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Home > लाइफस्टाइल > सोते-सोते अचानक लगता है जैसे गिर गए, झटके से खुल जाती है नींद, जानें क्या है हाइपनिक जर्क का रहस्य

सोते-सोते अचानक लगता है जैसे गिर गए, झटके से खुल जाती है नींद, जानें क्या है हाइपनिक जर्क का रहस्य

Feeling of falling while sleeping: सोते समय अचानक गिरने जैसा महसूस होना और उसी झटके से नींद खुल जाना एक आम अनुभव हो सकता है. वैज्ञानिक भाषा में इसे हाइपनिक जर्क कहा जाता है, जो नींद में जाने के दौरान होने वाला अनैच्छिक मांसपेशियों का झटका है. इसके पीछे स्लीप-वेक ट्रांजिशन, नर्वस सिस्टम की गतिविधि और मांसपेशियों के तेजी से रिलैक्स होने जैसी कई संभावित थ्योरी बताई जाती हैं, लेकिन इसका एक निश्चित कारण अभी पूरी तरह स्थापित नहीं है.

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Last Updated: September 27, 2026 20:03:27 IST

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Feeling of falling while sleeping: क्या आपको भी कभी सोते-सोते अचानक ऐसा महसूस हुआ है जैसे आप किसी ऊंचाई से नीचे गिर रहे हों? कई बार इस एहसास के साथ हाथ-पैर या पूरा शरीर अचानक झटके से हिलता है और नींद खुल जाती है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. वैज्ञानिक भाषा में इस घटना को हाइपनिक जर्क कहा जाता है. इसे हिप्नागॉजिक जर्क, स्लीप स्टार्ट या नाइट स्टार्ट भी कहा जाता है. यह आमतौर पर नींद में जाने के दौरान होने वाला अचानक और अनैच्छिक मांसपेशियों का झटका है.

गिरने जैसा एहसास क्यों होता है?

हाइपनिक जर्क के दौरान व्यक्ति को सिर्फ शरीर में झटका महसूस नहीं होता, बल्कि कई बार ऐसा भी लगता है जैसे उसका पैर फिसल गया हो, किसी ने धक्का दे दिया हो या वह अचानक नीचे गिर गया हो. साइंस लिटरेचर में इसे नींद और जागने के बीच होने वाले बदलाव यानी स्लीप-वेक ट्रांजिशन से जुड़ी सामान्य घटना माना जाता है. हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक इसके एक पक्के और अंतिम कारण पर सहमत नहीं हैं. इसके पीछे कई संभावित एक्सप्लेनेशन और थ्योरी बताई गई हैं.

नींद में जाते ही शरीर के साथ क्या बदलता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, एक संभावित थ्योरी यह है कि जब हम नींद में जाने लगते हैं तो शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं. इस दौरान दिमाग शरीर की बदलती स्थिति को कभी-कभी मूवमेंट या अस्थिरता की तरह इंटरप्रेट कर सकता है. ऐसे में दिमाग मांसपेशियों को एक्टिव करने का सिग्नल भेज सकता है और अचानक झटका महसूस हो सकता है. इसे आसान उदाहरण से समझें तो जैसे सीढ़ी पर खड़े व्यक्ति का पैर अचानक थोड़ा डगमगाए  शरीर तुरंत अपना संतुलन संभालने के लिए मांसपेशियों को टाइट कर दे.

दिमाग के ‘सिग्नल’ से जुड़ी एक और थ्योरी

हाइपनिक जर्क को समझाने वाली एक अन्य थ्योरी नर्वस सिस्टम की गतिविधि और स्लीप-वेक ट्रांजिशन के दौरान होने वाले बदलावों से जुड़ी है. स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, हाइपनिक जर्क और दूसरे प्रकार के मायोक्लोनस दिमाग के उस हिस्से से जुड़े हो सकते हैं जो अचानक चौंकने पर शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, सोने के दौरान रेटिक्युलर ब्रेनस्टेम की नसों के बीच कभी-कभी एक तरह के ‘मिसफायर’ की संभावना मानी जाती है. इससे अचानक मांसपेशियों की गतिविधि शुरू हो सकती है और शरीर झटके से हिल सकता है. आसान भाषा में कहें तो नींद में जाते समय दिमाग और शरीर के बीच सिग्नल तेजी से बदल रहे होते हैं. इसी बदलाव के दौरान कोई सिग्नल गलत समय पर एक्टिव होने की संभावना मानी जाती है, जिससे हाथ, पैर या पूरे शरीर में अचानक झटका महसूस हो सकता है.

