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Home > अजब गजब न्यूज > Marriage Graduation: तलाक से बेहतर है ‘ग्रेजुएशन’… जापान के मैरिड कपल्स का ये सीक्रेट आपको भी हैरान कर देगा!

Marriage Graduation: तलाक से बेहतर है ‘ग्रेजुएशन’… जापान के मैरिड कपल्स का ये सीक्रेट आपको भी हैरान कर देगा!

Divorce vs Marriage Graduation: आपने कॉलेज से ग्रेजुएट होते लोग तो देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी शादीशुदा जिंदगी का ग्रेजुएशन के बारे में सुना है? जापान के शादीशुदा कपल्स में मैरिज ग्रेजुएशन का ट्रेंड काफी बढ़ रहा है. जानें क्या है ये कॉन्सेप्ट और क्या है तलाक के मामलों को रोकने में हेल्पफुल है?

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Last Updated: 2026-04-24 13:05:52

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Divorce vs Marriage Graduation: दुनिया में ऐसा कोई कपल नहीं है, जिसकी शादीशुदा जिंदगी में उतार चढ़ाव न आए हों. कई बार रिश्तों में ऐसे हालात भी बन जाते हैं कि शादी नहीं बच पाती और डिवॉर्स की नौबत तक आ जाती हैं. आकंड़ों पर नजर डालें तो पुर्तगाल में सबसे ज्यादा तलाक होते हैं, हालांकि भारत में भी अब तलाक के केस बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जापान के लोग कभी तलाक लेने जैसा गंभीर कदम नहीं उठाते. यदि हालात गंभीर हो भी जाए तो जापान के मैरिड कपल तलाक के बजाए शादी से ग्रेजुएशन ले लेते हैं. जानें क्या है ये ‘मैरिज ग्रेजुएशन’, जिसमें न वकील का खर्च, न कोर्ट जाने की टेंशन, बस साथ रहते हुए राहें अलग हो जाती है. 

क्या है मैरिज ग्रेजुएशन

जापान में मैरिज ग्रेजुएशन को ‘सोत्सुकॉन’ भी कहते हैं. ये कॉन्सेप्ट युमिको सुगियामा की 2004 में पब्लिश बुक ‘Sotsukon no Susume’ से मशहूर हुआ. दरअसल, जापान में शादी का मतलब होता था कि पति बाहर कमाने जाए और पत्नि सिर्फ घर संभालें. कई दशकों तक शादियां ऐसे ही चलती थीं, लेकिन जब पति को रिटायरमेंट मिल जाती था, तब भी पत्नि को पति की 24 घंटे देखभाल करनी पड़ती थी. ऐसी स्थिति में महिलाएं पूरा दिन काम करते करते परेशान हो जाती थीं.

कैसे होता है मैरिज ग्रेजुएशन

मैरिज ग्रेजुएशन, डिवोर्स के कॉन्सेप्ट से काफी अलग है, क्योंकि इसमें न कोई लीगल प्रोसीडिंग होती है और न ही कोई खर्च आदि होता है. जब रिश्ते में गंभीर परिस्थितियां आ जाती है तो शादीशुदा कपल अपनी राहें अलग कर लेते हैं. Sotsukon को मेंटल डिवोर्स भी कह सकते हैं, जिसमें कई बार कपल एक घर में या अलग अलग कमरों में रहने लगते हैं. अपनी जिम्मेदारियां और टाइम तो शेयर करते हैं, लेकिन किसी भी तरह की एक्सपेक्टेशन, प्रैशर या कंट्रोल नहीं होता. ऐसे में सामाजिक सुरक्षा बनी रहती है.

