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कौन थीं भारत की पहली महिला टीचर, लड़कियों के लिए खोला पढ़ाई का रास्ता, कुरीतियों से भी कराया रूबरू

Savitribai Phule: आज के समय में लड़कों के साथ ही लड़कियों की शिक्षा को भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि लड़कियों की पढ़ाई का श्रेय किसे जाता है? वो थीं भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले. सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में हुआ था. वे एक दलित परिवार में जन्मी थीं. उनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे था और माता का नाम लक्ष्मी था. सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षक थीं, जिन्होंने लड़कियों के लिए पढ़ाई के रास्ते खोले और उनके लिए स्कूल खुलवाए.

Last Updated: March 10, 2026 | 4:38 PM IST
Who was Savitri Bai Phule - Photo Gallery
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कौन थीं सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले एक शिक्षक होने के साथ ही भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता थीं, जो समाज सुधारक और मराठी कवियित्री भी थीं. उन्होंने लड़कियों को पढ़ाने का बेड़ा उठाया था. इसके कारण उन्हें समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा. कई बार समाज के ठेकेदारों ने उन्हें पत्थर तक मारे लेकिन सावित्रीबाई नहीं रुकीं. उन्होंने बच्चियों को शिक्षित करने के साथ ही लोगों को कुरीतियों के खिलाफ जागरुक किया.

There was no right to read in the 18th century - Photo Gallery
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18वीं सदी में नहीं था पढ़ने का अधिकार

आज देश की महिलाएं टेक्‍नोलॉजी से लेकर स्‍पेस तक हर जगह पर अपना परचम लहरा रही हैं लेकिन आजादी से पहले उन्हें पढ़ाई करने तक का हक नहीं था. 18वीं सदी के समय पर लड़कियों को स्कूल भेजना भी पाप समझा जाता था. ऐसे में उन्होंने समाज को बताया कि ये लड़कियों को पढ़़ाना कोई गलत बात नहीं है. हालांकि उन्हें ये सफर तय करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था.

throw stones while savitribai going to school - Photo Gallery
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स्कूल जाते समय मारते थे पत्थर

कहा जाता है कि जब वे स्कूल जाया करती थीं, तो लोग उन्हें पत्थर मारते थे. इसके बावजूद वो नहीं रुकीं और खुद पढ़ने के साथ ही लड़कियों व महिलाओं को भी शिक्षा का हक दिलाया. उन्होंने अपने पति समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया.

Savitribai Phule Opened school on 18th birthday - Photo Gallery
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18वें जन्मदिन पर खोला स्कूल

उन्होंने अपने 18वें जन्मदिन पर यानी 3 जनवरी 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की. शुरुआत में उस स्कूल में अलग-अलग जाति की नौ छात्राओं का एडमिशन हुआ. एक साल के अंदर सावित्रीबाई फुले और महात्मा फुले ने कुल पांच स्कूल खोले. उस समय की सरकार ने उन्हें सम्मानित किया.

Savitribai Marriage in 9 Years Age - Photo Gallery
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9 साल की उम्र में विवाह

बता दें कि सावित्रीबाई जब नौ साल की थीं, तो उनका विवाह हो गया था. 1840 में उनका विवाह समाजसेवी ज्योतिराव फुले से हो गया. शादी के बाद वे अपने पति के साथ पुणे गईं. वे शादी के समय तक पढ़ लिखी नहहीं थीं लेकिन वे पढ़ना चाहती थीं. उनकी लगन देखकर उनके पति ने उन्हें पढ़ना और लिखना सिखाया. काफी पढ़ने लिखने के बाद उन्होंने सावित्रीबाई ने अहमदनगर और पुणे में शिक्षक बनने की ट्रेनिंग ली और एक बेहतरीन शिक्षिका बन गईं.

Savitribai faced opposition - Photo Gallery
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झेलना पड़ा विरोध

देश में आजादी से पहले छुआछूत, बाल विवाह और सती प्रथा जोरों पर थी. ऐसे में वे खुद दलित समुदाय से आती थीं, जिसके कारण उन्हें दलित महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने के लिए एक बड़े वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा था. कई बार जब वे स्कूल जाती थीं, तो उनके ऊपर गंदगी और पत्थर फेंके जाते थे. इसके कारण वे हमेशा अपने साथ एक साड़ी लेकर चलती थीं. स्कूल पहुंचने पर गंदी साड़ी को बदल लेती थीं.

Savitribai Opened shelter for widows - Photo Gallery
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विधवाओं के लिए खोला आश्रय

सावित्रीबाई देश में महिलाओं की दुर्दशा देखकर काफी दुखी हो जाती थीं.. इसके कारण उन्होंने साल 1854 में विधवाओं के रहने के लिए एक आश्रय शुरू किया. 1864 में ये एक बड़ा आश्रय बन गया. सावित्रीबाई उन सभी लोगों को पढ़ाया और जागरुक किया करती थीं. एक समय पर एक ही कुएं से ऊंचे और निचले तबके के लोगों को पानी लेना मना था. इसके कारण उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर एक अलग कुआं खोदा, जिसके बाद दलित लोग उस कुएं से पानी भरने लगे.

Savitribai Phule death - Photo Gallery
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सावित्रीबाई फुले का निधन

सावित्रीबाई फुले का निधन 10 मार्च 1897 को हुआ था. पुणे में प्लेग के मरीजों की सेवा करते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली थी. उन्होंने अंतिम समय में भी निस्वार्थ सेवा करते हुए ही उनका निधन हुआ.

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