क्या शरीर का रिलैक्स होना गिरने जैसा लगता है?

एक दूसरी संभावित थ्योरी के मुताबिक, जब शरीर नींद में जाने लगता है तो मांसपेशियां तेजी से रिलैक्स होती हैं. दिमाग इस बदलाव को कुछ पल के लिए अस्थिरता या गिरने की स्थिति की तरह इंटरप्रेट कर सकता है. मान लीजिए आप बिस्तर पर लेटे हैं और शरीर धीरे-धीरे पूरी तरह रिलैक्स हो रहा है. इसी दौरान अगर दिमाग इस बदलाव को संभावित मूवमेंट या गिरने के संकेत की तरह लेता है, तो वह मांसपेशियों को अचानक एक्टिव कर सकता है. इसी वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप गिर गए या किसी ने धक्का दे दिया. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक संभावित एक्सप्लेनेशन है. इसे हाइपनिक जर्क का वैज्ञानिक रूप से साबित अंतिम कारण नहीं माना जाता.

क्या यह हमारे पूर्वजों से जुड़ी कोई पुरानी प्रतिक्रिया है?

हाइपनिक जर्क को समझाने के लिए एक इवोल्यूशनरी थ्योरी भी सामने रखी गई है. इस विचार के मुताबिक, हमारे बहुत पुराने पूर्वजों के लिए सोते समय शरीर का अचानक रिलैक्स होना किसी अस्थिर जगह से गिरने के जोखिम से जुड़ा हो सकता था. इस थ्योरी में माना जाता है कि मांसपेशियों के रिलैक्स होने को दिमाग संभावित गिरने के संकेत की तरह लेता और शरीर को अचानक टाइट करने की प्रतिक्रिया पैदा होती. हालांकि, इसे स्थापित वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता. यह एक इवोल्यूशनरी हाइपोथिसिस है और वैज्ञानिक रिव्यू अभी भी हाइपनिक जर्क के सटीक ओरिजिन और मैकेनिज्म को पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानते.

अगली बार झटके से नींद खुले तो घबराएं नहीं

अगर अगली बार सोते-सोते अचानक लगे कि आप नीचे गिर गए हैं और उसी पल आपका पैर, हाथ या पूरा शरीर झटके से हिल जाए, तो जरूरी नहीं कि यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो. कई मामलों में यह नींद और जागने की अवस्था के बीच होने वाले बदलाव से जुड़ी सामान्य घटना हो सकती है. हाइपनिक जर्क के पीछे अलग-अलग संभावित वैज्ञानिक व्याख्याएं मौजूद हैं, लेकिन इसका एक निश्चित कारण अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है. इसलिए गिरने जैसा अचानक एहसास और उसके साथ शरीर का झटका महसूस होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शरीर में कोई गंभीर समस्या है.

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Last Updated: September 27, 2026 20:03:27 IST

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Feeling of falling while sleeping: क्या आपको भी कभी सोते-सोते अचानक ऐसा महसूस हुआ है जैसे आप किसी ऊंचाई से नीचे गिर रहे हों? कई बार इस एहसास के साथ हाथ-पैर या पूरा शरीर अचानक झटके से हिलता है और नींद खुल जाती है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. वैज्ञानिक भाषा में इस घटना को हाइपनिक जर्क कहा जाता है. इसे हिप्नागॉजिक जर्क, स्लीप स्टार्ट या नाइट स्टार्ट भी कहा जाता है. यह आमतौर पर नींद में जाने के दौरान होने वाला अचानक और अनैच्छिक मांसपेशियों का झटका है.

गिरने जैसा एहसास क्यों होता है?

हाइपनिक जर्क के दौरान व्यक्ति को सिर्फ शरीर में झटका महसूस नहीं होता, बल्कि कई बार ऐसा भी लगता है जैसे उसका पैर फिसल गया हो, किसी ने धक्का दे दिया हो या वह अचानक नीचे गिर गया हो. साइंस लिटरेचर में इसे नींद और जागने के बीच होने वाले बदलाव यानी स्लीप-वेक ट्रांजिशन से जुड़ी सामान्य घटना माना जाता है. हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक इसके एक पक्के और अंतिम कारण पर सहमत नहीं हैं. इसके पीछे कई संभावित एक्सप्लेनेशन और थ्योरी बताई गई हैं.

