स्वयं चंद्रदेव ने स्थापित किया था ये ज्योतिर्लिंग, विदेशी आक्रमणकारी भी नहीं कर सके नष्ट, जानिये प्रथम ज्योतिर्लिंग से जुड़े interesting facts!
गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर, जिसे “शाश्वत तीर्थ” के नाम से जाना जाता है, भारत के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से पहला है, जो तीन नदियों और अरब सागर के संगम पर स्थित है. इस मंदिर का सनातन धर्म महत्त्व है. कई आक्रमण झेलने के बाद भी यह मंदिर आज भी हमारे सामने है. इस मंदिर का 17 बार पुनर्निर्माण कराया गया, जो इसकी दृढ़ता का प्रतीक है. आइये जानते हैं इससे जुड़े कई दिलचस्प तथ्य!
ज्योतिर्लिंगों में प्रथम
इसे भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम और सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों को वैभव चाहिए उन्हें इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करना चाहिए।
पौराणिक रचनाकार
किंवदंती के अनुसार, पहला मंदिर सोम (चंद्रमा देवता) द्वारा सोने में बनाया गया था. बता दें कि वर्तमान मंदिर का निर्माण भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद किया गया था, जिसका निर्माण 1947-1951 के बीच हुआ था।
शाश्वत तीर्थस्थल
1026 में महमूद गजनी सहित विभिन्न आक्रमणकारियों द्वारा कई बार नष्ट और लूटे जाने के बावजूद इस मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण किया गया, जो इसकी अपार सहनशीलता को दर्शाता है.
बान-स्तंभ (तीर स्तंभ)
समुद्र-सुरक्षा दीवार पर स्थित, इस स्तंभ पर एक शिलालेख है जो यह दर्शाता है कि यह उस देशांतर के साथ अंटार्कटिका के ठीक उत्तर में भूमि पर पहला बिंदु है.
स्थापत्य कला का चमत्कार
मारू-गुर्जर (चालुक्य) शैली में निर्मित इस संरचना में जटिल नक्काशी, शिव, विष्णु और ब्रह्मा की विस्तृत मूर्तियां और 37 फुट ऊंचा ध्वज स्तंभ है
त्रिवेणी संगम
यह तीन पवित्र नदियों कपिला, हिरन और सरस्वती के संगम स्थल पर स्थित है. अरब सागर में विलीन होने से पहले ये नदियां आपस में मिलती हैं.