन सकता है. यही वजह है कि ‘टेबल फॉर वन’ अब रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए कोई अजीब या अधूरी व्यवस्था नहीं, बल्कि बदलती डाइनिंग संस्कृति का हिस्सा बन रही है.

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