मैरिज ग्रेजुएशन पर सर्वे

युमिको सुगियामा की ‘Sotsukon no Susume’ किताब आने के बाद, साल 2008 में 200 जापानी महिलाओं पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 60 वर्ष की 79% महिलाएं Sotsukon यानी मैरिज ग्रेजुएशन के पक्ष में थीं. जापान की महिलाओं ने कहा कि वो भी घर की चार दीवारी में घरेलू कामों को करते हुए जिंदगी बिताती है. ऐसे में वो अपने अधूरे सपनों पर्सनल टाइम को नहीं जी पाती. फिल्हाल ये कॉन्सेप्ट जापान की शादीशुदा महिलाओं को बिना तलाक जिंदगी जीने की आजादी और सुकून की वजह बन रहा है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है. 

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Divorce vs Marriage Graduation: दुनिया में ऐसा कोई कपल नहीं है, जिसकी शादीशुदा जिंदगी में उतार चढ़ाव न आए हों. कई बार रिश्तों में ऐसे हालात भी बन जाते हैं कि शादी नहीं बच पाती और डिवॉर्स की नौबत तक आ जाती हैं. आकंड़ों पर नजर डालें तो पुर्तगाल में सबसे ज्यादा तलाक होते हैं, हालांकि भारत में भी अब तलाक के केस बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जापान के लोग कभी तलाक लेने जैसा गंभीर कदम नहीं उठाते. यदि हालात गंभीर हो भी जाए तो जापान के मैरिड कपल तलाक के बजाए शादी से ग्रेजुएशन ले लेते हैं. जानें क्या है ये ‘मैरिज ग्रेजुएशन’, जिसमें न वकील का खर्च, न कोर्ट जाने की टेंशन, बस साथ रहते हुए राहें अलग हो जाती है. 

क्या है मैरिज ग्रेजुएशन

जापान में मैरिज ग्रेजुएशन को ‘सोत्सुकॉन’ भी कहते हैं. ये कॉन्सेप्ट युमिको सुगियामा की 2004 में पब्लिश बुक ‘Sotsukon no Susume’ से मशहूर हुआ. दरअसल, जापान में शादी का मतलब होता था कि पति बाहर कमाने जाए और पत्नि सिर्फ घर संभालें. कई दशकों तक शादियां ऐसे ही चलती थीं, लेकिन जब पति को रिटायरमेंट मिल जाती था, तब भी पत्नि को पति की 24 घंटे देखभाल करनी पड़ती थी. ऐसी स्थिति में महिलाएं पूरा दिन काम करते करते परेशान हो जाती थीं.

कैसे होता है मैरिज ग्रेजुएशन

मैरिज ग्रेजुएशन, डिवोर्स के कॉन्सेप्ट से काफी अलग है, क्योंकि इसमें न कोई लीगल प्रोसीडिंग होती है और न ही कोई खर्च आदि होता है. जब रिश्ते में गंभीर परिस्थितियां आ जाती है तो शादीशुदा कपल अपनी राहें अलग कर लेते हैं. Sotsukon को मेंटल डिवोर्स भी कह सकते हैं, जिसमें कई बार कपल एक घर में या अलग अलग कमरों में रहने लगते हैं. अपनी जिम्मेदारियां और टाइम तो शेयर करते हैं, लेकिन किसी भी तरह की एक्सपेक्टेशन, प्रैशर या कंट्रोल नहीं होता. ऐसे में सामाजिक सुरक्षा बनी रहती है.

मैरिज ग्रेजुएशन पर सर्वे

युमिको सुगियामा की ‘Sotsukon no Susume’ किताब आने के बाद, साल 2008 में 200 जापानी महिलाओं पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 60 वर्ष की 79% महिलाएं Sotsukon यानी मैरिज ग्रेजुएशन के पक्ष में थीं. जापान की महिलाओं ने कहा कि वो भी घर की चार दीवारी में घरेलू कामों को करते हुए जिंदगी बिताती है. ऐसे में वो अपने अधूरे सपनों पर्सनल टाइम को नहीं जी पाती. फिल्हाल ये कॉन्सेप्ट जापान की शादीशुदा महिलाओं को बिना तलाक जिंदगी जीने की आजादी और सुकून की वजह बन रहा है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है. 

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