असम के एक बैंक मैनेजर के लिए सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती और इंस्टाग्राम पर मिली एक महिला के साथ मुलाकात कथित तौर पर जबरन वसूली के जाल में बदल गई. बताया जाता है कि महिला ने उसे जोरहाट बुलाया, जहां उसे एक किराए के मकान में ले जाया गया और कुछ लोगों ने उसे धमकाया कि वे उसका वीडियो वायरल कर देंगे और उसके परिवार को भी भेज देंगे.
पुलिस के अनुसार, बैंक मैनेजर ने आखिरकार कथित गिरोह को 3 लाख रुपये दे दिए, लेकिन जब आरोपियों ने उससे 5 लाख रुपये और मांगे तो उसने पुलिस से संपर्क किया.
महिला ने कथित तौर पर मैनेजर को जोरहाट बुलाया
बैंक मैनेजर और महिला के बीच सोशल मीडिया के ज़रिए संबंध बने. बताया जाता है कि महिला ने मैनेजर को जोरहाट आने का न्योता दिया, जिसके बाद मैनेजर वहां गए. मैनेजर रात करीब 1 बजे पहुंचे और महिला से मिले, जो उन्हें सिवनी अली इलाके में एक किराए के मकान में ले गई. जब दोनों अंदर थे, तभी कुछ अज्ञात लोगों ने दरवाज़ा खटखटाया. महिला के दरवाज़ा खोलने के बाद, वे लोग जबरदस्ती अंदर घुस गए और बैंक मैनेजर का वीडियो बनाने लगे.
3 लाख रुपये की कथित जबरन वसूली
आरोपियों ने कथित तौर पर वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने और मैनेजर के परिवार वालों को भेजने की धमकी दी. पुलिस ने बताया कि गिरोह ने पहले 2 लाख रुपये की मांग की. अंजाम भुगतने के डर से मैनेजर ने कथित तौर पर रकम दे दी. बाद में आरोपियों ने और पैसे मांगे, जिसके बाद उसने कथित तौर पर 1 लाख रुपये और दे दिए. 3 लाख रुपये मिलने के बाद गिरोह ने कथित तौर पर 5 लाख रुपये की और मांग की. धमकियां जारी रहने पर बैंक मैनेजर ने आखिरकार जोरहाट पुलिस स्टेशन में जाकर जबरन वसूली की शिकायत दर्ज कराई.
चार गिरफ्तार, साजिश का मास्टरमाइंड थी महिला
पुलिस ने इस मामले में संजीव दास और अंकित पॉल नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया. बाद में अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. जांच के दौरान, पुलिस ने मोरोमी दास नियोग को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में पहचाना. एक विशिष्ट सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसे डिब्रूगढ़ से गिरफ्तार किया. एक अन्य महिला, बेबी बोरा, और उसके पति, अंकित बोरा को भी कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह कथित जबरन वसूली रैकेट के तहत व्यापारियों सहित आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्तियों को निशाना बना रहा होगा. जांच जारी है.