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पंजाब का सबसे मशहूर डांस कैसे बना दुनिया की पहचान? इस मशहूर नृत्य का इतिहास चौंका देगा

Bhangra History: भांगड़ा का नाम सुनते ही ढोल की तेज थाप, रंग-बिरंगी पगड़ियां और जोश से भरे डांस मूव्स आंखों के सामने आ जाते हैं. आज यह सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसकी धूम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी खेतों में किसानों की मेहनत और फसल कटने की खुशी से जुड़ा यह नृत्य आज पंजाब की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है? आइए तस्वीरों के जरिए जानते हैं भांगड़े के इतिहास से लेकर इसके पहनावे और खास अंदाज तक की कहानी.

Last Updated: August 14, 2026 | 12:59 PM IST
Bhangra is not just a dance, it is the identity of Punjab. - Photo Gallery
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भांगड़ा सिर्फ डांस नहीं, पंजाब की पहचान है

भांगड़ा पंजाब के सबसे लोकप्रिय लोकनृत्यों में से एक है. इसकी खासियत इसकी तेज ऊर्जा, उत्साह और सामूहिक अंदाज है. आज भांगड़ा त्योहारों, शादियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंचीय प्रस्तुतियों का अहम हिस्सा बन चुका है. पंजाब की संस्कृति में नृत्य के जरिए खुशी और उत्साह व्यक्त करने की परंपरा काफी पुरानी है.

The story of Bhangra is linked to the joy of harvest. - Photo Gallery
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फसल कटने की खुशी से जुड़ी है भांगड़े की कहानी

भांगड़े की शुरुआत को पंजाब के किसानों और फसल कटाई की परंपरा से जोड़ा जाता है. बैसाखी के आसपास गेहूं की फसल तैयार होने के बाद किसान अपनी मेहनत का जश्न मनाते थे. खेतों में फसल की खुशी के बीच ढोल बजता और लोग नाचते-गाते थे. इसी तरह का उत्सव धीरे-धीरे भांगड़े की पहचान से जुड़ गया.

There is a deep relationship with crutches - Photo Gallery
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बैसाखी से रहा है गहरा रिश्ता

बैसाखी पंजाब का प्रमुख फसल उत्सव है और भांगड़े का इससे खास संबंध रहा है. फसल की कटाई पूरी होने पर किसान अपनी मेहनत की खुशी मनाते थे. ढोल की थाप और लोकगीतों के साथ होने वाला यह नृत्य सामूहिक जश्न का हिस्सा बना. समय के साथ भांगड़ा बैसाखी के अलावा दूसरे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी किया जाने लगा.

Footsteps dance to the beat of the drum - Photo Gallery
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ढोल की थाप पर थिरकते हैं कदम

भांगड़े में ढोल की थाप सबसे अहम होती है. नर्तक तेज कदमों, उछलने और हाथों को ऊपर उठाने वाले ऊर्जावान मूव्स के साथ प्रस्तुति देते हैं. पारंपरिक भांगड़े में पंजाबी लोकगीत, बोलियां और टप्पे भी शामिल होते हैं. यही तेज लय और सामूहिक अंदाज इसे बाकी नृत्य शैलियों से अलग बनाता है.

Bhangra is not just limited to men. - Photo Gallery
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सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रहा भांगड़ा

पारंपरिक रूप से भांगड़ा मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता था, लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ी और महिलाएं भी भांगड़ा प्रस्तुत करने लगीं. आज कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंचीय प्रस्तुतियों में पुरुष और महिलाएं दोनों साथ मिलकर भांगड़ा करते दिखाई देते हैं.

These traditional instruments create the atmosphere of Bhangra. - Photo Gallery
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इन पारंपरिक वाद्ययंत्रों से बनता है भांगड़े का माहौल

भांगड़े में ढोल की सबसे खास भूमिका होती है. इसके अलावा पारंपरिक प्रस्तुतियों में चिमटा, साप या छिक्का जैसे वाद्ययंत्रों का भी इस्तेमाल किया जाता है. ढोल की दमदार आवाज और दूसरे लोक वाद्ययंत्र भांगड़े की प्रस्तुति में जोश और लय बढ़ाते हैं.

Colourful turbans and distinctive attire are its hallmarks. - Photo Gallery
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रंगीन पगड़ी और खास पहनावा है इसकी पहचान

भांगड़े के पारंपरिक पहनावे में रंगों की खास भूमिका होती है. पुरुष आमतौर पर रंगीन पगड़ी, कुर्ता-पायजामा या पारंपरिक ढीला पहनावा और कढ़ाईदार जैकेट पहनते हैं. सिर पर बंधी पगड़ी में लगाया जाने वाला तुरला भी भांगड़े के पारंपरिक रूप को खास पहचान देता है.

Bhangra rose from the fields to the world stage. - Photo Gallery
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खेतों से निकलकर दुनिया के मंच तक पहुंचा भांगड़ा

समय के साथ भांगड़े ने पारंपरिक सीमाओं को पार कर लिया. अब इसे शादियों, कॉलेज कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक समारोहों और मंचीय प्रस्तुतियों में देखा जाता है. आधुनिक संगीत और पॉप संस्कृति में भी भांगड़ा बीट्स का इस्तेमाल होता है. इसके बावजूद ढोल की थाप, जोशीले कदम और पंजाबी संस्कृति से इसका जुड़ाव आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं.

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