नींद में जाते ही शरीर के साथ क्या बदलता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, एक संभावित थ्योरी यह है कि जब हम नींद में जाने लगते हैं तो शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं. इस दौरान दिमाग शरीर की बदलती स्थिति को कभी-कभी मूवमेंट या अस्थिरता की तरह इंटरप्रेट कर सकता है. ऐसे में दिमाग मांसपेशियों को एक्टिव करने का सिग्नल भेज सकता है और अचानक झटका महसूस हो सकता है. इसे आसान उदाहरण से समझें तो जैसे सीढ़ी पर खड़े व्यक्ति का पैर अचानक थोड़ा डगमगाए  शरीर तुरंत अपना संतुलन संभालने के लिए मांसपेशियों को टाइट कर दे.

दिमाग के ‘सिग्नल’ से जुड़ी एक और थ्योरी

हाइपनिक जर्क को समझाने वाली एक अन्य थ्योरी नर्वस सिस्टम की गतिविधि और स्लीप-वेक ट्रांजिशन के दौरान होने वाले बदलावों से जुड़ी है. स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, हाइपनिक जर्क और दूसरे प्रकार के मायोक्लोनस दिमाग के उस हिस्से से जुड़े हो सकते हैं जो अचानक चौंकने पर शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, सोने के दौरान रेटिक्युलर ब्रेनस्टेम की नसों के बीच कभी-कभी एक तरह के ‘मिसफायर’ की संभावना मानी जाती है. इससे अचानक मांसपेशियों की गतिविधि शुरू हो सकती है और शरीर झटके से हिल सकता है. आसान भाषा में कहें तो नींद में जाते समय दिमाग और शरीर के बीच सिग्नल तेजी से बदल रहे होते हैं. इसी बदलाव के दौरान कोई सिग्नल गलत समय पर एक्टिव होने की संभावना मानी जाती है, जिससे हाथ, पैर या पूरे शरीर में अचानक झटका महसूस हो सकता है.

क्या शरीर का रिलैक्स होना गिरने जैसा लगता है?

एक दूसरी संभावित थ्योरी के मुताबिक, जब शरीर नींद में जाने लगता है तो मांसपेशियां तेजी से रिलैक्स होती हैं. दिमाग इस बदलाव को कुछ पल के लिए अस्थिरता या गिरने की स्थिति की तरह इंटरप्रेट कर सकता है. मान लीजिए आप बिस्तर पर लेटे हैं और शरीर धीरे-धीरे पूरी तरह रिलैक्स हो रहा है. इसी दौरान अगर दिमाग इस बदलाव को संभावित मूवमेंट या गिरने के संकेत की तरह लेता है, तो वह मांसपेशियों को अचानक एक्टिव कर सकता है. इसी वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप गिर गए या किसी ने धक्का दे दिया. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक संभावित एक्सप्लेनेशन है. इसे हाइपनिक जर्क का वैज्ञानिक रूप से साबित अंतिम कारण नहीं माना जाता.

क्या यह हमारे पूर्वजों से जुड़ी कोई पुरानी प्रतिक्रिया है?

हाइपनिक जर्क को समझाने के लिए एक इवोल्यूशनरी थ्योरी भी सामने रखी गई है. इस विचार के मुताबिक, हमारे बहुत पुराने पूर्वजों के लिए सोते समय शरीर का अचानक रिलैक्स होना किसी अस्थिर जगह से गिरने के जोखिम से जुड़ा हो सकता था. इस थ्योरी में माना जाता है कि मांसपेशियों के रिलैक्स होने को दिमाग संभावित गिरने के संकेत की तरह लेता और शरीर को अचानक टाइट करने की प्रतिक्रिया पैदा होती. हालांकि, इसे स्थापित वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता. यह एक इवोल्यूशनरी हाइपोथिसिस है और वैज्ञानिक रिव्यू अभी भी हाइपनिक जर्क के सटीक ओरिजिन और मैकेनिज्म को पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानते.

अगली बार झटके से नींद खुले तो घबराएं नहीं

अगर अगली बार सोते-सोते अचानक लगे कि आप नीचे गिर गए हैं और उसी पल आपका पैर, हाथ या पूरा शरीर झटके से हिल जाए, तो जरूरी नहीं कि यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो. कई मामलों में यह नींद और जागने की अवस्था के बीच होने वाले बदलाव से जुड़ी सामान्य घटना हो सकती है. हाइपनिक जर्क के पीछे अलग-अलग संभावित वैज्ञानिक व्याख्याएं मौजूद हैं, लेकिन इसका एक निश्चित कारण अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है. इसलिए गिरने जैसा अचानक एहसास और उसके साथ शरीर का झटका महसूस होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शरीर में कोई गंभीर समस्या है.

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