किस मनोकामना की पूर्ति के लिए किस ज्योतिर्लिंग का करना चाहिए दर्शन? जानें द्वादश ज्योतिर्लिंग का महत्व!
केदारनाथ
ऐसी मान्यता है कि जो लोग आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष पाना चाहते हैं उन्हें उत्तराखंड स्थित इस मंदिर में दर्शन करना चाहिए. केदारनाथ के दर्शन से लोगों के पाप कट जाते हैं और उन्हें मुक्ति मिलती है.
महाकालेश्वर
उज्जैन स्थित इस मंदिर में भगवान शिव को राजा के रूप में पूजा जाता है. ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है. ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन करने से हर तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है.
काशी विश्वनाथ
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्त्व है. ऐसा माना जाता है कि विश्वनाथ का दर्शन करने से व्यक्ति को महादेव का आशीर्वाद मिलता है और किसी भी काम में आ रही बाधा दूर होती है.
वैद्यनाथ
यह ज्योतिर्लिंग देवघर में स्थित है. ऐसा माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग में दर्शन करने से लोगों को आयु की प्राप्ति होती है और साथ ही सभी रोगों का नाश होता है.
त्र्यंबकेशवर
ऐसा माना जाता है कि नासिक स्थित इस ज्योतिर्लिंग में दर्शन करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सोमनाथ
ऐसा माना जाता है कि जो लोग धन और वैभव प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें बाबा सोमनाथ का दर्शन करना चाहिए. सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में अरब सागर के तट पर स्थित है. इस ज्योतिर्लिंग को प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है.
रामेश्वरम
ऐसा माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं प्रभु श्रीराम ने की थी. इस मंदिर को स्वर्ग का प्रवेशद्वार माना जाता है. जो लोग जीवन में शांति चाहते हैं उन्हें इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करना चाहिए।
मल्लिकार्जुन
ऐसी मान्यता है कि श्रीसैलम, आंध्र प्रदेश स्थित इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से विवाह में आ रही बाधा दूर होती है. साथ ही ये भी माना जाता है कि विवाहित जोड़ों के यहां दर्शन करने से वैवाहिक बाधा दूर होती है.
ओंकारेश्वर
नर्मदा नदी के तट पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. लोगों का ऐसा मानना है कि यहां दर्शन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
भीमाशंकर
महाराष्ट्र स्थित इस ज्योतिर्लिंग का भी बहुत ज्यादा महत्त्व है. लोगों का मानना है कि जो लोग किसी तरह के विवाद में फंसे हैं, यहां दर्शन करने से उनको इन विवादों से छुटकारा मिल जाता है.
नागेश्वर
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका से लगभग 17 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भगवान शिव का एक अति पवित्र और प्रसिद्ध मंदिर है. यह हिन्दू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से दसवां स्थान रखता है। यहाँ भगवान शिव को नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है.
घृष्णेश्वर
घृष्णेश्वर (Ghrishneshwar) भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम (बारहवां) पवित्र ज्योतिर्लिंग है। यह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के पास वेरूल (Berul) गांव में स्थित है। इस मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं शताब्दी में रानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था. ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन करने से घर में समृद्धि आती है.